T+1 सेटलमेंट क्या है — खरीदे हुए शेयर और बेचने का पैसा असल में किस दिन आता है
T+1 का मतलब है, सौदे के अगले कारोबारी दिन शेयर और पैसे का लेन-देन पूरा होना। शुक्रवार, छुट्टी और settlement holiday पर यह तारीख कैसे खिसकती है।
एक लाइन में
T+1 सेटलमेंट (settlement, यानी सौदे का असली लेन-देन पूरा होना) का मतलब है कि आज के सौदे में शेयर और पैसा अगले कारोबारी दिन अपनी जगह पहुंच जाते हैं। यानी आज खरीदे हुए शेयर अगले कारोबारी दिन आपके demat खाते में आते हैं, और आज बेचे गए शेयरों का पैसा भी उसी अगले दिन settle होता है।
T का मतलब trade day, यानी सौदे का दिन। +1 का मतलब एक कारोबारी दिन आगे — 24 घंटे या अगली कैलेंडर तारीख नहीं। शनिवार, रविवार, बाजार की छुट्टी और settlement holiday इस गिनती में नहीं आते।
भारत में यह नियम धीरे-धीरे, करीब एक साल में आया। 25 फरवरी 2022 को मार्केट कैप (कंपनी के सारे शेयरों की कुल कीमत) के हिसाब से सबसे नीचे के 100 शेयरों से शुरुआत हुई, हर महीने अगले शेयर जुड़ते गए, और 27 जनवरी 2023 से सारे शेयर T+1 पर आ गए। उससे पहले T+2 चलता था, यानी दो कारोबारी दिन लगते थे।
खरीदने और बेचने पर असल में क्या होता है
मान लीजिए आपने मंगलवार को किसी कंपनी के 10 शेयर खरीदे। ऑर्डर पूरा होते ही ऐप में सौदा दिख जाता है, पर शेयर अभी demat खाते में नहीं हैं। बुधवार को कई ऐप इन्हें holdings (आपके शेयरों की सूची) में T1 के निशान के साथ दिखाते हैं, यानी settlement बाकी है।
बुधवार settlement का दिन है। पहले शेयर clearing corporation (खरीदार और बेचने वाले के बीच लेन-देन पूरा कराने वाली संस्था) से ब्रोकर के खाते में जाते थे, और वहां से आपके demat में। SEBI ने 11 नवंबर 2024 से इसे बदल दिया: अब clearing corporation आम तौर पर शेयर सीधे खरीदार के demat खाते में डालती है, settlement वाले दिन की तय समय-सारणी के मुताबिक दोपहर बाद 3:30 बजे तक। शेयर पहुंचने पर T1 का निशान हट जाता है।
पैसे का हिसाब ऐसा है। सौदे से पहले margin (जोखिम के हिसाब से पहले ही रोका जाने वाला पैसा) का एक तय हिस्सा खाते में होना जरूरी है, जिसे upfront margin कहते हैं। खरीद की पूरी रकम settlement वाले दिन तक जमा हो जानी चाहिए; SEBI ने 28 अप्रैल 2025 के सर्कुलर में बाकी margin भी उसी दिन तक वसूलना ब्रोकरों के लिए तय किया।
बेचने पर उल्टा होता है। 7 अक्टूबर 2024 से, demat में पड़े शेयर बेचने पर मिली पूरी रकम उसी दिन दूसरी खरीद में लगाई जा सकती है; उससे पहले उसी दिन सिर्फ 80% मिलती थी और बाकी 20% अगले दिन। पर निकालने लायक पैसा settlement पूरा होने के बाद ही बनता है, और उसे बैंक खाते तक भेजने में ब्रोकर की अपनी प्रक्रिया का समय अलग लगता है।
कैलेंडर से समझिए: शुक्रवार, छुट्टी और दिवाली
शुक्रवार की खरीद: शनिवार-रविवार को settlement नहीं होता। मान लीजिए आपने शुक्रवार 18 सितंबर 2026 को शेयर खरीदे, तो वे सोमवार 21 सितंबर को demat में आएंगे।
छुट्टी से पहले की खरीद: NSE की 2026 की सूची में शुक्रवार 2 अक्टूबर (महात्मा गांधी जयंती) की छुट्टी है। मान लीजिए आपने गुरुवार 1 अक्टूबर को शेयर खरीदे, तो वे सोमवार 5 अक्टूबर को settle होंगे। कैलेंडर पर चार दिन आगे, पर गिनती में एक ही कारोबारी दिन।
दिवाली का हफ्ता: रविवार 8 नवंबर को दिवाली-लक्ष्मी पूजन की छुट्टी है, पर NSE ने बताया है कि उस दिन Muhurat Trading (दिवाली पर होने वाला खास छोटा सत्र) होगा; उसका समय बाद में सर्कुलर से बताया जाएगा। मंगलवार 10 नवंबर (दिवाली-बलिप्रतिपदा) को पूरी छुट्टी है। तो मान लीजिए आपने सोमवार 9 नवंबर को शेयर बेचे — पैसा मंगलवार नहीं, बुधवार 11 नवंबर को settle होगा।
यही हिसाब 20 अक्टूबर (दशहरा), 24 नवंबर (गुरु नानक जयंती) और 25 दिसंबर (क्रिसमस) के आसपास भी लगाना होगा। सूची बीच में बदल भी सकती है: 15 जनवरी 2026 को पहले सिर्फ settlement holiday रखा गया था और बाजार खुला रहना था, पर NSE ने 12 जनवरी की सूचना से इसे महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों की वजह से पूरी छुट्टी कर दिया।
बाजार खुला, फिर भी settlement बंद
Trading holiday, यानी बाजार की छुट्टी पर न सौदा होता है, न settlement। पर settlement holiday पर बाजार खुला रहता है — खरीद-बिक्री चलती है, सिर्फ शेयर और पैसे का लेन-देन उस दिन नहीं होता और अगले settlement दिन पर खिसक जाता है।
NSE Clearing के 2026 के कैलेंडर में ऐसे चार दिन हैं: 19 फरवरी (छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती), 19 मार्च (गुड़ी पड़वा), 1 अप्रैल (बैंकों की सालाना क्लोजिंग) और 26 अगस्त (ईद-ए-मिलाद)। साल के बाकी settlement holidays बाजार की छुट्टियों वाले दिन ही हैं।
असर समझिए। बुधवार 26 अगस्त को settlement बंद था, इसलिए मंगलवार 25 अगस्त के सौदे — जो आम तौर पर बुधवार को settle होते — और बुधवार के सौदे, दोनों गुरुवार 27 अगस्त को settle हुए। यानी उस हफ्ते शेयर और पैसा एक दिन देर से मिला।
T1 holdings, short delivery और T+0
कई ब्रोकर T1 वाले शेयर settlement से पहले ही बेचने देते हैं। इसे BTST (Buy Today Sell Tomorrow, यानी आज खरीदो कल बेचो) कहते हैं। इसमें पैसे और margin का हिसाब आम holdings बेचने जैसा नहीं होता, क्योंकि शेयर अभी आपके demat में आए ही नहीं हैं। हर ब्रोकर के नियम इसमें अलग हैं, इसलिए अपने ब्रोकर से पूछ लीजिए।
एक जोखिम यह भी है कि जिसने आपको शेयर बेचे, वह तय दिन पर डिलीवरी न दे पाए। इसे short delivery (कम डिलीवरी) कहते हैं। ऐसे शेयरों के लिए NSE Clearing उसी settlement वाले दिन auction (नीलामी) कराता है, और उस auction का settlement अगले दिन, यानी T+2 पर होता है। शेयर मिल जाएं तो खरीदार को एक दिन देर से मिलते हैं।
auction में भी शेयर न मिलें तो खरीदार को शेयर की जगह नकद मिलता है, नियम से तय close-out भाव पर — सौदे के दिन से auction के दिन तक का सबसे ऊंचा भाव, या auction वाले दिन के बंद भाव से 20% ऊपर, इन दोनों में जो ज्यादा हो। इसका बोझ डिलीवरी न देने वाले पर पड़ता है। पर जिसने बीच में BTST करके वही शेयर आगे बेच दिए हों, उसके पास देने को शेयर नहीं होते और उसकी अपनी बिक्री short delivery बन जाती है।
T+0, यानी उसी दिन settlement भी मौजूद है, पर वैकल्पिक। SEBI ने इसे मार्केट कैप के हिसाब से ऊपर के 500 शेयरों में 31 जनवरी 2025 से चरणों में खोला, और यह दोपहर 1:30 बजे तक चलने वाले अलग सत्र के सौदों पर लागू होता है। ब्रोकर यह सुविधा दे, तभी मिलती है; बड़े ब्रोकरों (Qualified Stock Brokers) के लिए इसे देना जरूरी करने की तारीख पहले 1 नवंबर 2025 थी, जिसे SEBI ने अक्टूबर 2025 के आखिर में फिर आगे बढ़ा दिया और नई तारीख अभी बताई नहीं गई है। आप खुद T+0 न चुनें, तो सौदा T+1 में ही settle होता है।
सबसे बड़ी गलतफहमी
सबसे आम गलतफहमी है T+1 को कल या 24 घंटे मान लेना। यह गलत है। +1 का मतलब अगला settlement वाला कारोबारी दिन है, इसलिए छुट्टियों के आसपास तीन-चार कैलेंडर दिन भी लग सकते हैं।
दूसरी गलतफहमी: ऐप में दिख गया, तो शेयर demat में आ गया; या बेचते ही पैसा बैंक भेज सकता हूं। दोनों गलत हैं। ऐप में दिखना सौदे का रिकॉर्ड है। demat में शेयर और निकालने लायक पैसा settlement के बाद ही बनते हैं। किसी तय तारीख पर पैसा चाहिए, तो बीच की छुट्टियां पहले से गिन लीजिए।
तीसरी: डिविडेंड के लिए record date के दिन खरीद लेना काफी है। यह भी गलत है। T+1 के बाद ex-date और record date आम तौर पर एक ही दिन होती हैं, इसलिए हक उसी को मिलता है जिसने उससे पहले वाले कारोबारी दिन तक शेयर खरीद लिया हो।
Tejii पर इससे जुड़ी चीजें
Tejii के आंकड़े NSE की end-of-day bhavcopy से बनते हैं — वह फाइल जो NSE रोज बाजार बंद होने के बाद जारी करता है। छुट्टी पर यह फाइल नहीं आती, इसलिए पेज पिछले कारोबारी दिन के आंकड़े दिखाते हैं, और होम पेज पर आखिरी कारोबारी दिन की तारीख लिखी रहती है।
2026 में अब तक हफ्ते के जिन दिनों यह फाइल नहीं आई, वे हैं: 15 और 26 जनवरी, 3, 26 और 31 मार्च, 3 और 14 अप्रैल, 1 और 28 मई, 26 जून, और 14 सितंबर। ये सब NSE की trading holidays की सूची वाले दिन हैं।
पर 19 फरवरी, 19 मार्च, 1 अप्रैल और 26 अगस्त को बाजार खुला था, इसलिए Tejii पर वे आम दिन जैसे ही दिखे। यानी Tejii से न settlement holiday पहचाना जा सकता है, न आपके सौदे की T1 स्थिति — उसके लिए ब्रोकर का ऐप और NSE Clearing का holiday कैलेंडर देखिए।