पहली बार शेयर कैसे खरीदें — पहला ऑर्डर कदम-दर-कदम, नए नियम और हर चार्ज
खाता खुलने के बाद पहला ऑर्डर कैसे लगता है: Delivery या Intraday, limit या market, सुबह 9:05 का नया नियम, T+1 और ₹1,000 के सौदे पर हर चार्ज।
एक लाइन में
पहली बार शेयर खरीदने के लिए चार काम करने होते हैं: ट्रेडिंग और डीमैट खाता चालू होने के बाद खाते में पैसा डालना, शेयर का सही नाम ढूंढना, product में Delivery या Intraday में से एक चुनना, और limit या market में से एक तरह का ऑर्डर लगाना। सौदा हो जाने पर शेयर आमतौर पर अगले कारोबारी दिन (T+1) सीधे आपके डीमैट खाते में आ जाते हैं, और शेयर अपने पास रखने के लिए Delivery वाला product लगाया जाता है।
यह लेख सिर्फ ऑर्डर लगाने का तरीका समझाता है, यह नहीं कि कौन सा शेयर खरीदें। खाता खोलते समय एक नया नियम भी सामने आएगा: SEBI के 29 मई 2026 के सर्कुलर के मुताबिक, 1 सितंबर 2026 से खुलने वाले अकेले नाम (single holder) वाले नए डीमैट खाते में तीन तक nominee देने होते हैं, या लिखकर opt-out (मना) करना होता है। तीसरा रास्ता नहीं है।
nominee वह व्यक्ति है जिसका नाम आप इसलिए दर्ज कराते हैं कि आपके बाद आपके शेयर उस तक पहुंच सकें; nominee होना और कानूनी वारिस होना एक ही बात नहीं है। एक अफवाह भी साफ कर लीजिए: यह शर्त नए, अकेले नाम वाले खातों पर है। पुराने खातों को फ्रीज करने का इसमें कोई प्रावधान नहीं है — जिन्होंने nominee न दिया हो, उन्हें साल में दो बार याद दिलाया जाता है।
पहला ऑर्डर, कदम-दर-कदम
पहला कदम, पैसा डालना। पैसा अपने उसी बैंक खाते से भेजिए जो ट्रेडिंग खाते से जुड़ा है, क्योंकि किसी और के खाते से आया पैसा ब्रोकर ले नहीं सकता। नकद में लेन-देन की छूट नहीं है, इसलिए नकद मांगने वाले किसी को पैसा मत दीजिए।
दूसरा कदम, शेयर ढूंढना। कंपनी का पूरा नाम ध्यान से मिलाइए, मिलते-जुलते नाम आम हैं। NSE पर हर शेयर के साथ उसकी series (श्रेणी) लिखी होती है, ज्यादातर शेयरों में EQ। BE दिखे, तो वह शेयर trade-for-trade (हर सौदे की डिलीवरी लेने वाली) व्यवस्था में है: उसमें Intraday नहीं चलता, यानी जिस दिन खरीदा उसी दिन बेचने का रास्ता नहीं — शेयर डीमैट में आने के बाद ही बिकेंगे।
तीसरा कदम, product (सौदे की किस्म) चुनना। Delivery (कई ऐप में CNC) का मतलब है शेयर आपके डीमैट में आएंगे और तब तक वहीं रहेंगे जब तक आप न बेचें। Intraday (अक्सर MIS) उसी दिन का सौदा है: आप न बेचें तो ब्रोकर दिन खत्म होने से पहले खुद बेच देता है (auto square-off, यानी सौदा अपने आप बंद कर देना)। यानी गलती से Intraday चुन लिया, तो लंबे समय के लिए खरीदे शेयर उसी दिन बिक जाएंगे। SEBI की जुलाई 2024 की स्टडी के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में equity cash (शेयरों के नकद बाजार) में intraday करने वाले व्यक्तिगत ट्रेडरों में से लगभग 71% को नुकसान हुआ।
चौथा कदम, ऑर्डर भरकर भेजना। कितने शेयर, किस भाव पर, Delivery या Intraday — यह सब एक बार पढ़ लीजिए, फिर भेजिए। नकद बाजार में कोई तय lot नहीं होता, मुख्य बोर्ड के शेयरों में एक शेयर भी खरीदा जा सकता है। limit और market में से कौन सा ऑर्डर चुनें, यह अगले हिस्से में। भेजने के बाद order book (ऑर्डर की सूची) देखिए: open का मतलब है सौदा अभी हुआ नहीं, executed या complete यानी हो गया, और rejected के साथ वजह भी लिखी होती है।
Limit या market ऑर्डर, और सुबह 9:05 का नया नियम
Market order का मतलब है: अभी जो सबसे अच्छा भाव मिल रहा है, उसी पर सौदा कर दो। स्क्रीन पर दिखा भाव आखिरी हुए सौदे का भाव है, आपको मिलने वाला भाव नहीं। कम खरीद-बिक्री वाले शेयर में market order दिखे भाव से काफी ऊपर भी भर सकता है।
Limit order में आप खुद लिखते हैं कि ज्यादा से ज्यादा कितना देंगे। मान लीजिए खरीदने के लिए आपने ₹100 की limit लगाई, तो सौदा ₹100 या उससे कम पर ही होगा। भाव वहां न आए तो ऑर्डर खुला पड़ा रहता है। भाव तय कदमों में लिखना होता है, जिसे tick size कहते हैं: NSE के नकद बाजार में 15 अप्रैल 2025 से यह कदम भाव के साथ बढ़ता है: ₹250 से कम पर 1 पैसा, ₹250 से ₹1,000 तक 5 पैसे, ₹1,000 से ऊपर ₹5,000 तक 10 पैसे, ₹5,000 से ऊपर ₹10,000 तक 50 पैसे, ₹10,000 से ऊपर ₹20,000 तक ₹1, और ₹20,000 से ऊपर ₹5। कौन सा शेयर किस खाने में है, यह हर महीने के आखिरी कारोबारी दिन के बंद भाव से तय होता है। ETF पर ये खाने लागू नहीं होते।
7 सितंबर 2026 से NSE और BSE पर pre-open session (सुबह 9:00 से 9:15, जिसमें नीलामी से दिन का शुरुआती भाव तय होता है) के नियम बदल गए हैं। 9:00 से 9:05 तक market और limit, दोनों तरह के ऑर्डर लगाए, बदले और रद्द किए जा सकते हैं। 9:05 से 9:10 तक सिर्फ limit ऑर्डर चलते हैं, और ऑर्डर लेना 9:08 से 9:10 के बीच किसी भी पल अचानक बंद हो जाता है। 9:10 से 9:12 तक ऑर्डरों का मिलान होता है, और 9:12 से 9:15 तक बफर, यानी खाली समय, जिसमें सौदे आम कारोबार में जाने की तैयारी होती है। आम कारोबार 9:15 से शुरू होता है।
इसके दो मतलब हैं। 9:05 के बाद भेजा market order एक्सचेंज ठुकरा देगा। और 9:05 से पहले भेजा market order उसके बाद न बदला जा सकता है, न रद्द; वह नीलामी में तय शुरुआती भाव पर भरता है, और जो हिस्सा नहीं भरा, वह उसी भाव का limit order बनकर आम कारोबार में चला जाता है। यह शुरुआती भाव पिछले दिन के बंद भाव से काफी अलग हो सकता है। दिन के आखिर में भी बदलाव हुआ है: 3 अगस्त 2026 से F&O (वायदा-विकल्प) वाले शेयरों का सामान्य कारोबार 3:15 पर रुक जाता है और उसके बाद closing auction (बंद भाव तय करने वाली नीलामी) होती है, जबकि बाकी शेयरों में कारोबार 3:30 तक चलता है। pre-open का बदलाव SEBI ने इसी नए ढांचे से मेल कराने के लिए कहा था।
खरीदने के बाद: T+1 पर शेयर कहां दिखते हैं
जिस दिन सौदा हुआ उसे T कहते हैं। शेयर और पैसे का असली लेन-देन, जिसे settlement कहते हैं, T+1 यानी अगले कारोबारी दिन होता है। शनिवार, रविवार और बाजार की छुट्टियां इसमें नहीं गिनी जातीं।
11 नवंबर 2024 से SEBI के नियम के तहत खरीदे गए शेयर clearing corporation (सौदे निपटाने वाली संस्था) से सीधे आपके डीमैट खाते में आते हैं। कई ऐप सौदे वाले दिन ही शेयर holdings यानी आपके शेयरों की सूची में दिखा देते हैं, कभी T1 जैसे निशान के साथ, पर डीमैट में वे settlement के दिन पहुंचते हैं। ब्रोकर को सौदे के 24 घंटे के भीतर contract note (सौदे की पक्की रसीद) भेजना होता है, जिसमें भाव, मात्रा और हर चार्ज लिखा होता है।
SEBI की वैकल्पिक T+0 (उसी दिन settlement) व्यवस्था भी है, पर वह मार्केट कैप के हिसाब से चुने हुए 500 शेयरों तक सीमित है। यह अनिवार्य नहीं है: ब्रोकर यह सुविधा दे, तभी आप इसे चुन सकते हैं, वरना आपका सौदा T+1 में ही निपटेगा।
₹1,000 के सौदे पर हर चार्ज का हिसाब
मान लीजिए आपने NSE पर ₹100 के भाव से 10 शेयर Delivery में खरीदे, और आपका ब्रोकर Delivery पर ब्रोकरेज नहीं लेता। STT (Securities Transaction Tax, सौदे पर लगने वाला सरकारी टैक्स) Delivery की खरीद पर 0.1%, यानी ₹1। 1 अप्रैल 2026 से F&O का STT बढ़ा है, Delivery का नहीं। स्टांप ड्यूटी सिर्फ खरीद पर 0.015%, यानी 15 पैसे। NSE का ट्रांजैक्शन चार्ज, निवेशक सुरक्षा फंड के हिस्से समेत, ₹3.07 प्रति लाख है (1 मार्च 2026 से ₹306.99 और ₹0.01 प्रति करोड़), यानी करीब 3 पैसे। SEBI turnover fee ₹10 प्रति करोड़, यानी एक पैसे का दसवां हिस्सा। ट्रांजैक्शन चार्ज, SEBI fee और ब्रोकरेज पर 18% GST लगता है, जो यहां एक पैसे से भी कम है। खरीद पर कुल करीब ₹1.19।
अब मान लीजिए कुछ दिन बाद आपने ये शेयर उसी ₹100 पर बेच दिए। STT फिर ₹1, बाकी छोटे चार्ज करीब 4 पैसे, स्टांप ड्यूटी नहीं। पर बेचने पर DP charge लगता है, यानी डीमैट से शेयर निकलने का शुल्क। यह depository (NSDL या CDSL, जहां आपके शेयर जमा रहते हैं) और ब्रोकर का हिस्सा मिलाकर बनता है, इस पर भी 18% GST लगता है, और ब्रोकर के हिसाब से यह बदलता है। मान लीजिए GST समेत यह ₹15 है। बिक्री पर कुल करीब ₹16.04।
यानी उसी भाव पर खरीदकर बेचने में करीब ₹17.23 गए, जो ₹1,000 का लगभग 1.7% है। सिर्फ बराबरी पर आने के लिए ही भाव को करीब ₹1.72 प्रति शेयर चढ़ना होगा। यही सौदा ₹10,000 का होता, तो कुल खर्च करीब ₹37 यानी 0.37% के आसपास बनता, क्योंकि DP charge रकम के साथ नहीं बढ़ता। मुनाफे पर लगने वाला टैक्स इससे अलग है।
सबसे बड़ी गलतफहमी: "जीरो ब्रोकरेज है, तो सौदा मुफ्त है"
यह गलत है। जीरो ब्रोकरेज का मतलब सिर्फ इतना है कि ब्रोकर अपनी फीस नहीं ले रहा। STT, स्टांप ड्यूटी और GST सरकार के खाते में जाती हैं, ट्रांजैक्शन चार्ज एक्सचेंज का है, turnover fee SEBI की, और DP charge depository और ब्रोकर का। ऊपर के उदाहरण में ब्रोकरेज शून्य था, फिर भी करीब ₹17 गए।
DP charge सबसे ज्यादा चौंकाता है। यह हर शेयर पर नहीं, बल्कि हर कंपनी के शेयर पर एक तय रकम है, जिस दिन भी आप उसे बेचें — चाहे उस कंपनी का 1 शेयर बेचें या 100, और चाहे उसी दिन दो बार बेचें, रकम एक बार ही लगती है। मान लीजिए ₹100 का सिर्फ 1 शेयर बेचा और DP charge ₹15 है, तो बिक्री की रकम का 15% यहीं चला गया। इसी वजह से छोटी-छोटी रकम के कई सौदों में खर्च का हिस्सा बड़ा हो जाता है, और उसी दिन पांच अलग कंपनियों के शेयर बेचें तो DP charge पांच बार लगता है।
Tejii पर इससे जुड़ी चीजें
Tejii ऑर्डर नहीं लगाता और यह नहीं बताता कि कौन सा शेयर खरीदें। Nifty 500 के हर शेयर के पन्ने पर पिछला बंद भाव, 52 हफ्ते की ऊंची-नीची रेंज, RSI और मूविंग एवरेज (पिछले कुछ दिनों का औसत भाव) सादी हिंदी में समझाए मिलते हैं। ये सारे आंकड़े पिछले बंद भाव से बनते हैं, यानी दिन के भीतर का लाइव भाव नहीं हैं।
Practice पन्ने के नुकसान कैलकुलेटर में सोची हुई रकम डालिए, तो दिखता है कि 10%, 20% या 2020 जैसी 38% गिरावट में वह रकम कितनी रह जाएगी।