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कितना पैसा लगाना चाहिए?

इसका कोई एक जवाब नहीं है, और Tejii यह नहीं बताता कि आप कितना लगाएं। लोग आम तौर पर दो बातें देखते हैं: गिरावट में रकम कितनी घट सकती है, और वह पैसा कब चाहिए।

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लोग रकम कैसे तय करते हैं

कई लोग रकम ऐसे तय करते हैं: बचत का उतना हिस्सा, जिसका आधा भी डूब जाए तो जिंदगी न बदले।

मान लें ₹1 लाख लगाया और वह घटकर ₹60,000 रह गया — क्या तब आप चैन से सो पाएंगे? जिनका जवाब "नहीं" होता है, वे आम तौर पर कम रकम रखते हैं।

शुरुआत छोटी रकम से भी हो सकती है

बहुत लोग सोचते हैं कि लाखों चाहिए। ऐसा बिल्कुल नहीं है।

AMFI (म्यूचुअल फंड कंपनियों का संगठन) की साइट के मुताबिक SIP, यानी हर महीने की तय किस्त, ₹500 जितनी छोटी हो सकती है (8 अक्टूबर 2026 को देखा)।

छोटी रकम पर गिरावट का नुकसान भी छोटा होता है। कुछ लोग रकम तभी बढ़ाते हैं जब गिरावट में भी शांत रह पाए हों।

उम्र का एक मोटा हिसाब

एक पुराना नियम चलन में है: 100 में से उम्र घटाने पर जो बचे, उतना प्रतिशत पैसा शेयरों में।

इस नियम से 30 साल की उम्र में 70% और 60 साल की उम्र में 40% बनता है; बाकी FD या PPF जैसी जगहों में।

यह पक्का नियम नहीं है, सिर्फ एक मोटा अंदाजा है। इसके पीछे की सोच: उम्र बढ़ने पर नुकसान भरने के लिए समय कम बचता है।

कर्ज, टिप और किराये का पैसा

SEBI की निवेशक साइट की 'क्या न करें' सूची में ये दो बातें हैं: निवेश के लिए उधार लेना, और टिप के भरोसे फैसला करना। तीसरी हिसाब की है: किराये या फीस का पैसा तय तारीख पर चाहिए, बाजार तारीख नहीं देखता।

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