SIP क्या है और ₹500 से कैसे शुरू करें?
हर महीने एक तय रकम अपने आप म्यूचुअल फंड में लगती है। AMFI (फंड कंपनियों का संगठन) के मुताबिक यह ₹500 जितनी छोटी भी हो सकती है।
मतलब
SIP का मतलब है हर महीने एक तय रकम अपने आप निवेश हो जाना — जैसे बिजली का बिल कट जाता है।
आपको हर महीने सोचना नहीं पड़ता, और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
यह काम क्यों करता है
बाजार ऊपर-नीचे होता रहता है। कोई नहीं जानता कि आज खरीदना सही है या नहीं — बड़े-बड़े लोग भी नहीं।
SIP में जब भाव ऊंचा होता है तो आपको कम यूनिट मिलती हैं, और जब भाव गिरता है तो ज्यादा। सालों में एक ठीक-ठाक औसत बन जाता है।
यानी आपको सही समय का अंदाजा लगाना ही नहीं पड़ता।
कंपाउंडिंग का असर
मान लें कि हर महीने ₹1,000 लगते हैं और जमा रकम हर महीने 1% बढ़ती है (साल में करीब 12.7%)। यह सिर्फ हिसाब है, वादा या अंदाजा नहीं: 20 साल में करीब ₹10 लाख, जबकि लगाए कुल ₹2.4 लाख।
बाकी सब कंपाउंडिंग है — मुनाफे पर मुनाफा। और इसके लिए सिर्फ एक चीज चाहिए: समय।
यह गारंटी नहीं है। असली नतीजा कम भी हो सकता है और ज्यादा भी — लगाई रकम से नीचे भी।
गिरावट में SIP
बाजार गिरने पर SIP की वही रकम ज्यादा यूनिट खरीदती है। पर फंड कंपनियों के संगठन AMFI के मुताबिक इससे न मुनाफा पक्का होता है, न गिरते बाजार में नुकसान से बचाव।
कई लोग गिरावट में SIP रोक देते हैं और तेजी में फिर शुरू करते हैं; तब सस्ती यूनिट कम जुड़ती हैं, महंगी ज्यादा। Tejii यह नहीं बताता कि SIP शुरू करें, चालू रखें या रोकें।