ईटीएफ (ETF) क्या है — index fund और शेयर से फर्क, और इसका भाव NAV से अलग क्यों हो जाता है
ईटीएफ (ETF) क्या है: एक्सचेंज पर शेयर की तरह बिकने वाला म्यूचुअल फंड। index fund से फर्क, iNAV, tracking error, खर्च, gold ETF और 2026-27 का टैक्स।
एक लाइन में
ETF (Exchange Traded Fund, यानी एक्सचेंज पर खरीदा-बेचा जाने वाला फंड) SEBI के नियमों में ऐसी म्यूचुअल फंड स्कीम है, जो किसी इंडेक्स (कई शेयरों के भाव से बना पैमाना) के शेयर उसी अनुपात में रखती है और जिसकी यूनिट NSE या BSE पर शेयर की तरह खरीदी-बेची जाती हैं। कुछ ETF शेयरों की जगह सोना, चांदी या bonds (कर्ज के कागज) रखते हैं।
अंदर से यह फंड है, बाहर से शेयर जैसा। इसे खरीदने के लिए ब्रोकर और demat खाता चाहिए, और सौदा उस पल के बाजार भाव पर होता है। AMFI (म्यूचुअल फंड कंपनियों का संगठन) के मुताबिक 31 अगस्त 2026 को देश में 357 ETF थे, जिनमें करीब ₹11.97 लाख करोड़ लगे थे।
Tejii यह नहीं बताता कि ETF खरीदें या नहीं, या कौन सा लें। यह लेख सिर्फ समझाता है कि ETF काम कैसे करता है।
शेयर और index fund से फर्क
शेयर किसी एक कंपनी का हिस्सा है; ETF की एक यूनिट पूरी टोकरी का छोटा हिस्सा। खरीदने का तरीका शेयर वाला ही है: NSE पर ETF की यूनिट उसी EQ series (आम शेयरों वाली श्रेणी) में चलती हैं, एक यूनिट भी खरीदी जा सकती है, और सौदा T+1 पर, यानी अगले कारोबारी दिन, पूरा होता है।
index fund भी उसी इंडेक्स की नकल करता है, पर उसकी यूनिट सीधे फंड कंपनी (AMC) से मिलती हैं, दिन के आखिर की NAV (एक यूनिट की कीमत) पर, और demat जरूरी नहीं। ETF की यूनिट आप बाजार में किसी दूसरे निवेशक या market maker (AMC के रखे ब्रोकर, जो लगातार खरीद-बिक्री के भाव देते हैं) से, बाजार भाव पर लेते हैं।
AMC से सीधे ETF की यूनिट लेना-देना छोटे निवेशक के लिए आम दिनों में बंद है: SEBI के 20 मार्च 2026 के Master Circular के मुताबिक यह सिर्फ ₹25 करोड़ से बड़े सौदों में होता है। market maker पर यह सीमा नहीं है।
इसीलिए AMC वाला SIP, जिसमें हर महीने तय रकम की यूनिट NAV पर मिलती हैं, ETF में नहीं होता। ब्रोकर के ऐप में तय तारीख पर खरीद की सुविधा हो, तो वह ब्रोकर की अपनी है और सौदा बाजार भाव पर होता है।
NAV, iNAV और बाजार भाव: तीन अलग नंबर
NAV दिन में एक बार, बाजार बंद होने के बाद निकलती है: फंड के पास जो कुछ है उसकी कीमत, भाग कुल यूनिट। iNAV (दिन के बीच की अनुमानित NAV) यही हिसाब बाजार के घंटों में ताजा भावों से करती है; SEBI के नियम में शेयरों वाले ETF की iNAV एक्सचेंज पर 15 सेकंड से ज्यादा पुरानी नहीं होनी चाहिए।
तीसरा नंबर बाजार भाव है, जिस पर सौदे हो रहे हैं। यह iNAV से ऊपर हो तो ETF premium पर है, नीचे हो तो discount पर। NSE की वेबसाइट के ETF वाले पन्ने पर i-NAV और NAV, दोनों के कॉलम हैं।
भाव को iNAV के पास रखने का काम market maker करते हैं; SEBI के नियम में हर ETF के लिए कम से कम दो होने चाहिए। भाव ज्यादा चढ़े तो वे AMC से नई यूनिट बनवाकर बेचते हैं, ज्यादा गिरे तो बाजार से खरीदकर AMC को लौटाते हैं। फिर भी भारी मांग या कम कारोबार में फर्क बना रह सकता है।
ETF के भाव की एक दिन की हद (price band) 7 सितंबर 2026 से बदली है (SEBI के 15 जून और 28 अगस्त 2026 के सर्कुलर)। पहले यह दो दिन पुरानी NAV से 20% गिनी जाती थी; अब पिछले दिन के बंद भाव से।
शेयरों वाले ETF में दिन 10% की हद से शुरू होता है। भाव हद तक पहुंचे, तो आम तौर पर 15 मिनट बाद हद 5% खिसकती है, 20% तक; इस बीच सौदे पुरानी हद के अंदर चलते रहते हैं। gold और silver ETF में शुरुआत 6% से होती है और हद 3-3% करके खिसकती है।
एक काल्पनिक उदाहरण: market order कितना महंगा पड़ सकता है
मान लीजिए एक काल्पनिक ETF की iNAV ₹200 है। बेचने वालों की लाइन में सबसे सस्ते ऑर्डर हैं: 100 यूनिट ₹200.20 पर, फिर 400 यूनिट ₹201 पर। आप 500 यूनिट का market order (जो भाव मिले, उसी पर सौदा) भेजते हैं।
पहली 100 यूनिट ₹200.20 पर मिलेंगी, बाकी 400 ₹201 पर। कुल ₹1,00,420 लगे, जबकि iNAV के हिसाब से ये यूनिट ₹1,00,000 की थीं। ₹420, यानी करीब 0.42%, इसलिए ज्यादा गए कि उस पल सस्ते भाव पर बेचने वाले कम थे। बड़े ऑर्डर से भाव खिसकने के इस खर्च को impact cost कहते हैं; NSE इसे सबसे अच्छे खरीद और बिक्री भाव के बीच वाले भाव से नापता है।
मान लीजिए इस ETF का expense ratio (फंड का सालाना खर्च) 0.10% है, यानी ₹1 लाख पर साल के करीब ₹100। एक ही ऑर्डर में चार साल से ज्यादा के खर्च जितनी रकम निकल गई। ₹200.20 के limit order (अपना भाव लिखकर दिया ऑर्डर) में 100 यूनिट मिलतीं और बाकी ऑर्डर इंतजार करता।
सालाना खर्च और tracking error
ETF का सालाना खर्च (expense ratio) अलग से नहीं मांगा जाता; रोज थोड़ा-थोड़ा NAV में से घटता है। किसी ETF का कुल खर्च (TER) SEBI के नियम से AMC और AMFI की वेबसाइट पर रोज छपता है।
1 अप्रैल 2026 से लागू SEBI (Mutual Funds) Regulations, 2026 में index fund और ETF के base expense ratio (फंड चलाने का अपना खर्च) की ऊपरी सीमा 0.90% है। फंड के अपने सौदों की ब्रोकरेज, एक्सचेंज के शुल्क और GST जैसे सरकारी टैक्स इसके ऊपर लगते हैं।
tracking error बताता है कि ETF की NAV की रोज की चाल इंडेक्स की चाल से कितनी भटकती है। SEBI के Master Circular में यह पिछले एक साल के आंकड़ों से निकलता है, AMC और AMFI की वेबसाइट पर रोज छपता है, और bonds वाले ETF और index fund को छोड़कर बाकी में 2% से ऊपर नहीं जाना चाहिए।
दूसरा नंबर tracking difference है: इंडेक्स और ETF के रिटर्न का सीधा फर्क, जो हर महीने छपता है। दोनों नंबर NAV पर गिने जाते हैं; आपने बाजार में किस भाव पर खरीदा और बेचा, वह फर्क इनमें नहीं दिखता।
Gold और Silver ETF
gold ETF शेयरों की जगह सोना रखता है। SEBI के नियम में ऐसी स्कीम को अपने कुल पैसे का कम से कम 95% सोने और उससे जुड़े साधनों में रखना होता है, और सोना 99.5% शुद्धता की मानक छड़ों में। silver ETF में चांदी 99.9% शुद्धता की होती है।
सोना-चांदी सच में रखा है या नहीं, इसकी जांच स्कीम के auditor हर छह महीने करते हैं। 1 अप्रैल 2026 से इसकी कीमत देश के एक्सचेंजों के छापे हाजिर भाव (spot price) से लगाई जाती है; पहले लंदन के LBMA भाव से लगती थी (SEBI का 26 फरवरी 2026 का सर्कुलर)।
एक्सचेंज पर यूनिट बेचने पर रुपये मिलते हैं, सोना नहीं। 7 सितंबर 2026 से इन ETF में सुबह 9:00 से 9:15 का pre-open session भी होता है, जिसमें नीलामी से शुरुआती भाव तय होता है।
AMFI के मुताबिक 31 अगस्त 2026 को 26 gold ETF में करीब ₹1.91 लाख करोड़ और 19 silver ETF में ₹85,488 करोड़ लगे थे। सोने-चांदी का भाव दोनों तरफ चलता है, इसलिए नुकसान यहां भी हो सकता है। Tejii यह नहीं बताता कि सोना या चांदी अभी लें या नहीं।
2026-27 में ETF की यूनिट पर टैक्स
टैक्स ETF के अंदर की चीज से तय होता है। जिस ETF का कम से कम 65% पैसा भारत में लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में हो, वह कानून में equity oriented fund है और उस पर शेयरों वाली दरें लगती हैं: 12 महीने के अंदर बेचा तो मुनाफे पर 20%, उसके बाद साल के ₹1.25 लाख से ऊपर के मुनाफे पर 12.5% (Income-tax Act, 2025 की धारा 196 और 198)।
gold और silver ETF equity oriented fund नहीं हैं, पर इनकी यूनिट लिस्टेड हैं, इसलिए लकीर यहां भी 12 महीने की है। उसके बाद बेचने पर मुनाफे पर 12.5% (धारा 197), बिना ₹1.25 लाख की छूट के। 12 महीने के अंदर बेचा, तो मुनाफा बाकी आमदनी में जुड़ता है और slab (आमदनी के हिसाब से टैक्स की सीढ़ी) की दर लगती है।
debt ETF, यानी जिनका 65% से ज्यादा पैसा bonds और money market में है, अलग खाने में हैं: 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदी यूनिट का मुनाफा, चाहे जितने साल रखी हों, short-term माना जाता है और slab दर से टैक्स लगता है (धारा 76)।
STT (Securities Transaction Tax, सौदे पर लगने वाला टैक्स) भी अलग है: equity वाले ETF की यूनिट delivery वाले सौदे में बेचने पर 0.001%, खरीदने पर कुछ नहीं, जबकि शेयर में दोनों तरफ 0.1%। यह आम जानकारी है, टैक्स की सलाह नहीं; अपने मामले में CA से पूछिए।
सबसे बड़ी गलतफहमी: स्क्रीन पर दिख रहा भाव ही ETF की असली कीमत है
यह गलत है। बाजार भाव वह है जिस पर उस पल खरीदार और बेचने वाला राजी हुए; यूनिट के पीछे रखी चीजों की कीमत iNAV बताती है। मान लीजिए iNAV ₹100 है और भाव ₹103: खरीदने वाला ₹100 की चीज के ₹103 दे रहा है। भाव बाद में iNAV पर लौट आए, तो इंडेक्स के जस के तस रहने पर भी उसकी यूनिट का भाव घट जाता है।
दूसरी गलतफहमी: ETF जब चाहो बिक जाता है। हर ETF में कारोबार बराबर नहीं होता। SEBI के नियम में, बंद भाव लगातार 7 कारोबारी दिन NAV से 1% से ज्यादा नीचे रहे, या लगातार 3 कारोबारी दिन कोई भाव ही न आए, तो ₹25 करोड़ तक की यूनिट बिना exit load (निकलने का शुल्क) के सीधे AMC को लौटाई जा सकती हैं।
तीसरी: ETF में जोखिम नहीं होता। इंडेक्स गिरे, तो ETF की NAV भी लगभग उतनी ही गिरती है। Tejii यह नहीं बताता कि ETF लें या index fund, या कौन सा लें। किसी एक व्यक्ति के लिए ऐसी सलाह देना SEBI में registered निवेश सलाहकार का काम है।
Tejii पर इससे जुड़ी चीजें
Tejii पर इंडेक्स रोज दिखते हैं: होम पेज की ऊपर वाली पट्टी में NIFTY 50, BANK NIFTY और NIFTY NEXT 50 का पिछला बंद और बदलाव (%), बाजार के घंटों में देरी वाला भाव, और सेक्टर वाले पन्ने पर NSE के 10 सेक्टर इंडेक्स की उस दिन की चाल। Nifty 50 वाले ETF की टोकरी की 50 कंपनियां Nifty 50 की कंपनियों वाले पन्ने पर हैं।
स्कैनर NSE की bhavcopy (दिन भर के भावों की आधिकारिक फाइल) की EQ और BE series की हर लाइन पढ़ता है। ETF की यूनिट भी EQ series में चलती हैं, इसलिए स्कैनर की सूची में शेयरों के बीच ETF के symbol भी दिखते हैं।
जो Tejii पर नहीं है: ETF के अलग पन्ने, iNAV, NAV, premium या discount, tracking error और expense ratio। स्कैनर और सेक्टर के आंकड़े बाजार बंद होने के बाद के हैं, लाइव नहीं, और किसी सूची में नाम होना खरीदने या बेचने का इशारा नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ETF क्या होता है share market में?
ETF (Exchange Traded Fund) एक म्यूचुअल फंड स्कीम है जो किसी इंडेक्स के शेयर उसी अनुपात में रखती है, या सोना, चांदी या bonds रखती है, और जिसकी यूनिट NSE-BSE पर शेयर की तरह खरीदी-बेची जाती हैं। AMFI के मुताबिक 31 अगस्त 2026 को देश में 357 ETF थे। इसे खरीदने के लिए ब्रोकर और demat खाता चाहिए।
ETF और index fund में क्या अंतर है?
दोनों एक इंडेक्स की नकल करते हैं। index fund की यूनिट सीधे फंड कंपनी से दिन के आखिर की NAV पर मिलती हैं, और demat जरूरी नहीं। ETF की यूनिट एक्सचेंज पर, बाजार के घंटों में, उस पल के बाजार भाव पर मिलती हैं, जो NAV से थोड़ा ऊपर या नीचे हो सकता है। SEBI के नियम में दोनों के base expense ratio की ऊपरी सीमा 0.90% है।
क्या ETF खरीदने के लिए demat account जरूरी है?
हां। ETF की यूनिट एक्सचेंज पर ब्रोकर के जरिए खरीदी जाती हैं और शेयर की तरह demat खाते में रहती हैं। SEBI के नियम में फंड कंपनी से सीधे ETF का लेन-देन आम दिनों में सिर्फ ₹25 करोड़ से बड़े सौदों में होता है। index fund की यूनिट फंड कंपनी से मिलती हैं, इसलिए उसमें demat की शर्त नहीं होती।
ETF में SIP कैसे करें — क्या ETF में SIP हो सकती है?
फंड कंपनी वाला SIP, जिसमें हर महीने NAV पर यूनिट मिलती हैं, ETF में नहीं होता, क्योंकि ETF की यूनिट एक्सचेंज पर खरीदी जाती हैं। ब्रोकर के ऐप में तय तारीख पर खरीद की कोई सुविधा हो, तो वह ब्रोकर की अपनी है, और सौदा हर बार उस पल के बाजार भाव पर होता है। Tejii यह नहीं बताता कि SIP किसमें करें।
ETF का भाव NAV से अलग क्यों होता है, और iNAV क्या है?
NAV दिन के आखिर में निकलती है; iNAV वही हिसाब बाजार के घंटों में ताजा भावों से करती है। बाजार भाव खरीदारों और बेचने वालों की मांग से बनता है, इसलिए iNAV से ऊपर (premium) या नीचे (discount) हो सकता है। market maker इस फर्क को घटाते हैं, पर अचानक भारी मांग या कम कारोबार में फर्क बना रह सकता है।
Gold ETF क्या है?
gold ETF ऐसा ETF है जो अपने कुल पैसे का कम से कम 95% सोने और उससे जुड़े साधनों में रखता है; सोना 99.5% शुद्धता की मानक छड़ों में होता है। इसकी यूनिट एक्सचेंज पर शेयर की तरह चलती हैं, और बेचने पर रुपये मिलते हैं, सोना नहीं। सोने का भाव गिरे तो इसकी यूनिट भी गिरती है।
ETF पर टैक्स कितना लगता है?
शेयरों वाले ETF (equity oriented fund) पर 2026-27 में शेयरों वाली दरें हैं: 12 महीने के अंदर बेचने पर 20%, उसके बाद साल के ₹1.25 लाख से ऊपर के मुनाफे पर 12.5%। gold और silver ETF में 12 महीने के बाद 12.5%, बिना ₹1.25 लाख की छूट के; उससे पहले slab दर। 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदी debt ETF यूनिट पर हमेशा slab दर।
क्या ETF safe है? ETF न बिके तो क्या होता है?
ETF उतना ही चढ़ता-गिरता है जितना उसका इंडेक्स या सोना, इसलिए नुकसान हो सकता है। कम कारोबार वाले ETF में खरीदार दूर के भाव पर मिल सकता है। SEBI के नियम में, बंद भाव लगातार 7 कारोबारी दिन NAV से 1% से ज्यादा नीचे रहे या लगातार 3 दिन कोई भाव न आए, तो ₹25 करोड़ तक की यूनिट बिना exit load के फंड कंपनी को लौटाई जा सकती हैं।