इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है — डिलीवरी से फर्क, 20% margin, auto square-off, और 10 में से 7 को नुकसान
इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है: उसी दिन खरीदकर उसी दिन बेचना। डिलीवरी से फर्क, 20% margin, auto square-off, चार्ज, टैक्स, और SEBI का आंकड़ा कि 10 में से 7 को नुकसान हुआ।
एक लाइन में
इंट्राडे ट्रेडिंग (intraday trading) का मतलब है किसी शेयर को जिस दिन खरीदा, उसी दिन बेच देना; या पहले बेचकर उसी दिन वापस खरीद लेना। दिन के आखिर में डीमैट खाते में कोई शेयर न आता है, न जाता है। हाथ में सिर्फ दोनों भावों का फर्क बचता है, मुनाफा या नुकसान।
Delivery (डिलीवरी) इसका उल्टा है: शेयर सचमुच डीमैट खाते में आते हैं और तब तक रहते हैं जब तक आप न बेचें। ब्रोकर के ऐप में intraday अक्सर MIS और delivery CNC नाम से दिखता है।
SEBI (शेयर बाजार का नियामक) की 24 जुलाई 2024 की स्टडी के मुताबिक 2022-23 में नकद बाजार (cash market) में intraday करने वाले 10 में से 7 लोगों को नुकसान हुआ। Tejii यह नहीं बताता कि intraday करें या नहीं, किस शेयर में, या किस तरीके से। यह लेख सिर्फ नियम, खर्च और जोखिम समझाता है।
Intraday और delivery में फर्क: MIS और CNC का मतलब
Delivery में आम तौर पर खरीद की पूरी रकम लगती है, शेयर अगले कारोबारी दिन (T+1) डीमैट में आते हैं, और कितने भी दिन रखे जा सकते हैं। Intraday में सिर्फ margin (सौदे के बदले पहले से रोकी गई रकम) लगता है, पर सौदा उसी दिन बराबर करना होता है।
MIS (Margin Intraday Square-off) और CNC (Cash and Carry) ब्रोकरों के रखे नाम हैं, एक्सचेंज के नहीं। एक्सचेंज का हिसाब सीधा है: दिन के आखिर में एक ही शेयर की आपकी खरीद और बिक्री आपस में कट जाती है, जिसे netting कहते हैं। जो बचा, उसी की delivery होती है।
इसलिए CNC में खरीदकर उसी दिन बेच दिया, तो भी वह सौदा बिना delivery के निपटा, और STT व टैक्स में intraday ही गिना जाता है। फर्क बटन के नाम से नहीं, इससे पड़ता है कि शेयर सचमुच खाते में गए या नहीं।
हर शेयर में intraday चलता भी नहीं। NSE पर जिन शेयरों की series (श्रेणी) BE है, उनमें netting नहीं होती और हर सौदे की delivery जरूरी है; यह एक्सचेंज का नियम है। बाकी किन शेयरों में MIS मिलेगा, यह हर ब्रोकर तय करता है।
Margin और leverage: 20% का नियम, और एक काल्पनिक उदाहरण
NSE ने 31 अगस्त 2020 के सर्कुलर में ब्रोकरों के लिए जरूरी किया कि नकद बाजार में सौदे से पहले ग्राहक से कम से कम 20% margin लिया जाए। यानी ₹1 लाख के सौदे के लिए कम से कम ₹20,000, और leverage (अपने पैसे से कई गुना बड़ा सौदा) ज्यादा से ज्यादा 5 गुना। ब्रोकर इससे ज्यादा margin भी मांग सकता है।
SEBI के 20 जुलाई 2020 के सर्कुलर से peak margin (दिन के भीतर की सबसे ऊंची margin जरूरत) का नियम आया: clearing corporation (सौदे निपटाने वाली संस्था) दिन में कम से कम चार बार, बिना बताए समय पर, हर ग्राहक की स्थिति दर्ज करती है। यह 1 सितंबर 2021 से पूरा लागू है, इसलिए 20% की शर्त दिन के भीतर भी लगती है।
एक काल्पनिक उदाहरण। आपके खाते में ₹20,000 हैं और आप MIS में ₹500 भाव वाले किसी शेयर के 200 शेयर खरीदते हैं, यानी ₹1 लाख का सौदा। शेयर 2% गिरकर ₹490 पर आया, तो नुकसान ₹2,000: सौदे का 2%, पर आपके अपने पैसे का 10%।
शेयर 5% गिरे तो नुकसान ₹5,000, यानी अपने पैसे का 25%, एक ही दिन में। Leverage मुनाफे और नुकसान, दोनों को उतने ही गुना बड़ा करता है।
Auto square-off: एक्सचेंज का नियम क्या है, ब्रोकर का क्या
आपने intraday सौदा खुद बंद नहीं किया, तो ब्रोकर एक तय समय पर उसे उस वक्त के भाव पर बंद कर देता है; यही auto square-off है। यह समय एक्सचेंज तय नहीं करता: वह सिर्फ कारोबार के घंटे तय करता है, square-off का समय हर ब्रोकर की अपनी नीति है।
एक्सचेंज के नियम में यह बदला: 3 अगस्त 2026 से जिन शेयरों में F&O (futures और options, यानी आगे की तारीख के सौदे) चलते हैं, उनका आम कारोबार 3:15 पर रुक जाता है और 3:35 तक closing auction (बंद भाव तय करने वाली नीलामी) चलती है। बाकी शेयर 3:30 तक चलते हैं।
अक्टूबर 2026 में एक बड़े ब्रोकर के help पेज पर F&O वाले शेयरों के लिए 3:12 और बाकी के लिए 3:25 लिखा है; एक दूसरे के यहां 3:00 और 3:15। पहला ब्रोकर ऐसे हर ऑर्डर पर ₹50 और 18% GST लेता है, और लिखता है कि उतार-चढ़ाव वाले दिन समय बदल सकता है।
SEBI ने 12 सितंबर 2026 को closing auction का समय बदलने के दो विकल्पों पर राय मांगी थी। 8 अक्टूबर 2026 तक नया सर्कुलर नहीं आया है; आया, तो ब्रोकरों के समय बदल सकते हैं।
पहले बेचना (short selling), और सर्किट पर फंस जाना
Intraday में पहले बेचकर बाद में खरीदा भी जा सकता है; इसे short selling कहते हैं। SEBI के 5 जनवरी 2024 के सर्कुलर में छोटे निवेशकों को इसकी इजाजत है, पर settlement (शेयर और पैसे का असल लेन-देन) के दिन हर बेचने वाले को शेयर देने ही होंगे।
इसलिए नकद बाजार में ऐसा सौदा उसी दिन वापस खरीदकर बराबर करना पड़ता है। वापस न खरीद पाए, तो यह short delivery (तय दिन पर शेयर न दे पाना) बन जाती है, और clearing corporation नीलामी से वे शेयर खरीदवाती है।
नीलामी में भी शेयर न मिलें, तो हिसाब नकद में होता है (close-out)। NSE Clearing के नियम में इसका भाव सौदे के दिन से नीलामी के दिन तक का सबसे ऊंचा भाव है, या नीलामी वाले दिन के बंद भाव से 20% ऊपर, जो भी ज्यादा हो।
वापस न खरीद पाने की आम वजह अपर सर्किट है: भाव दिन की ऊपरी हद पर अटक जाता है और बेचने वाला कोई नहीं होता। उल्टी तरफ, खरीदा हुआ शेयर लोअर सर्किट पर अटके तो खरीदार नहीं मिलता, और ब्रोकर का square-off ऑर्डर भी पड़ा रह जाता है।
खरीद वाला सौदा बंद न हो पाए, तो वह delivery बन जाता है। ऊपर के उदाहरण में ₹20,000 नहीं, पूरे ₹1 लाख चुकाने होंगे; पैसा न हो तो ब्रोकर वे शेयर बाद में बेच देता है, जो भाव मिले।
चार्ज और टैक्स: ₹1 लाख के सौदे का हिसाब
Intraday में STT (सौदे पर लगने वाला सरकारी टैक्स) सिर्फ बिक्री पर 0.025% है; delivery में खरीद और बिक्री, दोनों पर 0.1%। NSE के 31 मार्च 2026 के सर्कुलर के मुताबिक 1 अप्रैल 2026 से F&O का STT बढ़ा, ये दोनों दरें नहीं बदलीं। स्टांप ड्यूटी सिर्फ खरीद पर 0.003% है (delivery में 0.015%), और DP charge (डीमैट से शेयर निकलने का शुल्क) नहीं लगता।
मान लीजिए ऊपर वाला ₹1 लाख का सौदा उसी भाव पर बेच दिया, और ब्रोकर हर ऑर्डर पर ₹20 लेता है। ब्रोकरेज ₹40, STT ₹25, स्टांप ड्यूटी ₹3, NSE का transaction charge (एक्सचेंज की फीस) दोनों तरफ मिलाकर ₹6.14 (1 मार्च 2026 से ₹3.07 प्रति लाख), SEBI fee 20 पैसे (₹10 प्रति करोड़), और ब्रोकरेज व इन दोनों चार्ज पर 18% GST करीब ₹8.34। कुल करीब ₹83।
₹83 सौदे का करीब 0.08% है, पर आपके ₹20,000 का करीब 0.4%। यह हर चक्कर में लगता है, मुनाफा हो या नुकसान। दिन में ऐसे पांच चक्कर, यानी अपने पैसे का करीब 2% सिर्फ खर्च में।
Intraday की कमाई capital gains नहीं है। Income-tax Act, 2025 में बिना delivery निपटा सौदा speculative transaction (सट्टे की किस्म का सौदा) है, इसलिए यह कमाई कारोबारी आय मानी जाती है और बाकी आमदनी में जुड़कर slab (आमदनी के हिसाब से सीढ़ी) की दर से टैक्स लगता है।
इसका नुकसान सिर्फ इसी किस्म के मुनाफे से कटता है, और धारा 113 के मुताबिक चार tax year (टैक्स के साल) तक ही आगे जाता है। बाकी नियम शेयर पर टैक्स वाले लेख में हैं; अपने मामले में CA से पूछिए।
SEBI की स्टडी: 10 में से 7 को नुकसान
SEBI ने 24 जुलाई 2024 को नकद बाजार में आम लोगों के intraday सौदों पर स्टडी जारी की। इसमें दस सबसे बड़े ब्रोकरों के ग्राहकों के 2018-19, 2021-22 और 2022-23 के आंकड़े हैं। 8 अक्टूबर 2026 तक इस विषय पर SEBI की यही सबसे नई स्टडी है; बाद वाली F&O पर हैं।
2022-23 में 71% लोगों को कुल मिलाकर नुकसान हुआ। जिन्होंने साल में 500 से ज्यादा सौदे किए, उनमें यह हिस्सा 80% था। जिन्होंने तीनों साल intraday किया, उनमें भी 2022-23 में 54% घाटे में रहे।
स्टडी के नमूने में intraday करने वाले 2018-19 के करीब 15 लाख से 2022-23 में 69 लाख हो गए। 30 साल से कम उम्र वालों का हिस्सा 18% से बढ़कर 48% हुआ, और इनमें 76% को नुकसान हुआ।
खर्च का असर: घाटे वालों ने अपने नुकसान के ऊपर, उस नुकसान का 57% और खर्च में दिया, जबकि मुनाफे वालों के मुनाफे का 19% खर्च में गया। ये बीते सालों के आंकड़े हैं; किसी एक व्यक्ति का नतीजा इनसे तय नहीं होता।
सबसे बड़ी गलतफहमी: कम पैसा लगा है, तो जोखिम भी कम है
₹20,000 से ₹1 लाख का सौदा हो जाता है, तो लगता है दांव पर ₹20,000 ही हैं। यह गलत है। नफा-नुकसान पूरे ₹1 लाख पर गिना जाता है; margin सिर्फ जमानत है, नुकसान की हद नहीं। सर्किट पर फंसे सौदे में नुकसान margin से ऊपर भी जा सकता है, और वह रकम ब्रोकर को चुकानी होती है।
दूसरी गलतफहमी: ब्रोकर 3 बजे के आसपास अपने आप बंद कर देगा, तो नुकसान वहीं रुक जाएगा। Auto square-off नुकसान रोकने का औजार नहीं है। वह सौदे को उस वक्त के भाव पर बंद करने की कोशिश है, और सर्किट पर वह पूरी भी नहीं होती।
तीसरी: intraday में STT कम है, तो यह सस्ता है। एक सौदे पर सही, पर यहां सौदे बार-बार होते हैं; खर्च का बोझ SEBI की स्टडी में दिख चुका है।
Tejii यह नहीं बताता कि intraday करें या नहीं, कितना margin लें, या कौन सा शेयर चुनें। किसी एक व्यक्ति के लिए ऐसी सलाह देना SEBI में registered निवेश सलाहकार का काम है।
Tejii पर इससे जुड़ी चीजें
जो यहां नहीं है: Tejii पर दिन के भीतर का भाव नहीं आता। शेयरों के सारे आंकड़े बाजार बंद होने के बाद की NSE bhavcopy (दिन भर के भावों की आधिकारिक फाइल) से बनते हैं; सिर्फ होम पेज की ऊपर वाली पट्टी में तीन इंडेक्स का देरी वाला भाव दिखता है।
जो यहां है: Nifty 500 के हर शेयर के पन्ने पर पिछले एक साल की पांच सबसे बड़ी एक-दिन की गिरावटें, तारीख के साथ। ये बंद भाव से बंद भाव तक की हैं, दिन के भीतर के सबसे नीचे भाव तक की नहीं। उसी पन्ने पर यह भी है कि उस दिन का कारोबार 20 दिन के औसत का कितना गुना रहा।
Practice पन्ने के नुकसान कैलकुलेटर में रकम डालने पर दिखता है कि 10%, 20% या 38% गिरावट में वह कितनी रह जाती है; वह leverage नहीं गिनता। किसी शेयर का price band (दिन की हद), F&O वाले शेयरों की सूची और delivery प्रतिशत Tejii पर नहीं हैं; ये NSE की वेबसाइट पर मिलते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है?
शेयर को जिस दिन खरीदा उसी दिन बेच देना, या पहले बेचकर उसी दिन वापस खरीद लेना, intraday trading है। दिन के आखिर में डीमैट खाते में कोई शेयर नहीं आता-जाता; सिर्फ दोनों भावों का फर्क मुनाफा या नुकसान बनता है। ब्रोकर के ऐप में यह विकल्प अक्सर MIS या Intraday नाम से दिखता है। Tejii यह नहीं बताता कि intraday करें या नहीं।
इंट्राडे और डिलीवरी में क्या अंतर है?
Delivery में आम तौर पर पूरी रकम लगती है और शेयर अगले कारोबारी दिन डीमैट में आते हैं; उन्हें कितने भी दिन रखा जा सकता है। Intraday में कम से कम 20% margin पर सौदा होता है, पर उसी दिन बराबर करना पड़ता है। STT, स्टांप ड्यूटी और टैक्स का हिसाब दोनों में अलग है: intraday की कमाई capital gains नहीं, कारोबारी आय गिनी जाती है।
Intraday square off कितने बजे होता है? शेयर न बेचें तो क्या होगा?
एक्सचेंज का कोई एक समय नहीं है; यह हर ब्रोकर खुद तय करता है। 3 अगस्त 2026 से F&O वाले शेयरों का आम कारोबार 3:15 पर रुकता है, इसलिए ब्रोकर इनमें पहले square-off करते हैं: अक्टूबर 2026 में एक बड़े ब्रोकर के यहां 3:12, दूसरे के यहां 3:00। आप खुद बंद न करें तो ब्रोकर उस वक्त के भाव पर बंद करता है; कई ब्रोकर इसका अलग चार्ज लेते हैं।
इंट्राडे के लिए कितना पैसा चाहिए, कितना margin मिलता है?
NSE के 31 अगस्त 2020 के सर्कुलर के मुताबिक नकद बाजार में ब्रोकर को सौदे से पहले कम से कम 20% margin लेना जरूरी है। यानी ₹1 लाख के सौदे के लिए कम से कम ₹20,000, और leverage ज्यादा से ज्यादा 5 गुना। ब्रोकर इससे ज्यादा भी मांग सकता है। नुकसान पूरे सौदे की रकम पर गिना जाता है, margin पर नहीं।
इंट्राडे में कितना चार्ज और STT लगता है?
STT सिर्फ बिक्री पर 0.025%, स्टांप ड्यूटी सिर्फ खरीद पर 0.003%, NSE का transaction charge करीब ₹3.07 प्रति लाख, SEBI fee ₹10 प्रति करोड़, और ब्रोकरेज, transaction charge व SEBI fee पर 18% GST। DP charge नहीं लगता। ₹1 लाख में खरीदकर उसी भाव पर बेचने में, ₹20 प्रति ऑर्डर ब्रोकरेज मानें तो, कुल करीब ₹83 जाते हैं।
इंट्राडे की कमाई पर टैक्स कैसे लगता है?
Intraday की कमाई capital gains नहीं, speculative business income (सट्टे की किस्म की कारोबारी आय) मानी जाती है। यह आपकी बाकी आमदनी में जुड़ती है और slab की दर से टैक्स लगता है। इसका नुकसान सिर्फ इसी किस्म के मुनाफे से कटता है, और Income-tax Act, 2025 की धारा 113 के मुताबिक चार tax year तक आगे जा सकता है। अपने मामले में CA से पूछिए।
इंट्राडे में कितने लोग नुकसान करते हैं? SEBI की स्टडी क्या कहती है?
SEBI की 24 जुलाई 2024 की स्टडी के मुताबिक 2022-23 में नकद बाजार में intraday करने वाले 71% लोगों को नुकसान हुआ, यानी 10 में से 7 को। साल में 500 से ज्यादा सौदे करने वालों में यह 80% था, और 30 साल से कम उम्र वालों में 76%। घाटे वालों ने नुकसान के ऊपर, उसका 57% और खर्च में दिया।
क्या इंट्राडे में पहले बेचकर बाद में खरीद सकते हैं?
हां, इसे short selling कहते हैं, और SEBI के ढांचे में छोटे निवेशकों को इसकी इजाजत है। पर settlement के दिन शेयर देना जरूरी है, इसलिए नकद बाजार में यह सौदा उसी दिन वापस खरीदकर बराबर करना पड़ता है। शेयर अपर सर्किट पर अटक जाए और आप वापस न खरीद पाएं, तो मामला नीलामी में जाता है, जिसका बोझ आप पर पड़ता है।