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क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) क्या है — F&O शेयरों का बंद भाव अब कैसे तय होता है

3 अगस्त 2026 से F&O वाले शेयरों का बंद भाव दिन के आखिर में होने वाली नीलामी से तय होता है। समझिए यह कैसे चलती है और ऑर्डर देते समय क्या ध्यान रखें।

प्रकाशित 2026-09-18 · अपडेट 2026-10-08 · ⏱ 6 मिनट

एक लाइन में

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (Closing Auction Session, CAS) दिन के आखिर में होने वाली एक छोटी नीलामी है, जिससे शेयर का आधिकारिक बंद भाव (closing price) तय होता है। 3 अगस्त 2026 से NSE और BSE पर यह उन्हीं शेयरों में लागू है जिन पर F&O (futures और options, यानी डेरिवेटिव सौदे) चलते हैं।

पहले इन शेयरों का बंद भाव आखिरी 30 मिनट (3:00 से 3:30) के सौदों का VWAP होता था — यानी ऐसा औसत जिसमें बड़े सौदे का वजन ज्यादा होता है। अब इनका सामान्य कारोबार 3:15 पर रुकता है, 3:20 से नीलामी के ऑर्डर इकट्ठा होते हैं, और फिर वह भाव चुना जाता है जिस पर सबसे ज्यादा शेयरों का सौदा बन सके। वही उस दिन का बंद भाव है।

SEBI (शेयर बाजार का नियामक) का सर्कुलर 16 जनवरी 2026 को आया था। नियम चरणों में लागू हो रहा है, और पहले चरण में सिर्फ F&O वाले शेयर हैं। बाकी शेयरों का बंद भाव अब भी आखिरी 30 मिनट का VWAP है। SEBI का तर्क यह है कि इंडेक्स का बंद स्तर, म्यूचुअल फंड की NAV (एक यूनिट का भाव) और डेरिवेटिव का हिसाब, ये सब इसी एक भाव से जुड़े होते हैं।

3:15 के बाद क्या-क्या होता है

F&O वाले शेयरों में सामान्य कारोबार (continuous trading, जिसमें भाव हर पल बदलता रहता है) अब 3:15 पर रुक जाता है। 3:00 से 3:15 तक के सौदों के VWAP से reference price (संदर्भ भाव) बनता है, जो नीलामी का आधार भी है और हद का भी।

3:15 से 3:20 तक बीच का समय (transition) है: नया ऑर्डर नहीं लिया जाता और एक्सचेंज reference price बताता है। 3:15 तक जो limit order (अपना तय भाव लिखकर दिया गया ऑर्डर) पूरे नहीं हुए, वे नीलामी में चले जाते हैं, बशर्ते भाव हद के भीतर हो। stop-loss, iceberg (छिपी मात्रा वाले) और IOC ऑर्डर, तथा हद से बाहर के ऑर्डर नीलामी में नहीं जाते, रद्द हो जाते हैं।

3:20 से 3:25 तक market order (जो भी भाव निकले, उसी पर सौदा) और limit order, दोनों डाले, बदले या रद्द किए जा सकते हैं। 3:25 के बाद सिर्फ limit order डाला जा सकता है, और पहले से पड़ा market order न बदला जा सकता है, न रद्द। ऑर्डर लेना 3:28 से 3:30 के बीच किसी भी पल, बिना पहले बताए (random) बंद हो जाता है।

3:30 से 3:35 के बीच ऑर्डरों का मिलान होकर बंद भाव तय हो जाता है। डेरिवेटिव का कारोबार 3:40 तक चलता है। जिन शेयरों में F&O नहीं है, उनमें सब पहले जैसा है — कारोबार 3:30 तक।

नीलामी का भाव कैसे निकलता है: एक काल्पनिक उदाहरण

नीलामी में हर ऑर्डर का भाव reference price से 3% ऊपर या नीचे की हद के भीतर होना चाहिए। मान लीजिए reference price ₹200 है, यानी हद ₹194 से ₹206। खरीदार: A को 300 शेयर ₹202 तक में चाहिए, B को 200 शेयर ₹200 तक में, C को 100 शेयर ₹198 तक में। बेचने वाले: D 200 शेयर कम से कम ₹197 में, E 300 शेयर ₹200 में, F 200 शेयर ₹203 में।

अब हर भाव पर गिनिए कि सौदा कितने शेयरों का बन सकता है। ₹198 पर खरीदार मिलकर 600 शेयर चाहते हैं, पर इतने में बेचने वाला सिर्फ D है — सौदा 200 का। ₹200 पर A और B के 500 शेयर, और D तथा E के 500 शेयर — सौदा 500 का। ₹202 पर सिर्फ A बचता है — सौदा 300 का। सबसे ज्यादा सौदा ₹200 पर बनता है, इसलिए यही equilibrium price (संतुलन भाव) है और यही उस दिन का बंद भाव।

सौदा सबका इसी एक भाव पर होता है: A ₹202 देने को तैयार था, पर देगा ₹200; D ₹197 में बेच देता, पर पाएगा ₹200। C और F का सौदा नहीं बनेगा। और कोई भाव तय ही न हो पाए, तो reference price ही उस दिन का बंद भाव मान लिया जाता है।

3:15 के बाद ऑर्डर देने वालों के लिए जरूरी बातें

पहले देख लीजिए कि शेयर में F&O है या नहीं — यह सूची एक्सचेंज की वेबसाइट पर मिलती है, और इसमें शेयर जुड़ते-हटते रहते हैं। F&O वाले शेयर में 3:20 के बाद दिया ऑर्डर तुरंत पूरा नहीं होता; वह नीलामी तक रुका रहता है, और सौदा हुआ या नहीं, यह 3:30 के बाद ही पता चलता है।

Limit order में भाव आपके लिखे भाव पर नहीं, नीलामी वाले एक ही भाव पर तय होता है — खरीदने वाले को अपने लिखे भाव के बराबर या उससे कम में, बेचने वाले को बराबर या उससे ज्यादा में। Market order में वही भाव मिलेगा जो नीलामी में निकले, और वह 3% की हद में कहीं भी हो सकता है।

सौदा पक्का नहीं है: ऑर्डर पूरा भर सकता है, आधा भर सकता है, या बिल्कुल नहीं। जो हिस्सा नहीं भरा, वह रद्द हो जाता है, अगले दिन नहीं जाता। नीलामी के दौरान एक्सचेंज indicative equilibrium price (अब तक आए ऑर्डरों से बनता संभावित भाव) दिखाता है, पर हर ऐप में यह दिखे, यह जरूरी नहीं।

सबसे बड़ी गलतफहमी: "अब बाजार 3:15 पर बंद होता है, और 3:15 का भाव ही बंद भाव है"

ये दोनों बातें गलत हैं। 3:15 पर सिर्फ F&O वाले शेयरों का लगातार चलने वाला कारोबार रुकता है; नीलामी के ऑर्डर 3:20 से लिए जाते हैं और यह खिड़की 3:28 से 3:30 के बीच बंद होती है। बाकी शेयर 3:30 तक चलते हैं, और डेरिवेटिव 3:40 तक।

3:15 पर ऐप में दिख रहा आखिरी भाव और उस दिन का बंद भाव अलग हो सकते हैं। मान लीजिए 3:15 पर आखिरी सौदा ₹200 पर हुआ और नीलामी ₹203 पर निकली — तो उस दिन का बंद भाव ₹203 है, ₹200 नहीं। अगले दिन भाव कितना चढ़ा या गिरा, यह भी ₹203 से गिना जाएगा।

गलतफहमी नई भी नहीं है। पहले भी बंद भाव आखिरी सौदे का भाव नहीं, आखिरी 30 मिनट का औसत होता था; बदला सिर्फ तरीका है। नीलामी के बीच दिख रहा संभावित भाव भी बंद भाव नहीं है — बाद में आए ऑर्डर उसे खिसका सकते हैं।

नियम अभी बदल रहे हैं (8 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति)

शुरुआती हफ्तों में बाजार से जुड़े कई लोगों ने आखिरी मिनटों के तेज उतार-चढ़ाव और F&O expiry (सौदे खत्म होने का दिन) पर ज्यादा हलचल की शिकायत की। 10 सितंबर 2026 को SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि CAS जारी रहेगा, इसे वापस नहीं लिया जाएगा।

12 सितंबर 2026 को SEBI ने एक consultation paper (राय मांगने वाला प्रस्ताव) जारी किया, जिसमें समय के दो विकल्प हैं। पहला: कारोबार 3:30 तक, नीलामी 3:31 से 3:40 तक, डेरिवेटिव 3:45 तक। दूसरा: कारोबार 3:15 तक, नीलामी 3:15 से 3:25 तक, डेरिवेटिव 3:30 तक। डेरिवेटिव सौदों का settlement price (हिसाब चुकता करने वाला भाव) निकालने का तरीका बदलने के प्रस्ताव भी हैं। सुझाव देने की आखिरी तारीख 3 अक्टूबर 2026 थी।

ये अभी प्रस्ताव हैं, फैसला नहीं। 8 अक्टूबर 2026 तक SEBI का नया सर्कुलर नहीं आया है, और 3 अगस्त वाले नियम ही लागू हैं। इसलिए इस लेख में लिखे समय को पक्का मानने से पहले NSE या BSE की ताजा घोषणा देख लीजिए।

Tejii के पन्नों पर इसका असर

Tejii पर हर शेयर के पन्ने पर NSE का आधिकारिक बंद भाव दिखता है — F&O वाले शेयरों में नीलामी वाला भाव, बाकी में आखिरी 30 मिनट का VWAP। टॉप गेनर-लूजर का प्रतिशत, RSI और 20, 50, 200 दिन के औसत भी इन्हीं बंद भावों से बनते हैं। इसीलिए आखिरी मिनटों में आपके ऐप में दिख रहा भाव Tejii के बंद भाव से अलग हो सकता है।

NSE की रोज की bhavcopy (दिन भर के भावों वाली आधिकारिक फाइल) में यह बदलाव साफ दिखता है। 31 जुलाई 2026 को Nifty 50 के पचास में से 48 शेयरों में last price (आखिरी सौदे का भाव) और close price अलग थे। 3 अगस्त से 16 सितंबर के 32 कारोबारी दिनों में, हर दिन, इन पचास में से हर शेयर में ये दोनों एक ही नंबर हैं — दिन का आखिरी सौदा अब नीलामी वाले भाव पर होता है।

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