अपर सर्किट और लोअर सर्किट क्या होता है — एक दिन में शेयर कितना चढ़-गिर सकता है?
शेयर का भाव एक दिन में कितना चढ़-गिर सकता है, हद छूने पर क्या होता है, F&O शेयरों का नियम क्या है, और लोग लोअर सर्किट में क्यों फंसते हैं।
एक लाइन में
अपर सर्किट वह सबसे ऊंचा भाव है जहां तक कोई शेयर एक दिन में चढ़ सकता है, और लोअर सर्किट वह सबसे नीचा भाव है जहां तक वह उस दिन गिर सकता है। यह हद स्टॉक एक्सचेंज तय करता है, और इसे price band (भाव की हद) या circuit limit भी कहते हैं।
हद पिछले दिन के बंद भाव (close price) से गिनी जाती है। मान लीजिए किसी शेयर का कल का बंद भाव ₹100 था और उसका band 5% है। तो आज उसका भाव न ₹105 से ऊपर जा सकता है, न ₹95 से नीचे। ₹105 उसका अपर सर्किट है, ₹95 लोअर सर्किट।
मकसद इतना है कि किसी अफवाह, गलत ऑर्डर या घबराहट में भाव एक ही दिन में बेकाबू न हो जाए। F&O वाले शेयरों का नियम थोड़ा अलग है, वह आगे समझाया है।
NSE पर हद कितनी होती है
जिन शेयरों में F&O नहीं होता, उनके लिए NSE पर चार तरह के band होते हैं: 2%, 5%, 10% और 20%, ऊपर और नीचे दोनों तरफ बराबर। जिन शेयरों के लिए कोई छोटा band तय नहीं है, उन पर 20% लगता है।
कौन सा शेयर किस band में रहेगा, यह एक्सचेंज तय करता है, और यह बदलता रहता है। band छोटा करने की समीक्षा रोज होती है, बड़ा करने की कम बार और तय शर्तों पर। किसी शेयर पर एक्सचेंज की निगरानी (surveillance) वाली कार्रवाई हो, तब भी उसका band छोटा किया जा सकता है।
इसलिए किसी शेयर का band एक बार देखकर पक्का न मान लें। जिस दिन जरूरत हो, NSE की वेबसाइट या अपने ब्रोकर ऐप में देखें।
F&O वाले शेयरों का हिसाब अलग है
जिन शेयरों में F&O (futures और options, यानी डेरिवेटिव सौदे) का कारोबार होता है, उन पर ऊपर वाला तय band लागू नहीं होता। इनके लिए एक्सचेंज dynamic price band (खिसकने वाली हद) रखता है, जो दिन की शुरुआत में पिछले बंद भाव से 10% ऊपर और 10% नीचे होता है।
अगर भाव इस हद तक पहुंचे और वहां कई अलग-अलग ग्राहकों और ब्रोकरों के बीच तय संख्या में सौदे हों, तो cooling-off period (इंतजार का समय) शुरू होता है। इस दौरान कारोबार चलता रहता है, बस हद वहीं रहती है। इंतजार के बाद हद उसी दिशा में आगे खिसका दी जाती है: पहली दो बार 5-5%, आम तौर पर 15 मिनट के इंतजार के बाद। फिर कदम छोटे होते जाते हैं और इंतजार लंबा।
सीधा मतलब: F&O वाला शेयर एक दिन में 10% से ज्यादा भी चढ़ या गिर सकता है। "इसमें सर्किट नहीं लगता" सुनकर यह न समझें कि इसका भाव कम हिलता है।
सर्किट लगने पर असल में क्या होता है
पहले एक बात साफ कर लें: किसी एक शेयर में सर्किट लगने पर उसका कारोबार बंद नहीं होता। बस भाव उस हद से आगे नहीं जा सकता। हद से बाहर के भाव पर डाला गया ऑर्डर reject (नामंजूर) हो जाता है।
मान लीजिए ऊपर वाले उदाहरण का शेयर ₹105 के अपर सर्किट पर अटक गया। तब उस भाव पर खरीदने वाले बहुत होते हैं और बेचने वाला कोई नहीं। ब्रोकर ऐप की market depth (बाकी पड़े खरीद-बिक्री ऑर्डर की सूची) में बेचने वाली तरफ खाली दिखती है, जिसे बोलचाल में "only buyers" कहते हैं। आपका खरीद का ऑर्डर उसी भाव पर लाइन में पड़ा रहता है। कोई बेचने वाला आया तो पूरा होगा, नहीं आया तो नहीं।
लोअर सर्किट इसका उल्टा है: ₹95 पर बेचने वाले बहुत, खरीदने वाला कोई नहीं ("only sellers")। अगर आपके पास वह शेयर है और आप बेचना चाहते हैं, तो आपका ऑर्डर भी लाइन में पड़ा रहेगा। एक ही भाव पर जो ऑर्डर पहले आया, वह पहले पूरा होता है। इसी को "लोअर सर्किट में फंसना" कहते हैं।
अपर सर्किट पर खरीदने वाले की दिक्कत अलग है: उसका ऑर्डर अक्सर पूरा ही नहीं होता, और होता है तो उस दिन के सबसे ऊंचे मंजूर भाव पर। और आम (DAY) ऑर्डर दिन खत्म होने तक पूरा न हो, तो अपने आप रद्द हो जाता है।
पूरे बाजार का सर्किट ब्रेकर
एक-एक शेयर के अलावा पूरे बाजार के लिए भी एक ब्रेक है, जिसे market-wide circuit breaker कहते हैं। अगर Nifty 50 या BSE का Sensex, इनमें से कोई भी पिछले दिन के बंद से 10%, 15% या 20% ऊपर या नीचे चला जाए, तो देश भर के शेयर और शेयर वाले F&O बाजारों में एक साथ कारोबार रुक सकता है। कितनी देर, यह इस पर निर्भर है कि हद दिन में कब छुई गई। ऐसा बहुत कम होता है।
मान लीजिए इनमें से कोई इंडेक्स कल 10,000 पर बंद हुआ (सिर्फ समझाने के लिए आसान नंबर)। तो आज उसकी 10% वाली हदें 9,000 और 11,000 होंगी। ये हदें रोज नए बंद भाव से गिनी जाती हैं।
10% की हद दोपहर 1 बजे से पहले छू ली जाए तो कारोबार 45 मिनट रुकता है, 1 से 2:30 के बीच तो 15 मिनट, और 2:30 या उसके बाद तो नहीं रुकता। 15% की हद 1 बजे से पहले छू ली जाए तो 1 घंटा 45 मिनट, 1 से 2 बजे के बीच तो 45 मिनट, और 2 बजे या उसके बाद तो बाकी दिन कारोबार बंद। 20% की हद कभी भी छू ली जाए, तो उस दिन आगे कारोबार नहीं होता।
जब रुका हुआ कारोबार उसी दिन फिर शुरू होता है, तो पहले 15 मिनट का pre-open session (ऑर्डर मिलाकर शुरुआती भाव तय करने का समय) चलता है, फिर सामान्य कारोबार।
सबसे बड़ी गलतफहमी
"अपर सर्किट लगा है, मतलब कंपनी में जरूर कुछ बढ़िया है" — यह गलत है। अपर सर्किट सिर्फ इतना बताता है कि उस दिन उस भाव पर खरीदने वाले ज्यादा थे और बेचने वाले कम। यह कंपनी की कमाई, कर्ज या कामकाज के बारे में कुछ नहीं कहता, और अगले दिन के भाव के बारे में भी नहीं। लोअर सर्किट पर भी यही बात उल्टी तरफ से लागू होती है।
कम कारोबार वाले छोटे शेयरों में, खासकर 2% या 5% band वालों में, कुछ ही ऑर्डर भाव को हद तक पहुंचा सकते हैं। "सर्किट पर सर्किट" की खबर देखकर लोग यह देखना भूल जाते हैं कि उस दिन असल में कितने शेयरों का सौदा हुआ (इसे volume कहते हैं)।
एक और आम सोच भी गलत है: "गिरेगा तो बेच दूंगा"। कम कारोबार वाले शेयर में लोअर सर्किट लगातार कई दिन लग सकता है, और हर दिन वही हालत: बेचने वाले बहुत, खरीदने वाला कोई नहीं। अगर एक्सचेंज band और छोटा कर दे, तो भाव हर दिन और कम खिसक पाता है, और निकलने में और दिन लग सकते हैं।
सर्किट एक ब्रेक है, अच्छाई का सर्टिफिकेट नहीं। और यह गारंटी भी नहीं कि जब आप चाहें, तब बेच पाएंगे।
Tejii पर क्या देखें
Tejii पर किसी शेयर का आज का price band नहीं दिखाया जाता, वह NSE की वेबसाइट या ब्रोकर ऐप में देखें। Nifty 500 के हर शेयर के पेज पर उसका बंद भाव, 52 हफ्ते की रेंज (साल भर का सबसे ऊंचा और सबसे नीचा भाव) और पिछले करीब एक साल की सबसे बड़ी गिरावट दिखती है। इससे पता चलता है कि शेयर पहले कितना ऊपर-नीचे हो चुका है, आगे का अंदाजा नहीं।
Scanner (शर्त के हिसाब से शेयर छांटने वाला हिस्सा) में "52 हफ्ते के लो के पास" जैसे पेज भी हैं, पर किसी सूची में नाम होना न खरीदने का इशारा है, न बेचने का।
गिरावटों वाले research पेज पर भाव split (एक शेयर को कई छोटे शेयरों में बांटना) और bonus (मुफ्त अतिरिक्त शेयर) के हिसाब से ठीक (adjusted) किए गए हैं, जहां तक इन्हें पहचाना जा सका। वरना split के दिन भाव का अचानक कम दिखना लोअर सर्किट जैसी गिरावट लग सकता है, जबकि शेयरों की गिनती उसी अनुपात में बढ़ जाती है, इसलिए सिर्फ split की वजह से आपके निवेश की कुल कीमत नहीं बदलती।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अपर सर्किट लगने पर मेरे buy order का क्या होता है?
ऊपरी सर्किट पर भाव और ऊपर नहीं जा सकता, इसलिए आपका खरीद ऑर्डर उसी भाव पर कतार में लग जाता है — कतार यानी समय के क्रम से बनी लाइन। सौदा तभी होगा जब कोई बेचने वाला सामने आए। दिन भर कोई न बेचे तो ऑर्डर बिना पूरा हुए, बाज़ार बंद होने पर रद्द हो जाता है। सीमा से बाहर के भाव वाला ऑर्डर एक्सचेंज रिजेक्ट कर देता है।
सर्किट लिमिट लगने पर शेयर की ट्रेडिंग बंद हो जाती है क्या?
नहीं, सर्किट लगने से शेयर की ट्रेडिंग रुकती नहीं — सिर्फ भाव की हद तय हो जाती है। उस हद वाले भाव पर सौदे होते रह सकते हैं। ऊपरी सर्किट पर कोई बेचे तो खरीदार को शेयर मिल जाएगा; निचले सर्किट पर कोई खरीदे तो बेचने वाले का सौदा हो जाएगा। रुकावट भाव की चाल पर है, कारोबार पर नहीं।
F&O शेयरों पर भी सर्किट लिमिट लगती है?
नहीं। वायदा-ऑप्शन (F&O — आगे की तारीख के सौदे) वाले शेयरों पर दिन की तय सर्किट सीमा नहीं होती। एक्सचेंज पिछले बंद भाव से 10% ऊपर-नीचे की खिड़की रखता है। भाव सिरे तक पहुँचे तो थोड़े ठहराव (कूलिंग-ऑफ) के बाद एक्सचेंज पूरी खिड़की उसी दिशा में सरका सकता है — चौड़ी नहीं करता, दोनों सिरे साथ खिसकते हैं। इसलिए शेयर दिन में 10% से ज़्यादा हिल सकता है।
सर्किट लिमिट कौन तय करता है और यह कब बदलती है?
सीमा एक्सचेंज — NSE और BSE — तय करते हैं, सेबी (बाज़ार का नियामक) के ढाँचे के भीतर। NSE रोज़ इसकी समीक्षा करता है और बदलाव की सूची छापता है; नई सीमा सर्कुलर में लिखी तारीख से लागू होती है। तय बैंड वाले शेयर में एक्सचेंज आम तौर पर कारोबार के बीच सीमा नहीं बढ़ाता। किसी शेयर की सीमा कब बदलेगी, यह पहले से कोई नहीं बता सकता।
मार्केट-वाइड सर्किट ब्रेकर क्या होता है?
यह पूरे बाज़ार का ब्रेक है, किसी एक शेयर का नहीं। निफ्टी 50 या सेंसेक्स — इनमें से जो पहले पिछले बंद स्तर से 10%, 15% या 20% हिले — उस पर देश के सभी एक्सचेंजों में कैश और वायदा दोनों का कारोबार रोक दिया जाता है। तीन स्तर हैं: 10%, 15% और 20%। रुकने की अवधि इस पर निर्भर करती है कि यह कितने बजे हुआ।
सर्किट ब्रेकर लगने पर मार्केट कितनी देर बंद रहता है?
10% पर: 1 बजे से पहले 45 मिनट, 1 से 2:30 के बीच 15 मिनट, उसके बाद कोई रोक नहीं। 15% पर: 1 बजे से पहले 1 घंटा 45 मिनट, 1 से 2 के बीच 45 मिनट, 2 के बाद बाकी दिन बंद। 20% जब भी लगे, बाकी दिन के लिए बंद। कारोबार दोबारा शुरू होने से पहले 15 मिनट का प्री-ओपन (भाव तय करने वाला) सत्र चलता है।
क्या शेयर एक दिन में अपनी सर्किट लिमिट से आगे जा सकता है?
तय बैंड वाले शेयर में नहीं — उस दिन भाव सीमा के पार न ऊपर जा सकता है, न नीचे। लेकिन वायदा-ऑप्शन वाले शेयरों की 10% खिड़की एक्सचेंज ठहराव के बाद उसी दिशा में सरका सकता है — ऊपरी सिरा जितना ऊपर जाए, निचला भी उतना ऊपर आता है। इसलिए वे दिन में 10% से आगे जा सकते हैं। ऐसा कब होगा, पहले से पता नहीं चलता।
अगले दिन की सर्किट लिमिट किस भाव से तय होती है?
हर दिन की सीमा पिछले कारोबारी दिन के बंद भाव (क्लोजिंग प्राइस) से गिनी जाती है — बंद भाव से तय प्रतिशत ऊपर और उतना ही नीचे। यानी सीमा रोज़ नए सिरे से बनती है, पिछले दिन की सीमा आगे नहीं चलती। बंद भाव और हर शेयर पर लागू बैंड का प्रतिशत एक्सचेंज की वेबसाइट पर रोज़ प्रकाशित होते हैं।