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बोनस शेयर और स्टॉक स्प्लिट क्या है — शेयर ज्यादा हुए, पर पैसा उतना ही क्यों?

शेयर ज्यादा, भाव कम — बोनस और स्प्लिट से आपके शेयरों की कुल कीमत नहीं बदलती। अनुपात, record date और चार्ट की नकली गिरावट समझिए।

प्रकाशित 2026-09-15 · ⏱ 6 मिनट

एक लाइन में

बोनस शेयर में कंपनी आपके पुराने शेयरों पर तय अनुपात में बिना कोई पैसा लिए नए शेयर देती है, और स्टॉक स्प्लिट में एक शेयर को तोड़कर कई छोटे शेयर बना देती है। दोनों में शेयरों की गिनती बढ़ती है और भाव उसी अनुपात में घट जाता है, इसलिए आपके शेयरों की कुल कीमत नहीं बदलती — कोई फर्क आता है तो सिर्फ बाजार की रोज की चाल से।

मान लीजिए आपके पास किसी कंपनी के 10 शेयर हैं और भाव ₹1,000 है। कुल ₹10,000। 1:1 बोनस के बाद 20 शेयर होंगे और भाव करीब ₹500 — कुल फिर करीब ₹10,000।

इसे पिज़्ज़ा की तरह सोचिए: 4 टुकड़े कटें या 8, पिज़्ज़ा उतना ही रहता है।

बोनस शेयर: अनुपात कैसे पढ़ें

भारत में बोनस का अनुपात ऐसे पढ़ा जाता है — पहला नंबर नए शेयर, दूसरा नंबर आपके पुराने शेयर। "1:1" मतलब हर 1 शेयर पर 1 नया। "1:2" मतलब हर 2 शेयर पर 1 नया। "2:1" मतलब हर 1 शेयर पर 2 नए। शक हो तो कंपनी की घोषणा के शब्द पढ़िए।

उसी मान लिए उदाहरण में (10 शेयर, भाव ₹1,000): 1:1 पर 20 शेयर, भाव करीब ₹500। 1:2 पर 15 शेयर, भाव करीब ₹667। 2:1 पर 30 शेयर, भाव करीब ₹333। हर बार कुल लगभग ₹10,000।

कंपनी ये शेयर अपने रिज़र्व से देती है — जैसे पिछले सालों का वह मुनाफा जो बांटा नहीं गया, खातों में जमा रखा गया। हिसाब में यह रकम बस रिज़र्व से share capital (शेयर पूंजी) के खाते में चली जाती है। न कंपनी में नया पैसा आता है, न शेयरधारकों को कोई पैसा मिलता है।

स्टॉक स्प्लिट और face value

हर शेयर की एक face value (अंकित मूल्य) होती है — जैसे ₹1, ₹2, ₹5 या ₹10। यह कंपनी के कागजों पर लिखी कीमत है। बाजार भाव अलग चीज है, जिसे खरीदने-बेचने वाले रोज तय करते हैं।

एक काम की बात: डिविडेंड (लाभांश) अक्सर face value के प्रतिशत में बताया जाता है। ₹10 face value पर "100% डिविडेंड" का मतलब ₹10 प्रति शेयर है, बाजार भाव का 100% नहीं।

बोनस में face value नहीं बदलती, पर स्प्लिट में यही face value टूटती है। मान लीजिए घोषणा में लिखा है कि ₹10 face value का 1 शेयर, ₹2 face value के 5 शेयरों में बंटेगा। तो 10 शेयर के 50 शेयर होंगे, और ₹1,000 का भाव करीब ₹200 हो जाएगा। कुल फिर करीब ₹10,000। स्प्लिट में रिज़र्व को कोई नहीं छूता।

सावधान रहिए: खबरों और apps में स्प्लिट का अनुपात कभी "1:5" लिखा दिखता है, कभी "5:1" — और दोनों का मतलब यही एक घटना हो सकता है। पक्का तरीका है face value देखना: पुरानी face value को नई से भाग दीजिए। 10 ÷ 2 = 5, यानी हर 1 शेयर के 5।

record date और ex-date: नए शेयर किसे मिलते हैं

record date (कट-ऑफ तारीख) कंपनी तय करती है। उस दिन जिनके demat खाते (जिसमें शेयर इलेक्ट्रॉनिक रूप में रहते हैं) में शेयर हैं, नए शेयर उन्हीं को मिलते हैं।

ex-date वह दिन है जिससे शेयर बिना इस हक के खरीदा-बेचा जाता है। भारत में शेयरों का सामान्य settlement (सौदा पूरा होना) T+1 है — आज खरीदा शेयर अगले कारोबारी दिन demat में आता है। इसीलिए अब ex-date और record date एक ही दिन होते हैं।

मान लीजिए record date बुधवार है। हक उन्हीं का बनेगा जिनकी खरीद पिछले कारोबारी दिन, यानी मंगलवार (अगर उस दिन छुट्टी न हो) तक हो चुकी थी। बुधवार को खरीदने वाले को बोनस नहीं मिलता — पर उस दिन भाव बोनस के हिसाब से पहले ही घट चुका होता है।

SEBI (शेयर बाजार का नियामक) के नियम के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2024 से घोषित बोनस में record date के अगले कारोबारी दिन बोनस शेयर जारी (allot) माने जाते हैं, और उसके अगले दिन से उनमें कारोबार हो सकता है। नए शेयर खाते में आने तक भाव घटा हुआ और शेयर पुराने जितने ही दिखते हैं, इसलिए portfolio थोड़े समय घाटे में दिख सकता है।

चार्ट पर नकली गिरावट क्यों दिखती है

एक्सचेंज के पुराने आंकड़ों में हर दिन का भाव वैसा ही दर्ज रहता है जैसा उस दिन था — हमारे मान लिए उदाहरण में स्प्लिट से पहले ₹1,000, ex-date से करीब ₹200। कोई चार्ट इन बिना बदले भावों को सीधे एक लाइन में दिखा दे, तो लगेगा कि शेयर एक दिन में 80% गिर गया। 1:1 बोनस में ऐसी ही नकली 50% की गिरावट दिखेगी।

गड़बड़ सिर्फ चार्ट तक नहीं रुकती। 52 हफ्ते का हाई ₹1,000 ही बना रहेगा, और शेयर "हाई से 80% नीचे" दिखेगा। 200 दिन का औसत (पिछले 200 कारोबारी दिनों के बंद भाव का औसत) पुराने ऊंचे भावों से भरा होगा, तो शेयर उससे बहुत नीचे दिखेगा। RSI (भाव की हाल की चाल नापने वाला 0 से 100 का पैमाना) भी उस एक नकली गिरावट से कुछ समय तक बिगड़ा रहता है।

असल में किसी का एक रुपया नहीं डूबा। सही तरीका है पुराने भावों को उसी अनुपात में adjust (समायोजित) करना: ₹10 से ₹2 वाले स्प्लिट में पुराने हर भाव को 5 से भाग दें, 1:1 बोनस में 2 से, 1:2 बोनस में 1.5 से। तब पुराना ₹1,000 चार्ट पर ₹200 दिखेगा और लाइन में अचानक कोई गड्ढा नहीं दिखेगा।

सबसे बड़ी गलतफहमी

"बोनस मिला तो मुफ्त पैसा मिला" — गलत। शेयर बिना पैसे के मिले, पर पैसा नहीं मिला। 20 शेयर × ₹500 उतना ही है जितना 10 शेयर × ₹1,000। कंपनी भी वही है, बस ज्यादा टुकड़ों में बंट गई।

"स्प्लिट के बाद शेयर सस्ता हो गया" — यह भी गलत। ₹200 का नया शेयर, ₹1,000 वाले पुराने शेयर का पांचवां हिस्सा भर है। कंपनी में आपकी हिस्सेदारी नहीं बदली। कोई शेयर महंगा है या सस्ता, यह एक शेयर के भाव से तय नहीं होता।

"record date से पहले खरीद लो, मुफ्त शेयर मिलेंगे" वाली सोच भी इसी वजह से गलत है — ex-date पर भाव उसी अनुपात में घट जाता है। उसके बाद भाव रोज की तरह ऊपर-नीचे होता है, पर बोनस या स्प्लिट अपने आप में आपकी होल्डिंग में एक रुपया नहीं जोड़ता।

Tejii पर यह कैसे दिखता है

Tejii पर Nifty 500 के हर शेयर का पेज बंद भाव, RSI, 20/50/200 दिन के औसत, 52 हफ्ते की रेंज और पिछले करीब एक साल की सबसे बड़ी गिरावट दिखाता है। बंद भाव आज का असली भाव है; बाकी आंकड़े स्प्लिट और बोनस के हिसाब से समायोजित पुराने भावों से गिने जाते हैं। ऐसे शेयर की गिरावट वाली लाइन में यह लिखा भी होता है।

स्कैनर के "52 हफ्ते के लो के पास" या "200 दिन के औसत से नीचे" जैसे पेज, उद्योग (industry) वाले पेज और गिरावट वाला research पेज भी इन्हीं समायोजित भावों पर चलते हैं। वरना स्प्लिट या बड़ा बोनस करने वाले शेयर गलत लिस्ट में आ बैठते।

एक ईमानदार सीमा: Tejii बोनस को भाव की चाल से पहचानता है, इसलिए बहुत छोटा बोनस (जैसे 1:5, जिसमें भाव करीब 17% ही घटता है) असली गिरावट जैसा दिख सकता है। किसी एक शेयर में बड़ी गिरावट दिखे, तो NSE या BSE की वेबसाइट पर उस कंपनी के corporate actions (बोनस, स्प्लिट, डिविडेंड जैसे फैसले) खुद देख लीजिए।

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