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मार्केट कैप क्या होता है — और large, mid, small cap कैसे तय होते हैं?

मार्केट कैप यानी कंपनी के सारे शेयरों की कुल बाजार कीमत। समझिए large, mid, small cap का मतलब, और क्यों ₹50 का शेयर अपने आप सस्ता नहीं होता।

प्रकाशित 2026-09-15 · अपडेट 2026-10-02 · ⏱ 7 मिनट

एक लाइन में

मार्केट कैप (market capitalisation, हिंदी में बाजार पूंजीकरण) किसी कंपनी के सारे शेयरों की कुल बाजार कीमत होती है। इसका हिसाब सीधा है: शेयर का भाव × कंपनी के कुल शेयरों की संख्या।

यानी आज के भाव पर बाजार पूरी कंपनी को कितने रुपये का मान रहा है। शेयर बाजार में कंपनी को बड़ी, मझोली या छोटी कहने के लिए ज्यादातर इसी का इस्तेमाल होता है।

ध्यान रहे, यह कंपनी की बिक्री, मुनाफा या उसके पास पड़ा पैसा नहीं है। यह सिर्फ शेयरों की कुल कीमत है, जो भाव के साथ रोज बदलती है।

हिसाब एक उदाहरण से

मान लीजिए किसी कंपनी के कुल 10 करोड़ शेयर हैं और आज एक शेयर का भाव ₹200 है। तो उसका मार्केट कैप हुआ 10 करोड़ × ₹200 = ₹2,000 करोड़।

अगले दिन भाव ₹210 हो गया और शेयरों की गिनती वही रही, तो मार्केट कैप ₹2,100 करोड़ हो जाएगा। भाव ₹190 हुआ तो ₹1,900 करोड़। बाजार खुला हो तो यह नंबर हर पल बदलता रहता है।

शेयरों की गिनती भी बदल सकती है। नए शेयर जारी होने से गिनती बढ़ती है, और buyback (कंपनी का अपने ही शेयर वापस खरीदना) से घटती है।

Split (एक शेयर को कई छोटे शेयरों में बांटना) और bonus (शेयरधारकों को मुफ्त अतिरिक्त शेयर) में गिनती बढ़ती है, पर भाव उसी हिसाब से घट जाता है। मान लीजिए 1:1 bonus आया, यानी हर शेयर पर एक शेयर मुफ्त। 10 करोड़ शेयर 20 करोड़ हो गए और भाव ₹200 से करीब ₹100 पर आ गया। मार्केट कैप फिर भी करीब ₹2,000 करोड़ ही रहा। कंपनी वही है, बस टुकड़े ज्यादा हो गए।

₹50 का शेयर अपने आप सस्ता नहीं होता

नए निवेशक को अक्सर ₹50 का शेयर सस्ता और ₹5,000 का शेयर महंगा लगता है। पर अकेला भाव न कंपनी का साइज बताता है, न यह कि शेयर सस्ता है या महंगा।

मान लीजिए कंपनी A के शेयर का भाव ₹50 है और उसके 100 करोड़ शेयर हैं। उसका मार्केट कैप हुआ ₹5,000 करोड़। कंपनी B के शेयर का भाव ₹5,000 है, पर उसके सिर्फ 10 लाख शेयर हैं। उसका मार्केट कैप हुआ ₹500 करोड़।

यानी ₹50 के शेयर वाली कंपनी A, बाजार की नजर में कंपनी B से 10 गुना बड़ी है। उसका भाव छोटा इसलिए है क्योंकि वह ज्यादा टुकड़ों में बंटी है। टुकड़ा छोटा है, कंपनी नहीं।

कंपनी का साइज समझना हो, तो भाव नहीं, मार्केट कैप देखिए। पर शेयर सस्ता है या महंगा, यह न भाव से पता चलता है, न मार्केट कैप से। वह कंपनी की कमाई जैसी बातों से तुलना का अलग विषय है।

Large cap, mid cap, small cap कैसे तय होते हैं

म्यूचुअल फंड के लिए इन शब्दों की परिभाषा SEBI (शेयर बाजार का नियामक) ने तय की है, और यह रुपये की किसी रकम से नहीं, रैंक (क्रम में नंबर) से चलती है। लिस्टेड कंपनियों को full market cap (सारे शेयर गिनकर निकली मार्केट कैप) के हिसाब से बड़ी से छोटी के क्रम में लगाया जाता है। 1 से 100 नंबर तक की कंपनियां large cap, 101 से 250 तक mid cap, और 251 से आगे की सारी small cap कहलाती हैं।

यह list AMFI (म्यूचुअल फंड कंपनियों का संगठन) हर छह महीने में जारी करता है, पिछले छह महीने की औसत full market cap के आधार पर। चूंकि यह रैंक है, large cap बनने की कोई पक्की रकम नहीं होती। हर नई list में 100वें और 250वें नंबर की कंपनी की मार्केट कैप बदल जाती है, और कुछ कंपनियां ऊपर या नीचे की श्रेणी में चली जाती हैं।

NSE का Nifty 500 इंडेक्स (कई शेयरों से बना एक पैमाना) भी मोटे तौर पर ऐसी ही सीढ़ी है। NSE हर छह महीने अपनी शर्तें पूरी करने वाली कंपनियों में से full market cap के हिसाब से ऊपर की 500 चुनता है। मोटे तौर पर पहली 100 Nifty 100 में आती हैं, 101 से 250 नंबर तक Nifty Midcap 150 में, और 251 से 500 तक Nifty Smallcap 250 में।

यानी Nifty 500 में small cap का सिर्फ ऊपर वाला हिस्सा आता है, पूरा small cap नहीं। NSE और AMFI की lists अलग नियमों से बनती हैं, इसलिए कुछ कंपनियों में थोड़ा फर्क मिल सकता है।

Full market cap और free-float market cap

ऊपर जो हिसाब किया, वह full market cap था। पर सारे शेयर बाजार में खुले तौर पर खरीद-बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं माने जाते।

प्रमोटर (कंपनी पर नियंत्रण रखने वाला मालिक समूह) के शेयर और ऐसी कुछ दूसरी हिस्सेदारी आम तौर पर रोज की खरीद-बिक्री में नहीं आती। बाकी जो शेयर बाजार में खुले तौर पर खरीदे-बेचे जा सकते हैं, उन्हें free float कहते हैं। उनकी कुल कीमत free-float market cap है।

पहले वाले उदाहरण में मान लीजिए 10 करोड़ में से 6 करोड़ शेयर प्रमोटर के पास हैं। तो free float 4 करोड़ शेयर हुआ। ₹200 के भाव पर full market cap ₹2,000 करोड़ है, पर free-float market cap सिर्फ ₹800 करोड़।

Nifty 50 और Nifty 500 जैसे NSE के इंडेक्स में किसी शेयर का वजन (इंडेक्स में उसका हिस्सा) free-float market cap से तय होता है। इसलिए दो कंपनियों की full market cap बराबर हो, तो ज्यादा प्रमोटर हिस्सेदारी वाली कंपनी का वजन आम तौर पर कम होगा। पर large, mid, small cap की list full market cap से ही बनती है।

सबसे बड़ी गलतफहमी

सबसे बड़ी गलतफहमी है साइज को भविष्य समझ लेना। पहला रूप: "मार्केट कैप बड़ा है, तो कोई जोखिम नहीं।" यह गलत है। मार्केट कैप सिर्फ साइज बताता है। कंपनी अच्छी है, सुरक्षित है, या उसका शेयर नहीं गिरेगा, यह इससे पता नहीं चलता।

बड़ी कंपनियों के शेयर भी गिरते हैं, कभी-कभी काफी ज्यादा, और जिस दिन भाव गिरता है उसी दिन मार्केट कैप भी घट जाता है। छोटी कंपनियों के शेयरों में आम तौर पर ज्यादा उतार-चढ़ाव देखा गया है, पर किसी भी साइज की कंपनी में जोखिम शून्य नहीं होता।

दूसरा रूप: "छोटी कंपनी है, तो जल्दी बड़ी हो जाएगी।" यह भी गलत है। Small cap होना बढ़ने का वादा नहीं है। कुछ छोटी कंपनियां बड़ी बनती हैं, पर बहुत सी सालों तक छोटी रहती हैं या और छोटी हो जाती हैं।

मार्केट कैप बताता है कि आज कंपनी कितनी बड़ी गिनी जा रही है। कल वह कितनी बड़ी होगी, यह कोई नंबर नहीं बताता।

Tejii पर इससे जुड़ी चीजें

Tejii पर Nifty 500 के हर शेयर का अपना पेज है, जहां बंद भाव (close), RSI (हाल के भाव की तेजी-मंदी नापने वाला एक पैमाना), 20, 50 और 200 दिन के औसत, 52 हफ्ते की रेंज और पिछले साल की सबसे बड़ी गिरावट दिखती है। मार्केट कैप का नंबर इन पेजों पर नहीं है; वह NSE की वेबसाइट पर कंपनी के quote पेज पर मिलता है।

पिछले साल की गिरावट वाले research पेज पर पुराने भाव split और bonus के हिसाब से adjust किए गए हैं, यानी नई शेयर गिनती के हिसाब से बदले गए हैं। वजह वही है जो हमने ऊपर समझी: 1:1 bonus के बाद भाव आधा होना मार्केट कैप आधा होना नहीं है, इसलिए उसे गिरावट नहीं गिना जाता।

Scanner की lists (जैसे "RSI 30 से नीचे" या "52 हफ्ते के लो के पास") और industry पेजों पर बड़ी और छोटी कंपनियां साथ दिख सकती हैं। किसी list में नाम आना न कंपनी का साइज बताता है, न खरीदने-बेचने का इशारा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मार्केट कैप कैसे निकालें?

फॉर्मूला सीधा है: शेयर का भाव × कंपनी के कुल शेयरों की संख्या। मान लीजिए एक काल्पनिक कंपनी के 5 करोड़ शेयर हैं और भाव ₹400 है, तो मार्केट कैप हुआ 5 करोड़ × ₹400 = ₹2,000 करोड़। बाजार खुला हो तो भाव हर पल बदलता है, इसलिए मार्केट कैप भी बदलता रहता है। शेयरों की गिनती नए शेयर, buyback, bonus या split से बदलती है।

Large cap, mid cap और small cap कितने करोड़ के होते हैं?

कोई तय रकम नहीं है, परिभाषा रैंक से चलती है: full market cap (सारे शेयर गिनकर) में 1 से 100 नंबर large cap, 101 से 250 mid cap, 251 से आगे small cap। जनवरी-जून 2026 वाली AMFI list में 100वें नंबर की औसत मार्केट कैप करीब ₹1.06 लाख करोड़ थी और 250वें की करीब ₹33,660 करोड़। जुलाई-दिसंबर 2025 वाली list में ये करीब ₹1.05 लाख करोड़ और ₹34,760 करोड़ थे।

Large, mid और small cap की list कौन बनाता है और कब बदलती है?

यह list AMFI (म्यूचुअल फंड कंपनियों का संगठन) बनाता है। रैंक वाली परिभाषा SEBI के 6 अक्टूबर 2017 के सर्कुलर की है, और 20 मार्च 2026 के master circular (म्यूचुअल फंड के सारे नियमों का संग्रह) में भी यही है। list साल में दो बार बदलती है, जून और दिसंबर के आखिर तक के डेटा पर। फिर जरूरत हो तो फंड को एक महीने में अपने शेयर बदलने होते हैं।

Free float market cap क्या होता है?

कंपनी के सारे शेयरों की कीमत full market cap है। उसमें से प्रमोटर (कंपनी पर नियंत्रण रखने वाला मालिक समूह) जैसी हिस्सेदारी हटा दें, तो जो शेयर बाजार में खुले तौर पर खरीदे-बेचे जाते हैं, सिर्फ उनकी कीमत free-float market cap है। मान लीजिए एक काल्पनिक कंपनी की full market cap ₹1,000 करोड़ है और 60% शेयर प्रमोटर के पास हैं, तो free-float market cap करीब ₹400 करोड़ है।

मार्केट कैप और शेयर प्राइस में क्या फर्क है?

शेयर प्राइस एक टुकड़े की कीमत है, मार्केट कैप सारे टुकड़ों की कुल कीमत। इसलिए ₹50 के भाव वाली कंपनी, ₹5,000 के भाव वाली कंपनी से बड़ी हो सकती है, अगर उसके शेयर कहीं ज्यादा हैं। दो कंपनियों का साइज भाव से नहीं, मार्केट कैप से मिलाइए। पर इन दोनों में से कोई भी यह नहीं बताता कि शेयर सस्ता है या महंगा।

मार्केट कैप बढ़ने का क्या मतलब है?

ज्यादातर इसका मतलब है कि शेयर का भाव बढ़ा। नए शेयर जारी होने से भी मार्केट कैप बढ़ सकता है, जबकि bonus या split से वह अपने आप नहीं बदलता। मार्केट कैप ₹100 करोड़ बढ़ा, तो इसका मतलब यह नहीं कि कंपनी के खाते में ₹100 करोड़ आ गए या उसने इतना मुनाफा कमाया। बस उस भाव पर सारे शेयरों की कुल कीमत इतनी बढ़ गई।

किसी कंपनी का मार्केट कैप कहां देखें?

NSE की वेबसाइट पर कंपनी के quote पेज में Total Market Cap और Free Float Market Cap, दोनों करोड़ रुपये में दिखते हैं। कई ब्रोकर ऐप भी मार्केट कैप दिखाते हैं। कौन सी कंपनी large, mid या small cap गिनी जाती है, वह list AMFI की वेबसाइट पर मिलती है। Tejii के शेयर पेजों पर मार्केट कैप नहीं दिखाया जाता।

क्या large cap शेयर में पैसा लगाना सुरक्षित होता है?

Large cap होना सिर्फ इतना बताता है कि रैंक में कंपनी ऊपर की 100 में है। ऐसे शेयर भी गिरते हैं, कभी-कभी काफी ज्यादा। Small cap में आम तौर पर ज्यादा उतार-चढ़ाव देखा गया है, पर जोखिम किसी साइज में शून्य नहीं होता। Tejii यह नहीं बताता कि किस साइज की कंपनी में पैसा लगाएं। आपके लिए क्या ठीक है, यह SEBI-registered investment adviser बता सकता है।

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