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मूविंग एवरेज क्या है — 20, 50 और 200 दिन का औसत आसान भाषा में

मूविंग एवरेज पिछले कुछ दिनों के भाव का औसत है, जो हर दिन एक कदम आगे खिसकता है। जानिए यह क्या बताता है और क्या नहीं।

प्रकाशित 2026-09-15 · ⏱ 6 मिनट

एक लाइन में

मूविंग एवरेज (moving average) किसी शेयर के पिछले कुछ दिनों के भाव का औसत है — आमतौर पर बंद भाव (closing price) का। हर नए दिन सबसे पुराने दिन का भाव गिनती से हट जाता है और आज का भाव जुड़ जाता है, इसलिए इसे "मूविंग" यानी खिसकने वाला औसत कहते हैं।

यह आगे का भाव नहीं बताता। यह सिर्फ बीते दिनों के भावों को एक चिकनी लाइन में बदल देता है, ताकि रोज की उछल-कूद के बीच मोटे तौर पर दिशा दिख सके।

हिसाब कैसे लगता है: 5 दिन का उदाहरण

मान लीजिए किसी शेयर का भाव लगातार पांच दिन इस तरह बंद हुआ: ₹100, ₹102, ₹98, ₹104 और ₹106।

पांचों को जोड़िए: 100 + 102 + 98 + 104 + 106 = 510। अब 5 से भाग दीजिए: 510 ÷ 5 = 102। यानी 5 दिन का सिंपल मूविंग एवरेज (SMA, सीधा औसत) ₹102 है।

अब मान लीजिए छठे दिन भाव ₹110 पर बंद हुआ। पहले दिन का ₹100 हट जाएगा और ₹110 जुड़ जाएगा: 102 + 98 + 104 + 106 + 110 = 520, और 520 ÷ 5 = 104। औसत ₹102 से खिसककर ₹104 हो गया। गिनती हमेशा आखिरी 5 दिनों की होती है — यही "मूविंग" है।

इस सीधे तरीके में हर दिन का वजन बराबर है। दूसरा तरीका EMA (exponential moving average) है। इसमें हाल के दिनों को ज्यादा वजन मिलता है, और दिन जितना पुराना, उसका वजन उतना कम। इसलिए भाव बदलने पर EMA थोड़ा जल्दी मुड़ता है। फिर भी वह भाव से पीछे ही रहता है, क्योंकि वह भी बीते भावों से ही बनता है। एक ही शेयर का 50 दिन का SMA और EMA अलग-अलग नंबर दिखा सकते हैं, इसलिए चार्ट पर देख लीजिए कि लाइन कौन-सी है।

20, 50 और 200 दिन — कितना समय

यहां "दिन" का मतलब कैलेंडर के दिन नहीं, कारोबारी दिन (trading days) है — यानी जिन दिनों बाजार खुला रहा। शनिवार, रविवार और शेयर बाजार की छुट्टियां नहीं गिनी जातीं। भारत में साल में करीब 245 से 250 कारोबारी दिन होते हैं।

20 दिन का औसत लगभग एक महीने (करीब 4 हफ्ते) का भाव समेटता है। 50 दिन का औसत करीब 10 हफ्ते का, यानी ढाई महीने से थोड़ा कम। 200 दिन का औसत करीब 9 से 10 महीने का — पूरा एक साल नहीं, जैसा अक्सर मान लिया जाता है।

दिन जितने ज्यादा, लाइन उतनी धीमी। 20 दिन वाली लाइन कुछ ही दिनों की चाल से मुड़ सकती है। 200 दिन वाली लाइन में हर दिन का वजन 200 में से 1 है, इसलिए एक-दो हफ्ते की तेज गिरावट या उछाल से वह थोड़ा ही हिलती है।

जिस शेयर के अभी 200 कारोबारी दिनों के भाव ही नहीं हैं, जैसे हाल में लिस्ट हुई कंपनी, उसका 200 दिन का औसत बन ही नहीं सकता।

"भाव 200 दिन के औसत से ऊपर है" — इसका सीधा मतलब

इसका मतलब सिर्फ इतना है: आज का बंद भाव पिछले 200 कारोबारी दिनों के बंद भावों के औसत से ज्यादा है। "नीचे है" का मतलब इसका उल्टा।

मान लीजिए किसी शेयर का 200 दिन का औसत ₹500 है और आज भाव ₹520 पर बंद हुआ। तो भाव औसत से ₹20 ऊपर है, यानी 4% ऊपर। अगर भाव ₹480 पर बंद होता, तो ₹20 यानी 4% नीचे। बस, इतनी ही बात है।

यह एक तुलना है, फैसला नहीं। इससे यह पता नहीं चलता कि कंपनी अच्छी है या बुरी, शेयर सस्ता है या महंगा, या आगे भाव किधर जाएगा।

Golden cross और death cross

जब छोटी अवधि का औसत (आमतौर पर 50 दिन वाला) लंबी अवधि के औसत (आमतौर पर 200 दिन वाले) को नीचे से ऊपर काटता है, तो इसे golden cross कहते हैं। जब 50 दिन वाला औसत 200 दिन वाले को ऊपर से नीचे काटता है, तो इसे death cross कहते हैं।

नाम भारी लगते हैं, पर ये बस दो लाइनों के एक-दूसरे को काटने के नाम हैं। इनसे यह तय नहीं होता कि भाव आगे किधर जाएगा।

वजह सीधी है: दोनों लाइनें बीते भावों से बनती हैं, इसलिए ये हमेशा भाव से पीछे चलती हैं। इसे lag यानी देरी कहते हैं। जब तक 50 दिन वाली लाइन 200 दिन वाली को काटती है, तब तक भाव की चाल का बड़ा हिस्सा अक्सर पहले ही हो चुका होता है।

और जब भाव किसी साफ दिशा में नहीं चल रहा होता, तो ये लाइनें बार-बार एक-दूसरे को काट सकती हैं — कुछ ही हफ्तों में golden cross के बाद death cross भी बन सकता है। ऐसे बार-बार पलटते इशारों को whipsaw कहा जाता है।

सबसे बड़ी गलतफहमी

"भाव 200 दिन के औसत तक आ गया, अब यहां से नहीं गिरेगा।" या "औसत के ऊपर गया तो खरीदो, नीचे गया तो बेचो।" ये दोनों बातें गलत हैं।

औसत कोई फर्श (support) या छत (resistance) नहीं है। यह बीते भावों से निकला एक हिसाब भर है। भाव इस लाइन को छूकर पलट भी सकता है, इसे पार करके आगे भी जा सकता है, और महीनों तक इसके ऊपर या नीचे भी रह सकता है। लाइन भाव को नहीं रोकती — उल्टा, भाव ही लाइन को अपनी तरफ खींचता है।

कभी-कभी भाव इस लाइन के पास रुकता दिखता है, और लोग वही मौके याद रखते हैं। जिन दिनों भाव बिना रुके इसे पार कर गया, वे भुला दिए जाते हैं। कोई भी लाइन अपने आप में खरीदने या बेचने का बटन नहीं है।

Tejii पर यह कहां दिखता है

Nifty 500 के हर शेयर के पेज पर बंद भाव, RSI (हाल में भाव की चाल की रफ्तार का 0 से 100 का पैमाना), 52 हफ्ते की रेंज और पिछले एक साल की सबसे बड़ी गिरावट दिखती है। वहीं यह भी लिखा होता है कि भाव अपने 20, 50 और 200 दिन के औसत में से कितनों से ऊपर है। ये औसत SMA हैं और बंद भाव से बनते हैं।

यहां पुराने भाव split और bonus के हिसाब से adjust किए जाते हैं, यानी उसी अनुपात में बदल दिए जाते हैं। क्यों जरूरी है: मान लीजिए ₹1,000 के एक शेयर का split हुआ और एक शेयर के पांच शेयर बन गए, तो भाव लगभग ₹200 हो जाएगा। बिना adjust किए पुराना औसत ₹1,000 के आसपास वाले भावों से भरा रहता, और आज का ₹200 उससे बहुत नीचे दिखता। जबकि निवेशक की कुल रकम वही है: 5 शेयर × ₹200 = ₹1,000। बहुत छोटे bonus के कुछ मामले इस तरीके से पकड़ में नहीं आते।

स्कैनर का "200 दिन के औसत से नीचे" वाला पेज उन शेयरों की सूची है जिनका ताजा बंद भाव अपने 200 दिन के औसत से कम है। वहां हर शेयर का 200 दिन का औसत भी दिखता है। यह सिर्फ एक शर्त पर छांटी गई सूची है — न खरीदने की, न बेचने की।

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