बाजार गिर रहा है — अब क्या करें?
इसका एक जवाब सबके लिए नहीं है। यहां वह है जो फैसले से पहले जानने लायक है: पिछली गिरावटें कितनी गहरी थीं, घबराकर बेचने पर क्या होता है, और गिरावट कब ज्यादा भारी पड़ती है।
पहले एक सच
गिरावट कोई दुर्घटना नहीं है। यह बाजार का सामान्य हिस्सा है।
NISM (SEBI का बनाया संस्थान) के 16 जुलाई 2026 के लेख में निफ्टी 50 की करीब 30 साल की आठ बड़ी गिरावटें हैं: 24% से 60% तक। सबसे नीचे से पुराने ऊंचे स्तर तक लौटने में 138 से 773 दिन लगे।
जो भी आज निवेश करके अच्छा कमा रहा है, वो कई गिरावटों से गुजर चुका है।
घबराकर बेचने पर क्या होता है
कई लोग घबराकर बेच देते हैं।
जब तक आप बेचते नहीं, नुकसान कागज पर है; बेचते ही पक्का हो जाता है। भाव लौटेगा, इसकी गारंटी नहीं।
और इससे भी बुरा — जो लोग नीचे बेचते हैं, वो अक्सर वापस तब आते हैं जब भाव फिर ऊपर जा चुका होता है। यानी महंगा खरीदा, सस्ता बेचा।
गिरावट के बीच चार बातें
रोज भाव देखने से भाव नहीं बदलता, घबराहट बढ़ सकती है; कुछ लोग इसीलिए ऐप कम खोलते हैं।
चालू SIP में गिरे भाव पर ज्यादा यूनिट आती हैं; भाव और गिरे, तो इनकी कीमत भी घटती है।
खुद से एक सवाल पूछिए — क्या कंपनी में कुछ बुरा हुआ है, या सिर्फ भाव गिरा है? कई बार सिर्फ भाव गिरता है, पर हर बार नहीं।
जिस पैसे की जरूरत कई साल बाद है, उसे गिरे भाव पर निकालने की मजबूरी नहीं होती।
जब गिरावट ज्यादा भारी पड़ती है
जो पैसा जल्दी चाहिए, उसे गिरे भाव पर निकालना पड़ सकता है। NISM के उसी लेख के मुताबिक हाथ में नकद हो तो मजबूरी में बेचने से बचा जा सकता है।
कर्ज लेकर लगाए पैसे पर भाव गिरे तब भी ब्याज चलता रहता है; नुकसान के ऊपर ब्याज जुड़ता है।
सारा पैसा एक ही कंपनी में हो, तो उसकी गिरावट पूरी रकम पर पड़ती है; बंटे पैसे पर उतनी नहीं।
आखिरी बात
गिरावट में सबसे ज्यादा फर्क आपके व्यवहार से पड़ता है, आपकी जानकारी से नहीं।
Tejii यह नहीं बताता कि गिरावट में बेचें, खरीदें या रुके रहें; यह फैसला आपका है।