F&O (फ्यूचर और ऑप्शन) क्या है — थोड़े पैसे से बड़ा सौदा, और SEBI की गिनती में 87.7% लोग नुकसान में
F&O क्या है: futures और options आगे की तारीख के सौदे हैं। lot, margin, premium और expiry का मतलब, और SEBI की स्टडी जिसमें 2025-26 में 87.7% लोग नुकसान में रहे।
एक लाइन में
F&O यानी futures और options: ऐसे सौदे (contracts) जिनमें भाव आज तय होता है और हिसाब आगे की किसी तय तारीख पर। इनकी कीमत किसी शेयर या इंडेक्स के भाव से निकलती है, इसीलिए इन्हें derivatives (किसी और चीज के भाव से बनने वाले सौदे) कहते हैं।
शेयर को आप जब तक चाहें रख सकते हैं। F&O के हर contract की एक आखिरी तारीख होती है, जिसे expiry कहते हैं। दूसरा फर्क: यहां थोड़े पैसे से बड़ी रकम का सौदा होता है, इसलिए नफा और नुकसान दोनों कई गुना तेज चलते हैं।
SEBI (बाजार का नियामक) की 20 अगस्त 2026 की स्टडी के मुताबिक 2025-26 में F&O में अपने नाम से सौदे करने वाले लोगों में से 87.7% को नुकसान हुआ। Tejii F&O में सौदा करना नहीं सिखाता और कोई रणनीति नहीं बताता; यह लेख सिर्फ समझाता है कि ये सौदे क्या हैं और आंकड़े क्या कहते हैं।
Future क्या है: एक काल्पनिक उदाहरण
Future (वायदा सौदा) एक पक्का वादा है: आज तय हुए भाव पर, आगे की तय तारीख को खरीदना या बेचना। खरीदने वाला और बेचने वाला, दोनों इससे बंधे होते हैं।
मान लीजिए एक काल्पनिक इंडेक्स 20,000 पर है और उसके future का एक lot (एक contract में तय गिनती) 75 का है। एक contract की कीमत हुई 20,000 × 75 = ₹15 लाख। पर पूरे ₹15 लाख नहीं देने पड़ते; ब्रोकर एक हिस्सा जमानत के तौर पर रखवाता है, जिसे margin कहते हैं। मान लीजिए यह ₹2 लाख है।
अब इंडेक्स 2% गिरकर 19,600 पर आ जाता है। खरीदने वाले का नुकसान हुआ 400 × 75 = ₹30,000। इंडेक्स सिर्फ 2% हिला, पर लगाए हुए ₹2 लाख का 15% चला गया। इसे leverage (थोड़े पैसे से बड़ा सौदा) कहते हैं, और यह दोनों तरफ बराबर काम करता है।
यह हिसाब expiry तक रुका नहीं रहता। NSE Clearing (हिसाब निपटाने वाली संस्था) हर कारोबारी दिन के आखिर में नफा-नुकसान गिनता है, जिसे mark-to-market कहते हैं, और रकम अगले कारोबारी दिन खाते में जुड़ती या कटती है। margin कम पड़े तो और पैसा डालना होता है; तेज चाल में नुकसान जमा margin से ज्यादा भी हो सकता है।
Option क्या है: call, put और premium
Option में खरीदने वाले को हक मिलता है, मजबूरी नहीं। Call option तय भाव पर खरीदने का हक है, put option तय भाव पर बेचने का। इस तय भाव को strike price कहते हैं, और हक की कीमत को premium। NSE पर यह हक सिर्फ expiry के दिन इस्तेमाल होता है (European style)।
वही काल्पनिक इंडेक्स, 20,000 पर। कोई 20,200 strike का call ₹100 premium पर खरीदता है। lot 75 का है, तो उसने ₹7,500 दिए। expiry के दिन इंडेक्स 20,200 या उससे नीचे बंद हुआ, तो यह हक किसी काम का नहीं और पूरे ₹7,500 गए।
इंडेक्स 20,250 पर बंद हुआ, तो उसे 50 × 75 = ₹3,750 मिलेंगे। इंडेक्स 1.25% चढ़ा, अंदाजा सही निकला, फिर भी ₹3,750 का नुकसान। बराबरी के लिए ही 20,300 चाहिए था। बाकी बातें वही रहें, तो भी expiry पास आने के साथ premium का एक हिस्सा घटता जाता है।
बेचने वाले (option seller) का हिसाब उल्टा है। उसे premium मिलता है, बदले में वह हक निभाने की जिम्मेदारी लेता है, इसलिए उससे margin लिया जाता है। खरीदने वाले का नुकसान premium पर रुक जाता है; बेचने वाले का नुकसान मिले हुए premium से कई गुना हो सकता है।
Lot size, contract value और margin
F&O में एक-एक शेयर का सौदा नहीं होता। हर contract एक तय गिनती का होता है, जिसे lot size कहते हैं, और भाव × lot से contract value बनती है। SEBI के 1 अक्टूबर 2024 के सर्कुलर के मुताबिक इंडेक्स का नया contract शुरू में कम से कम ₹15 लाख का होना चाहिए; पहले यह हद ₹5 से ₹10 लाख थी।
इंडेक्स का स्तर बदलने पर contract value बदलती है, इसलिए exchange (NSE और BSE) lot बदलते रहते हैं। NSE ने 3 अक्टूबर 2025 के सर्कुलर में Nifty 50 का lot 75 से घटाकर 65 और Bank Nifty का 35 से 30 किया, जनवरी 2026 में खत्म होने वाले contracts से। 8 अक्टूबर 2026 तक NSE ने इन दोनों का lot फिर नहीं बदला।
Margin सौदे की कीमत नहीं, जमानत है। future के दोनों तरफ वालों से और option बेचने वाले से ब्रोकर इसे पहले ही लेता है। NSE Clearing इसे SPAN नाम के तरीके से गिनता है और ऊपर से extreme loss margin (बहुत बड़ी चाल के लिए अलग जमानत) जोड़ता है।
Expiry: weekly, monthly, और NSE-BSE के दिन
SEBI के 26 मई 2025 के सर्कुलर के मुताबिक हर exchange अपने F&O की expiry के लिए मंगलवार या गुरुवार में से एक ही दिन रख सकता है। weekly (हर हफ्ते खत्म होने वाले) contracts सिर्फ एक benchmark (मुख्य) इंडेक्स के options पर हो सकते हैं; बाकी सब महीने के आखिरी हफ्ते में खत्म होते हैं।
NSE का दिन मंगलवार है। उसके 25 जून 2025 के सर्कुलर के मुताबिक 1 सितंबर 2025 से Nifty 50 के weekly options हर मंगलवार को खत्म होते हैं, और Bank Nifty समेत सारे इंडेक्स और शेयरों के monthly contracts महीने के आखिरी मंगलवार को; छुट्टी हो तो एक कारोबारी दिन पहले। BSE का दिन गुरुवार है (23 जून 2025 का नोटिस): Sensex के weekly options हर गुरुवार, monthly आखिरी गुरुवार।
इंडेक्स के सौदों का आखिरी हिसाब नकद में होता है। शेयरों के F&O में ऐसा नहीं है: SEBI के 11 अप्रैल 2018 के सर्कुलर से चरणों में शुरू हुई व्यवस्था में expiry तक खुले रहे futures और फायदे में खत्म हुए options का निपटारा असली शेयरों की delivery से होता है। तब margin काफी नहीं रहता; पूरे शेयर या पूरा पैसा चाहिए।
SEBI ने 12 सितंबर 2026 के consultation paper (राय मांगने वाला कागज) में F&O के कारोबार का समय और expiry के दिन आखिरी भाव तय करने का तरीका बदलने के प्रस्ताव रखे हैं। ये अभी प्रस्ताव हैं, नियम नहीं।
SEBI की स्टडी: 2025-26 में 87.7% को नुकसान
SEBI ने 20 अगस्त 2026 को दो स्टडी जारी कीं। पहली सबसे बड़े 15 ब्रोकरों के ग्राहकों के आंकड़ों पर है, जो इस बाजार के करीब 90% individual (अपने नाम से सौदे करने वाले) लोग हैं। इसके मुताबिक 2025-26 में 87.7% को नुकसान हुआ; 2024-25 में यह 90.9% था।
इन लोगों का कुल नुकसान, खर्चे जोड़कर, करीब ₹91,685 करोड़ रहा, यानी औसतन करीब ₹1.17 लाख प्रति व्यक्ति। सौदे करने वाले 98.1 लाख से घटकर 78.6 लाख रह गए, पर औसत नुकसान थोड़ा बढ़ा। ब्रोकरेज, टैक्स और फीस जैसे खर्चों पर ही करीब ₹25,000 करोड़ गए।
नुकसान का करीब 92% options से आया। इंडेक्स options के कारोबार का करीब 59% उन contracts में हुआ जो उसी दिन खत्म हो रहे थे। जिनके डीमैट खाते में शेयर या इक्विटी फंड नहीं थे, या ₹50,000 से कम के थे, उनमें 93% नुकसान में रहे।
उसी स्टडी में खर्चों से पहले का सबसे बड़ा मुनाफा proprietary traders (अपने पैसे से सौदे करने वाली फर्में) का रहा, करीब ₹44,000 करोड़; फिर विदेशी फंडों (FPI) का, करीब ₹14,000 करोड़। इन दोनों का 99% मुनाफा algo (कंप्यूटर प्रोग्राम से ऑर्डर लगाने) वालों ने कमाया।
SEBI की 23 सितंबर 2024 की स्टडी में 2021-22 से 2023-24 के तीन साल में भी 93% लोग नुकसान में थे।
कौन कर सकता है, और अक्टूबर 2024 से SEBI ने क्या बदला
F&O के लिए ब्रोकर के यहां यह segment (बाजार का हिस्सा) अलग से चालू कराना पड़ता है, और SEBI के 3 दिसंबर 2009 के सर्कुलर के मुताबिक ब्रोकर के पास ऐसे ग्राहक की माली हालत का कागजी सबूत होना चाहिए।
1 जुलाई 2023 से ब्रोकर के लिए login पर जोखिम की चेतावनी दिखाना जरूरी हुआ, जो स्क्रीन का कम से कम आधा हिस्सा घेरती है। SEBI के 1 अक्टूबर 2026 के सर्कुलर के मुताबिक 1 नवंबर 2026 से trading app पर एक दिन यह चेतावनी दिखेगी और एक दिन निवेशक-जागरूकता का संदेश।
SEBI ने 1 अक्टूबर 2024 के सर्कुलर में इंडेक्स के F&O पर कई कदम उठाए। ₹15 लाख की हद और एक ही benchmark इंडेक्स पर weekly expiry, दोनों 20 नवंबर 2024 से लागू हुईं। उसी तारीख से, expiry के दिन खत्म हो रहे options बेचने वालों से उस दिन 2% अतिरिक्त margin लिया जाता है।
1 फरवरी 2025 से option खरीदने वाले से पूरा premium पहले लिया जाता है, और expiry के दिन calendar spread (अलग-अलग expiry के उल्टे सौदों पर margin छूट) नहीं मिलती। 5 फरवरी 2026 के सर्कुलर ने यही नियम शेयरों के F&O पर भी लगाया।
Finance Act, 2026 से 1 अप्रैल 2026 को STT (सौदों पर लगने वाला टैक्स) भी बढ़ा: futures बेचने पर 0.05%, और option बेचने पर premium का 0.15%।
असर? SEBI की स्टडी के मुताबिक नवंबर 2024 के कदमों के बाद आम लोगों की भागीदारी घटी, पर वह खुद लिखती है कि इससे कारण और असर का रिश्ता साबित नहीं होता।
सबसे बड़ी गलतफहमी: option खरीदने में जोखिम कम है
सबसे आम सोच: option खरीदने में नुकसान premium तक सीमित है, तो यह सुरक्षित है। पहली बात सही है, नतीजा गलत। सीमित नुकसान का मतलब छोटा नुकसान नहीं; मतलब यह है कि लगाया हुआ पूरा पैसा जा सकता है।
SEBI की दूसरी स्टडी, जो सौदे करने के ढंग पर है, बताती है कि करीब 97% लोग मुख्य रूप से option खरीदने वाले थे। पहली स्टडी में options में नुकसान वालों का हिस्सा 87.7% था और futures में 66%, यानी वहां भी हर तीन में से दो।
दूसरी गलतफहमी: 'अनुभव से ठीक हो जाएगा।' SEBI की दूसरी स्टडी के मुताबिक कई साल से सौदे कर रहे लोगों में भी नुकसान की दर लगभग उतनी ही ऊंची रही। जिन्हें लगातार दो साल नुकसान हुआ और जो फिर भी लगे रहे, उनमें करीब 90% अगले साल फिर नुकसान में थे।
Tejii यह नहीं बताता कि F&O करें या न करें, कौन सा contract लें, या कब लें और कब बेचें। किसी एक व्यक्ति के लिए ऐसी सलाह देना SEBI-registered निवेश सलाहकार का काम है।
Tejii पर इससे जुड़ी चीजें
Tejii पर F&O का कोई आंकड़ा नहीं है: न option chain (हर strike के भाव की तालिका), न open interest (खुले सौदों की गिनती), न lot size या expiry की सूची, न margin का हिसाब। यहां शेयरों के आंकड़े नकद बाजार (cash market) के बंद भावों से बनते हैं।
F&O से जुड़ती चीजें: India VIX का रोज का पन्ना, क्योंकि यह नंबर Nifty 50 के options के भावों से निकलता है। FII-DII का पन्ना सिर्फ cash बाजार की खरीद-बिक्री दिखाता है और वहीं लिखता है कि F&O उसमें शामिल नहीं। होम पेज की ऊपरी पट्टी में NIFTY 50 और BANK NIFTY के स्तर दिखते हैं, उनके futures के भाव नहीं।
Practice पन्ने का नुकसान कैलकुलेटर शेयरों में लगाए पैसे के लिए बना है; F&O के leverage का हिसाब उसमें नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
F&O क्या है, आसान भाषा में?
F&O यानी futures और options: ऐसे सौदे जिनमें भाव आज तय होता है और हिसाब आगे की तय तारीख (expiry) पर। इनकी कीमत किसी शेयर या इंडेक्स के भाव से निकलती है। थोड़े margin या premium से बड़ी रकम का सौदा होता है, इसलिए नफा-नुकसान तेज चलता है। SEBI की 20 अगस्त 2026 की स्टडी में 2025-26 में 87.7% लोग नुकसान में रहे।
फ्यूचर और ऑप्शन में क्या फर्क है?
Future में खरीदने और बेचने वाला, दोनों तय भाव पर सौदा निभाने को बंधे होते हैं, और दोनों margin देते हैं। Option में खरीदने वाला premium देकर सिर्फ हक लेता है, मजबूरी नहीं; उसका नुकसान premium पर रुक जाता है। option बेचने वाले पर जिम्मेदारी होती है, इसलिए वह margin देता है और उसका नुकसान premium से कई गुना हो सकता है।
कॉल और पुट ऑप्शन क्या होता है?
Call option तय भाव (strike price) पर खरीदने का हक है, put option तय भाव पर बेचने का। दोनों में खरीदने वाला premium देता है। NSE पर options European style के हैं, यानी हक सिर्फ expiry के दिन इस्तेमाल होता है; उससे पहले option को बाजार में बेचा जा सकता है। expiry पर हक किसी काम का न रहे, तो पूरा premium चला जाता है।
लॉट साइज क्या है, Nifty का लॉट कितना है?
Lot size वह तय गिनती है जिसमें F&O का एक contract होता है। NSE के 3 अक्टूबर 2025 के सर्कुलर के मुताबिक Nifty 50 का lot 65 और Bank Nifty का 30 है, जनवरी 2026 के contracts से। SEBI के नियम से इंडेक्स का नया contract कम से कम ₹15 लाख का होना चाहिए, इसलिए exchange lot बदलते रहते हैं। ताजा lot NSE की साइट पर देखिए।
Nifty और Bank Nifty की expiry कब होती है?
NSE के 25 जून 2025 के सर्कुलर के मुताबिक 1 सितंबर 2025 से Nifty 50 के weekly options हर मंगलवार को खत्म होते हैं। Nifty 50, Bank Nifty और शेयरों के monthly contracts महीने के आखिरी मंगलवार को; उस दिन छुट्टी हो तो एक कारोबारी दिन पहले। Bank Nifty पर weekly contracts नहीं हैं। BSE पर Sensex की expiry गुरुवार को होती है।
F&O में कितने लोग नुकसान करते हैं? क्या सच में 10 में से 9?
SEBI की 20 अगस्त 2026 की स्टडी के मुताबिक 2025-26 में अपने नाम से F&O करने वालों में 87.7% नुकसान में रहे। कुल नुकसान करीब ₹91,685 करोड़ था, औसतन करीब ₹1.17 लाख प्रति व्यक्ति, और इसका करीब 92% options से आया। 2024-25 में यह हिस्सा 90.9% था, और 2021-22 से 2023-24 के तीन साल की स्टडी में 93%।
F&O बैन क्या होता है?
जब किसी शेयर के F&O में पूरे बाजार के खुले सौदे उसकी तय सीमा (market wide position limit) के 95% से ऊपर चले जाते हैं, तो वह शेयर ban period में आ जाता है। SEBI के 29 मई 2025 के सर्कुलर के मुताबिक 1 अक्टूबर 2025 से, ban में किए सौदों से दिन के आखिर तक खुली position घटनी चाहिए। यह रोक F&O सौदों पर है, नकद बाजार पर नहीं।
F&O पर STT और टैक्स कितना लगता है?
Finance Act, 2026 के बाद 1 अप्रैल 2026 से STT: futures बेचने पर सौदे की कीमत का 0.05%, option बेचने पर premium का 0.15%, और expiry पर exercise हुए option पर 0.15%, जो खरीदने वाला देता है। F&O की कमाई आयकर में non-speculative business income (आम कारोबारी आय) गिनी जाती है। अपने मामले का हिसाब CA से पूछिए; Tejii टैक्स सलाह नहीं देता।