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बैंक निफ्टी क्या है — 14 बैंक, किसका कितना वजन, और एक बैंक इसे कितना हिला सकता है

बैंक निफ्टी क्या है: NSE का 14 बड़े बैंकों वाला इंडेक्स। कौन से बैंक, किसका कितना वजन, 19% की सीमा क्यों लगी, और इसका expiry कब होता है।

प्रकाशित 2026-09-29 · अपडेट 2026-10-02 · ⏱ 10 मिनट

एक लाइन में

बैंक निफ्टी NSE का एक इंडेक्स (कई शेयरों के भाव से बना एक पैमाना) है, जिसमें देश के 14 बड़े और सबसे ज्यादा खरीदे-बेचे जाने वाले बैंक हैं। यह बताता है कि इन बैंकों के शेयर, अपने-अपने वजन के हिसाब से मिलाकर, आज चढ़े या गिरे।

NSE इसका आधिकारिक नाम Nifty Bank लिखता है। F&O (futures और options, यानी आगे की तारीख के सौदे) में इसका symbol BANKNIFTY है, और बोलचाल में इसे बैंक निफ्टी ही कहते हैं। NSE ने इसे 15 सितंबर 2003 को शुरू किया, और 1 जनवरी 2000 के दिन इसका स्तर (base value) 1000 माना।

Tejii यह नहीं बताता कि बैंक निफ्टी आगे चढ़ेगा या गिरेगा, और न इस पर सौदा करने का कोई तरीका। यह लेख सिर्फ यह समझाता है कि यह पैमाना बनता कैसे है।

इसमें कौन से 14 बैंक हैं, और किसका कितना वजन

NSE की 30 सितंबर 2026 की factsheet (इंडेक्स का आधिकारिक ब्योरा) के मुताबिक weight (वजन, यानी इंडेक्स में हिस्सा) के क्रम में ऊपर के दस बैंक ये हैं: HDFC Bank 18.61%, ICICI Bank 14.18%, Kotak Mahindra Bank 10.20%, Axis Bank 10.06%, State Bank of India 9.93%, Federal Bank 6.56%, IndusInd Bank 4.97%, AU Small Finance Bank 4.85%, IDFC First Bank 4.54% और Bank of Baroda 3.59%।

बाकी चार बैंक हैं Punjab National Bank, Canara Bank, Union Bank of India और Yes Bank। ऊपर के दस का वजन जोड़ें तो 87.49% बनता है, यानी इन चारों का मिलाकर करीब 12.5%। 14 में से नौ निजी क्षेत्र के बैंक हैं और पांच सरकारी।

ये वजन रोज बदलते हैं, क्योंकि हर बैंक का भाव अलग चलता है। 31 अगस्त 2026 की factsheet में ऊपर के पांच बैंकों का क्रम इससे अलग था। इसलिए वजन की कोई भी सूची देखें, तो उसकी तारीख जरूर देखें; इंटरनेट पर 12 बैंकों वाली पुरानी सूचियां भी घूमती हैं।

वजन कैसे तय होता है: free float और 19-14-10 की सीमा

किसी बैंक का वजन उसके free-float market cap से तय होता है, यानी उसके उन शेयरों की कुल कीमत जो बाजार में खुलेआम खरीदे-बेचे जा सकते हैं। पर इस इंडेक्स में वजन पर ऊपर से सीमा (cap) भी लगती है, इसीलिए factsheet में इसका तरीका Periodic Capped Free Float लिखा है।

SEBI ने 29 मई 2025 के सर्कुलर में नियम बनाया कि जिस non-benchmark इंडेक्स (Nifty 50 जैसे मुख्य पैमाने के अलावा कोई इंडेक्स) पर F&O चलते हों, उसमें कम से कम 14 शेयर हों, सबसे बड़े का वजन 20% तक हो, ऊपर के तीन का मिलाकर 45% तक, और नीचे वाला हर शेयर अपने से ऊपर वाले से हल्का हो।

NSE ने बैंक निफ्टी के लिए इससे कड़ी सीमा रखी। 1 दिसंबर 2025 को घोषित नए तरीके में सबसे बड़े बैंक का वजन 19%, दूसरे का 14% और तीसरे का 10% तक बांधा गया। जिन बैंकों में F&O सौदे नहीं होते, उनमें से किसी एक का वजन 4.5% और सबका मिलाकर 10% से ऊपर नहीं जा सकता। इससे पहले NSE के नियम में एक शेयर 33% तक और ऊपर के तीन मिलाकर 62% तक जा सकते थे।

factsheet खुद दिखाती है कि ये सीमाएं हर दिन नहीं कसी जातीं। वजन तय होने के बाद भाव बदलते हैं, तो वजन भी खिसकता है। इसीलिए 30 सितंबर 2026 को ICICI Bank 14.18% और Kotak Mahindra Bank 10.20% पर थे, 14% और 10% से थोड़ा ऊपर।

ऊपर के तीन का जोड़ 42.99% था, SEBI की 45% वाली हद के अंदर। SEBI के सर्कुलर में भी exchange को इन शर्तों की जांच हर तिमाही के आखिर में करनी होती है, हर दिन नहीं।

एक काल्पनिक उदाहरण: एक बैंक इंडेक्स को कितना हिला सकता है

मान लीजिए कोई बैंक इंडेक्स 50,000 पर है (सिर्फ समझाने के लिए गोल नंबर)। उसमें सबसे भारी एक काल्पनिक बैंक का वजन 19% है और सबसे हल्के का 2%। किसी दिन बाकी सारे बैंक जहां के तहां रहते हैं और सिर्फ सबसे भारी बैंक 5% गिरता है।

तो इंडेक्स करीब 0.95% गिरेगा (0.19 × 5), यानी लगभग 475 अंक। अगर उसी दिन सिर्फ सबसे हल्का बैंक 5% गिरता, तो इंडेक्स करीब 0.1% यानी 50 अंक ही हिलता। गिरावट दोनों बार 5% की, पर इंडेक्स पर असर करीब दस गुना अलग।

अब यही हिसाब पुराने नियम से कीजिए, जब एक शेयर 33% वजन तक जा सकता था। तब अकेले उस बैंक के 5% गिरने से इंडेक्स करीब 1.65% यानी 825 अंक गिर जाता। SEBI ने 18 अगस्त 2025 के consultation paper (लोगों की राय मांगने वाला कागज) में इस नियम का मकसद यही लिखा है कि F&O वाले ऐसे इंडेक्स गिने-चुने बड़े शेयरों पर टिके न रहें।

कौन अंदर आता है, कौन बाहर होता है

NSE की factsheet के मुताबिक इसमें वही बैंक आ सकता है जो समीक्षा के वक्त Nifty 500 में हो, पिछले छह महीने में कम से कम 90% दिनों में जिसका कारोबार हुआ हो, और जो कम से कम एक महीने से लिस्टेड हो। आखिरी 14 free-float market cap से चुने जाते हैं, और पहली बारी उन बैंकों की आती है जिनमें F&O सौदे चलते हैं।

समीक्षा साल में दो बार होती है, 31 जनवरी और 31 जुलाई तक के छह महीनों के औसत आंकड़ों पर, और बदलाव से चार हफ्ते पहले बाजार को बताया जाता है। 31 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों वाली समीक्षा 30 सितंबर 2026 से लागू हुई; NSE ने 10 अगस्त 2026 की घोषणा में साफ लिखा था कि उसमें Nifty Bank की सूची में कोई बदलाव नहीं है।

पिछला बड़ा बदलाव SEBI के नियम से आया। NSE ने 1 दिसंबर 2025 को बताया कि Union Bank of India और Yes Bank 31 दिसंबर 2025 से इसमें जुड़ेंगे, और बैंक 12 से 14 हो गए। बड़े बैंकों का वजन एक झटके में नहीं घटा: SEBI ने 30 अक्टूबर 2025 के सर्कुलर में इसके लिए 31 मार्च 2026 तक का वक्त दिया, और NSE ने यह दिसंबर 2025 से मार्च 2026 तक, हर महीने के आखिरी कारोबारी दिन, चार किस्तों में किया।

किस्तें इसलिए, क्योंकि इस इंडेक्स की नकल करने वाले index fund और ETF (शेयर की तरह खरीदा-बेचा जाने वाला फंड) को भी अपने शेयर उसी हिसाब से बदलने पड़ते हैं। SEBI के उसी consultation paper के मुताबिक 30 जून 2025 तक Nifty Bank की नकल करने वाले फंडों में करीब ₹34,251 करोड़ लगे थे।

Nifty 50, PSU Bank और Private Bank से फर्क

Nifty 50 में अलग-अलग उद्योगों की 50 कंपनियां हैं, जबकि Nifty Bank में सिर्फ बैंक। NSE की मौजूदा सूची में इन 14 में से पांच, यानी HDFC Bank, ICICI Bank, SBI, Kotak Mahindra Bank और Axis Bank, Nifty 50 में भी हैं। इसलिए बड़े बैंकों की चाल दोनों पैमानों पर असर डालती है, पर बैंक निफ्टी पर कहीं ज्यादा।

NSE की factsheet के मुताबिक 30 सितंबर 2026 तक के एक साल में बैंक निफ्टी का beta 1.15 था। beta बताता है कि कोई इंडेक्स Nifty 50 के मुकाबले औसतन कितना हिला; 1.15 का मतलब, Nifty 50 के 1% चलने पर यह औसतन करीब 1.15% चला। यह बीते साल का आंकड़ा है, आगे का वादा नहीं।

NSE के दो और बैंक इंडेक्स हैं। Nifty PSU Bank में 12 सरकारी बैंक हैं, जिनमें से सिर्फ पांच (SBI, Bank of Baroda, Punjab National Bank, Canara Bank और Union Bank of India) बैंक निफ्टी में आते हैं। उसमें एक शेयर का वजन 33% पर बांधा जाता है, और 30 सितंबर 2026 को SBI 33.33% पर था। Nifty Private Bank में 10 निजी बैंक हैं।

F&O और expiry: क्या तय है, और आंकड़े क्या कहते हैं

बैंक निफ्टी पर NSE में futures और options के सौदे होते हैं। NSE के 25 जून 2025 के सर्कुलर के मुताबिक 1 सितंबर 2025 या उसके बाद वाले BANKNIFTY के monthly और quarterly contracts (महीने और तिमाही में खत्म होने वाले सौदे) की expiry (सौदे के आखिरी हिसाब का दिन) महीने का आखिरी मंगलवार है; पहले यह आखिरी गुरुवार था। उस दिन छुट्टी हो, तो expiry एक कारोबारी दिन पहले होती है।

weekly (हर हफ्ते खत्म होने वाले) contracts इस पर अब नहीं हैं। SEBI के 1 अक्टूबर 2024 के सर्कुलर के बाद 20 नवंबर 2024 से हर एक्सचेंज अपने सिर्फ एक benchmark इंडेक्स पर weekly expiry दे सकता है। NSE पर यह Nifty 50 है, और SEBI अपने 30 अक्टूबर 2025 के सर्कुलर में बैंक निफ्टी को non-benchmark इंडेक्स गिनता है।

SEBI की 20 अगस्त 2026 की स्टडी के मुताबिक 2025-26 में equity F&O में अपने नाम से सौदे करने वाले लोगों (individual traders) में से 87.7% को नुकसान हुआ, और इनके कुल नुकसान का करीब 92% हिस्सा options से आया। यह पूरे equity F&O का आंकड़ा है, सिर्फ बैंक निफ्टी का नहीं। Tejii F&O में सौदा करना नहीं सिखाता, और न expiry के दिन की कोई रणनीति बताता है।

सबसे बड़ी गलतफहमी: बैंक निफ्टी कोई शेयर है जिसे सीधे खरीदा जा सके

'बैंक निफ्टी में पैसा लगाया' सुनकर लगता है कि यह कोई शेयर है। ऐसा नहीं है। यह हिसाब से निकाला गया एक नंबर है, जैसे थर्मामीटर की रीडिंग। इसे सीधे demat खाते में नहीं रखा जा सकता।

इससे जुड़ने के दो ही आम रास्ते हैं। पहला, F&O contracts, जिनका हिसाब तय तारीख पर होता है, और जिनमें सौदा करने वालों के नतीजे ऊपर SEBI की स्टडी में दिखते हैं। दूसरा, index fund या ETF, जो इन्हीं बैंकों को लगभग इन्हीं वजनों में रखकर इंडेक्स की नकल करते हैं।

दूसरे रास्ते में भी पूरा पैसा एक ही सेक्टर में जाता है, इसलिए ब्याज दर जैसी कोई एक बात सारे बैंकों को साथ हिला सकती है। Tejii यह नहीं बताता कि बैंक निफ्टी से जुड़े किसी फंड में पैसा लगाएं या नहीं, या कौन सा फंड लें। किसी एक व्यक्ति के लिए ऐसी सलाह देना SEBI के यहां registered निवेश सलाहकार का काम है।

Tejii पर इससे जुड़ी चीजें

Tejii के होम पेज की सबसे ऊपर वाली पट्टी में NIFTY 50 और NIFTY NEXT 50 के साथ BANK NIFTY का पिछला बंद और बदलाव (%) दिखता है। बाजार खुला हो तो वहां देरी वाला भाव आता है, जिस पर 'देरी से' लिखा रहता है; NSE का पक्का बंद भाव शाम को आता है।

रोज के सेक्टर पन्ने पर NSE के 10 सेक्टर इंडेक्स की उस दिन की चाल है, जिनमें BANK (Nifty Bank) और PSU BANK (Nifty PSU Bank) दोनों हैं। दोनों को साथ देखकर पता चलता है कि किसी दिन सरकारी बैंक बाकी बैंकों से अलग चले या नहीं।

इन 14 बैंकों में से हर एक का Tejii पर अपना पन्ना है: बैंक क्या काम करता है, हफ्ते-महीने-साल की चाल, 52 हफ्ते का ऊंचा-नीचा भाव, 20, 50 और 200 दिन के औसत, और पिछले एक साल की सबसे बड़ी गिरावट। वित्तीय सेवाओं वाले उद्योग पन्ने पर Nifty 500 की सारी बैंक और वित्तीय कंपनियां एक जगह हैं। ये सारे आंकड़े पिछले बंद भाव के हैं, लाइव नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बैंक निफ्टी में कितने बैंक हैं?

NSE की 30 सितंबर 2026 की factsheet के मुताबिक बैंक निफ्टी में 14 बैंक हैं। 31 दिसंबर 2025 से पहले इसमें 12 बैंक थे; SEBI के नए नियम के बाद NSE ने Union Bank of India और Yes Bank को जोड़ा। 30 सितंबर 2026 से लागू छमाही समीक्षा में इसकी सूची नहीं बदली।

बैंक निफ्टी में कौन-कौन से शेयर हैं?

NSE की सूची के मुताबिक 14 बैंक: HDFC Bank, ICICI Bank, Kotak Mahindra Bank, Axis Bank, State Bank of India, Federal Bank, IndusInd Bank, AU Small Finance Bank, IDFC First Bank, Bank of Baroda, Punjab National Bank, Canara Bank, Union Bank of India और Yes Bank। इनमें नौ निजी क्षेत्र के बैंक हैं और पांच सरकारी।

बैंक निफ्टी में सबसे ज्यादा वजन किस बैंक का है?

NSE की 30 सितंबर 2026 की factsheet में सबसे ज्यादा वजन HDFC Bank का था, 18.61%। उसके बाद ICICI Bank (14.18%) और Kotak Mahindra Bank (10.20%) थे। NSE के नियम में सबसे बड़े बैंक का वजन 19% तक बांधा जाता है। वजन रोज भाव के साथ बदलते हैं, इसलिए कोई भी आंकड़ा उसकी तारीख के साथ पढ़ें।

बैंक निफ्टी और निफ्टी 50 में क्या अंतर है?

Nifty 50 में अलग-अलग उद्योगों की 50 बड़ी कंपनियां हैं, बैंक निफ्टी में सिर्फ 14 बैंक। पांच बड़े बैंक दोनों में हैं। NSE पर weekly F&O सिर्फ Nifty 50 पर हैं, बैंक निफ्टी पर monthly और quarterly। NSE के मुताबिक 30 सितंबर 2026 तक के एक साल में बैंक निफ्टी का beta 1.15 रहा, यानी यह औसतन Nifty 50 से कुछ ज्यादा हिला।

बैंक निफ्टी का expiry कब होता है? weekly expiry क्यों बंद हुई?

NSE के 25 जून 2025 के सर्कुलर के मुताबिक 1 सितंबर 2025 से बैंक निफ्टी के monthly और quarterly contracts महीने के आखिरी मंगलवार को खत्म (expire) होते हैं; उस दिन छुट्टी हो तो एक कारोबारी दिन पहले। SEBI के नियम से 20 नवंबर 2024 से हर एक्सचेंज सिर्फ एक benchmark इंडेक्स पर weekly expiry दे सकता है, और NSE पर वह Nifty 50 है।

बैंक निफ्टी कब शुरू हुआ, इसकी base value क्या है?

NSE की factsheet के मुताबिक Nifty Bank 15 सितंबर 2003 को शुरू (launch) हुआ। इसकी base date 1 जनवरी 2000 है और उस दिन का स्तर 1000 माना गया। आज का स्तर इसी 1000 से तुलना करके पढ़ा जाता है। NSE इसे बाजार के घंटों में हर पल गिनता है और हर छह महीने इसकी समीक्षा करता है।

बैंक निफ्टी में नए बैंक कब जुड़ते या हटते हैं?

NSE साल में दो बार समीक्षा करता है, 31 जनवरी और 31 जुलाई तक के छह महीने के आंकड़ों पर, और बदलाव से चार हफ्ते पहले बताता है। बैंक का Nifty 500 में होना, छह महीने में कम से कम 90% दिन कारोबार और एक महीने की लिस्टिंग जरूरी है। 30 सितंबर 2026 से लागू समीक्षा में कोई बदलाव नहीं हुआ।

बैंक निफ्टी में निवेश कैसे करें?

बैंक निफ्टी कोई शेयर नहीं, एक इंडेक्स है, इसलिए इसे सीधे नहीं खरीदा जा सकता। इसकी नकल करने वाले index fund और ETF होते हैं, और इस पर F&O सौदे भी होते हैं। Tejii यह नहीं बताता कि इसमें पैसा लगाएं या कौन सा फंड चुनें; किसी एक व्यक्ति के लिए यह सलाह SEBI-registered निवेश सलाहकार का काम है।

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