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शेयर बेचने पर टैक्स कितना लगता है — 2026-27 की दरें, छूट और नियम

12 महीने के अंदर बेचा तो मुनाफे पर 20%, ज्यादा रखकर बेचा तो साल में ₹1.25 लाख से ऊपर के मुनाफे पर 12.5%। STT, डिविडेंड और नुकसान के नियम भी।

प्रकाशित 2026-09-25 · ⏱ 7 मिनट

एक लाइन में

शेयर खरीदने के 12 महीने के अंदर बेच दिया, तो मुनाफे पर 20% टैक्स लगता है। 12 महीने से ज्यादा रखकर बेचा, तो एक साल में ₹1.25 लाख तक का मुनाफा टैक्स-फ्री है, उससे ऊपर के हिस्से पर 12.5%। पहले को short-term capital gain (STCG, कम समय का मुनाफा), दूसरे को long-term capital gain (LTCG, लंबे समय का मुनाफा) कहते हैं।

ये दरें उन शेयरों पर लगती हैं जो NSE या BSE जैसे मान्यता प्राप्त एक्सचेंज पर लिस्टेड हैं और जिनके सौदे पर STT (Securities Transaction Tax) लगा हो। इन दरों के ऊपर 4% health and education cess (उपकर) जुड़ता है, और बहुत ऊंची आमदनी वालों पर surcharge (ऊपरी भार) भी — इन दोनों मुनाफों पर surcharge 15% से ज्यादा नहीं जाता। सबसे जरूरी बात: टैक्स सिर्फ मुनाफे पर लगता है, बेचने से मिली पूरी रकम पर नहीं।

1 अप्रैल 2026 से नया कानून, Income-tax Act, 2025 लागू है। इसमें assessment year और previous year की जगह अब एक ही शब्द है, tax year — यानी 1 अप्रैल से 31 मार्च तक का वही साल। नया टैक्स इसने नहीं लगाया, दरें वही हैं। धारा के नंबर बदले हैं: पुरानी 111A अब 196 है, और 112A अब 198।

12 महीने की लकीर कैसे गिनी जाती है

गिनती खरीदने की तारीख से शुरू होकर बेचने की तारीख पर खत्म होती है। 12 महीने से एक दिन भी ज्यादा हुआ, तो मुनाफा long-term। ठीक 12 महीने या उससे कम, तो short-term।

हर खरीद अलग गिनी जाती है। मान लीजिए जनवरी 2025 में किसी कंपनी के 100 शेयर खरीदे, मार्च 2026 में 100 और, और अगस्त 2026 में 100 बेच दिए। बिके कौन से माने जाएंगे, जनवरी वाले या मार्च वाले? इसी से दर तय होगी।

जवाब पहले से तय है, चुनने का विकल्प आपके पास नहीं होता। डीमैट खाते में जो शेयर पहले आए, वही पहले बिके माने जाते हैं। इसे FIFO (first in, first out — पहले आया, पहले गया) कहते हैं। ऊपर के उदाहरण में जनवरी 2025 वाले शेयर बिके माने जाएंगे, यानी मुनाफा long-term।

एक बारीकी जरूरी है। आयकर विभाग के 24 जून 1998 के सर्कुलर के मुताबिक FIFO हर डीमैट खाते के अंदर अलग लगता है, सारे खातों को जोड़कर नहीं।

दरें और ₹1.25 लाख की छूट — असल में मतलब क्या है

Short-term का 20% एक तय दर है। आपकी बाकी आमदनी किस slab (आमदनी के हिसाब से बनी टैक्स की सीढ़ी) में आती है, इससे यह नहीं बदलती। एक रियायत है: भारत में रहने वाले जिस व्यक्ति की बाकी आमदनी basic exemption limit (जितनी आमदनी पर टैक्स लगता ही नहीं) से कम रह जाती है, वह बची सीमा इस मुनाफे में से घटा सकता है।

₹1.25 लाख की छूट पूरे साल की एक सीमा है। साल भर में लिस्टेड शेयरों और equity mutual fund (शेयरों में पैसा लगाने वाला म्यूचुअल फंड) से हुआ सारा long-term मुनाफा जोड़ा जाता है, उसमें से ₹1.25 लाख घटता है, बाकी पर 12.5% लगता है।

ये दरें 23 जुलाई 2024 को बदली थीं। उससे पहले short-term पर 15%, long-term पर 10% और छूट ₹1 लाख थी। 1 फरवरी 2026 के बजट में तीनों जस के तस रखे गए, इसलिए 2026-27 में भी यही नंबर हैं।

STT अलग चीज है, और वह टैक्स घटाता भी नहीं

STT हर सौदे पर लगता है, चाहे मुनाफा हुआ हो या नुकसान। Delivery वाले सौदे में, जिसमें शेयर डीमैट खाते में आते हैं, खरीदने और बेचने दोनों तरफ सौदे की कीमत का 0.1%। Intraday में, यानी जिस दिन खरीदा उसी दिन बेच देने पर, सिर्फ बेचने पर 0.025%। F&O (futures और options, यानी डेरिवेटिव सौदे) की दरें 1 अप्रैल 2026 से बढ़ी हैं — futures बेचने पर 0.05%, option बेचने पर premium का 0.15%। यह रकम contract note (सौदे की रसीद) में अलग दिखती है।

लोग अक्सर इसे capital gains tax समझ लेते हैं। दोनों अलग हैं। STT सौदे पर लगता है और अपने आप कट जाता है, जबकि capital gains tax मुनाफे पर लगता है और उसका हिसाब आपको खुद अपने ITR (income tax return, सालाना टैक्स रिटर्न) में देना होता है।

एक बात कम लोग जानते हैं: capital gains निकालते समय STT को खर्च में घटाया नहीं जा सकता, कानून इसकी साफ मनाही करता है। हां, खरीदने-बेचने से सीधे जुड़ा खर्च, जैसे brokerage (ब्रोकर का कमीशन), मुनाफे में से घटता है।

नुकसान हुआ तो क्या होता है

Short-term नुकसान को उसी साल के short-term और long-term, दोनों तरह के मुनाफे में से घटाया जा सकता है। Long-term नुकसान सिर्फ long-term मुनाफे में से घटेगा, short-term में से नहीं।

जो नुकसान उस साल पूरा न कट पाए, उसे आगे आठ साल तक ले जाया जा सकता है। आगे भी वह सिर्फ capital gains में से कटेगा, तनख्वाह या किसी और आमदनी में से नहीं।

एक शर्त पर लोग फिसलते हैं। नुकसान आगे ले जाना है तो उस साल का ITR तय तारीख के अंदर भरा होना चाहिए। देर से भरे गए (belated, यानी तय तारीख के बाद वाले) return में उस साल का नुकसान आगे नहीं जाता।

डिविडेंड, intraday और F&O — तीन अलग खाने

डिविडेंड शेयर बेचने की कमाई नहीं है, इसलिए उस पर capital gains वाली दरें नहीं लगतीं। वह अन्य स्रोतों से आय में जुड़ता है और आपकी slab दर पर टैक्स लगता है। एक कंपनी से एक साल में ₹10,000 से ज्यादा डिविडेंड मिले, तो कंपनी 10% TDS (पहले ही काट लिया गया टैक्स) काटकर बाकी भेजती है। TDS कट जाने का यह मतलब नहीं कि पूरा टैक्स चुक गया; slab ज्यादा हो तो बाकी भरना पड़ता है।

Intraday की कमाई capital gains में नहीं गिनी जाती। इसे speculative business income (सट्टे की किस्म की कारोबारी आय) कहा जाता है, और इसका नुकसान सिर्फ इसी तरह के मुनाफे में से कटता है।

F&O की कमाई non-speculative business income (आम कारोबारी आय) मानी जाती है। यहां सिर्फ यह बताया जा रहा है कि कौन सी कमाई किस खाने में गिनी जाती है — यह इशारा नहीं कि कोई क्या करे।

सबसे बड़ी गलतफहमी: 1 साल रख लिया तो टैक्स नहीं लगता

यह गलत है। 12 महीने से ज्यादा रखने पर टैक्स खत्म नहीं होता, सिर्फ दर बदलती है — 20% की जगह 12.5%। साथ में साल भर के ₹1.25 लाख तक के मुनाफे पर टैक्स नहीं लगता। जिनका मुनाफा इस सीमा के अंदर रहता है, उन्हें लगता है कि नियम ही यही है।

दो और जगह लोग फिसलते हैं। पहली: ₹1.25 लाख मुनाफे की सीमा है, बेचने से मिली रकम की नहीं। ₹6 लाख के शेयर बेचकर ₹1.5 लाख का long-term मुनाफा हुआ, तो ऊपर के ₹25,000 पर 12.5% लगेगा। दूसरी: यह सीमा पूरे साल में एक बार मिलती है, हर शेयर पर अलग नहीं।

तीसरी बात। मुनाफा सीमा के अंदर हो, तब भी सौदे ITR में दिखाने होते हैं। ब्रोकर और डिपॉजिटरी यह जानकारी विभाग को भेजते हैं और वह आपके AIS (Annual Information Statement, विभाग के पास पहले से जमा जानकारी का ब्योरा) में दर्ज रहती है।

और एक साफ बात: टैक्स की दर और शेयर का जोखिम, दो अलग चीजें हैं। कम दर का यह मतलब नहीं कि 12 महीने में भाव के साथ कुछ बुरा नहीं हो सकता।

Advance tax, कागज कहां से मिलेंगे, और Tejii पर क्या है

Advance tax एक लाइन में: साल भर का कुल टैक्स, TDS वगैरह घटाने के बाद ₹10,000 या उससे ज्यादा बनता है, तो उसे चार किस्तों में — 15 जून तक 15%, 15 सितंबर तक 45%, 15 दिसंबर तक 75% और 15 मार्च तक पूरा — भरना होता है, वरना ब्याज लगता है। बड़ा मुनाफा जिस तिमाही में हुआ, हिसाब उसी तिमाही से शुरू होता है।

ITR के नंबर दो जगह से मिलते हैं: income tax portal पर आपका AIS, जिसमें ब्रोकर, डिपॉजिटरी और कंपनियों की भेजी जानकारी दिखती है, और ब्रोकर का capital gains statement (मुनाफे-नुकसान का ब्योरा)। दोनों को मिलाइए; फर्क दिखे तो ब्रोकर से पूछिए।

Tejii पर टैक्स का हिसाब नहीं है, न आपके सौदों का रिकॉर्ड — वह ब्रोकर और income tax portal के पास ही है। यहां इतना काम आ सकता है: हर शेयर के पन्ने पर 1 हफ्ते, 1 महीने, 3 महीने और 1 साल की चाल दिखती है, और पिछले एक साल की सबसे बड़ी गिरावट भी।

आखिर में एक जरूरी बात। यह लेख आम जानकारी है, टैक्स की सलाह नहीं। हर मामला अलग होता है, इसलिए अपने मामले में chartered accountant (CA) से पूछिए। Tejii SEBI में रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट या निवेश सलाहकार नहीं है, और टैक्स सलाहकार भी नहीं।

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