स्टॉप लॉस क्या होता है — ट्रिगर प्राइस, SL और SL-M, और यह गारंटी क्यों नहीं है
स्टॉप लॉस एक शर्त वाला ऑर्डर है: भाव ट्रिगर प्राइस पर आते ही बिक्री का ऑर्डर आम ऑर्डर बुक में चला जाता है। SL और SL-M का फर्क, और यह गारंटी क्यों नहीं है।
एक लाइन में
स्टॉप लॉस (stop loss) एक शर्त वाला ऑर्डर है। आप पहले से एक भाव लिख देते हैं, जिसे trigger price (ट्रिगर प्राइस) कहते हैं, और एक्सचेंज से कहते हैं कि भाव वहां पहुंचे तभी मेरा बिक्री का ऑर्डर चालू करना।
तब तक वह ऑर्डर एक्सचेंज की अलग stop loss book में पड़ा रहता है और आम ऑर्डर बुक में दिखता भी नहीं। शर्त पूरी होते ही वह आम बुक में चला जाता है और बाकी ऑर्डरों की तरह भरने की कोशिश करता है।
नाम में loss जरूर है, पर यह ऑर्डर नुकसान की कोई सीमा तय नहीं करता। Tejii यह नहीं बताता कि स्टॉप लॉस कहां लगाएं, या लगाना चाहिए या नहीं।
ट्रिगर प्राइस और लिमिट प्राइस — दो अलग भाव
बेचने वाला ऑर्डर तब चालू होता है जब आम बाजार में आखिरी सौदे का भाव (last traded price) ट्रिगर तक पहुंचे या उससे नीचे जाए। खरीदने वाला तब, जब यही भाव ट्रिगर तक पहुंचे या उससे ऊपर जाए।
एक काल्पनिक उदाहरण। किसी शेयर का भाव ₹100 है और आपने ट्रिगर ₹95 रखा। ₹95 तक भाव न आए तो कुछ नहीं होता; ₹95 छूते ही बिक्री का ऑर्डर आम बुक में चला जाता है।
दूसरा भाव limit price (लिमिट प्राइस) है, यानी वह सबसे कम भाव जिस पर आप बेचने को राजी हैं। ट्रिगर के बाद यही limit order बनकर जाता है। ट्रिगर तय करता है कि ऑर्डर कब चालू हो, लिमिट प्राइस तय करता है कि किस भाव पर सौदा मंजूर है।
SL और SL-M, और कहां कौन सा चलता है
SL यानी stop loss limit में दोनों भाव भरने होते हैं। चालू होने पर यह limit order बनता है, इसलिए भाव पर काबू रहता है, पर सौदा होने की गारंटी नहीं। SL-M यानी stop loss market में सिर्फ ट्रिगर भरना होता है, और चालू होने पर वह market order बनता है — उस वक्त जो भाव मिले।
NSE ने 27 सितंबर 2021 से options में SL-M बंद कर दिया, index और stock दोनों में। BSE ने 9 अक्टूबर 2023 से अपने सभी हिस्सों में इसे पूरी तरह बंद किया। मतलब BSE पर यह मिलेगा ही नहीं; NSE के नकद बाजार में अब भी है। कई ब्रोकर ऊपर से अपनी पाबंदी भी रखते हैं।
दोनों ने यह कदम freak trade (अटपटे भाव पर हो गया सौदा) रोकने के लिए उठाया: कम खरीद-बिक्री वाले सौदों में market order चल रहे भाव से बहुत दूर भर जाता था।
स्टॉप लॉस गारंटी नहीं है — तीन वजहें
पहली वजह, gap (गैप)। रात में कोई बड़ी खबर आ जाए तो अगला दिन सीधे आपके ट्रिगर से नीचे खुल सकता है। ट्रिगर एक शर्त है, भाव का वादा नहीं। SL-M तब उस वक्त के भाव पर भरता है, जो ट्रिगर से काफी नीचे हो सकता है। SL में उल्टी दिक्कत: ऑर्डर चालू तो होगा, पर भाव limit से नीचे रहा तो भरेगा नहीं।
दूसरी वजह, लोअर सर्किट। ज्यादातर शेयरों में भाव की रोज की एक तय सीमा होती है — 2%, 5%, 10% या 20% — जिसके पार उस दिन सौदा नहीं होता। जिन शेयरों में F&O सौदे चलते हैं, उनमें ऐसी पक्की सीमा नहीं होती; वहां सीमा हालात देखकर खिसकती है। शेयर नीचे वाली सीमा पर अटक जाए तो बेचने वालों की कतार लग जाती है और खरीदार कोई नहीं होता।
तीसरी वजह, चालू होना और भर जाना अलग चीजें हैं। ब्रोकर की order book (ऐप में लगे ऑर्डरों की सूची) में ऑर्डर पहले trigger pending दिखता है, फिर open, और सौदा होने पर complete। लोग अक्सर ट्रिगर लगते ही मान लेते हैं कि निकल गए, जबकि तब तक शेयर बिके नहीं होते।
यह ऑर्डर कब तक जिंदा रहता है — दिन, 3:15 और GTT
स्टॉप लॉस ऑर्डर सिर्फ उसी कारोबारी दिन के लिए होता है: उस दिन ट्रिगर न छुआ जाए तो शाम को वह अपने आप खत्म हो जाता है। नकद बाजार में 'जब तक रद्द न करूं' वाली validity (ऑर्डर कितनी देर चले, यह सेटिंग) एक्सचेंज पर है ही नहीं।
3 अगस्त 2026 से एक बात और जुड़ गई है। जिन शेयरों में F&O सौदे चलते हैं, उनका आम कारोबार अब 3:15 बजे रुक जाता है, और 3:15 से 3:35 तक Closing Auction Session (CAS, बंद भाव तय करने वाली नीलामी) चलती है। इस नीलामी में स्टॉप लॉस लिए ही नहीं जाते: 3:15 पर जो बाकी पड़े रहते हैं, वे रद्द हो जाते हैं।
इसी एक-दिन वाली कमी के लिए ब्रोकरों ने GTT (Good Till Triggered) बनाया। यह एक्सचेंज का ऑर्डर नहीं, ब्रोकर के अपने सिस्टम में रखी एक शर्त है। भाव ट्रिगर पर पहुंचे, तब ब्रोकर एक नया limit ऑर्डर एक्सचेंज को भेजता है। एक बड़े भारतीय ब्रोकर के यहां GTT एक साल चलता है।
इसलिए GTT में चूक की दो जगहें हैं: ब्रोकर का ऑर्डर भेजना, और उस limit ऑर्डर का एक्सचेंज पर भरना। trailing stop loss (भाव ऊपर जाए तो ट्रिगर भी अपने आप ऊपर खिसके) भी ब्रोकर की ही सुविधा है, और हर ब्रोकर के नियम एक जैसे नहीं होते।
बाजार खुलते वक्त: pre-open में स्टॉप लॉस नहीं चलता
pre-open session (सुबह 9:00 से 9:15 का सत्र, जिसमें नीलामी से दिन का शुरुआती भाव तय होता है) में स्टॉप लॉस ऑर्डर लिए ही नहीं जाते। NSE के नियम में SL, IOC (Immediate or Cancel, जो तुरंत न भरे वह रद्द) और disclosed quantity (ऑर्डर का कुछ हिस्सा ही बाजार को दिखे) वाले ऑर्डर इस सत्र में मना हैं।
7 सितंबर 2026 से इस सत्र के अंदर के नियम बदले हैं। 9:00 से 9:05 तक market और limit, दोनों ऑर्डर चलते हैं। 9:05 से 9:10 तक सिर्फ limit; इस बीच भेजा market order एक्सचेंज ठुकरा देता है। ऑर्डर लेना 9:08 से 9:10 के बीच कभी भी बंद हो सकता है, फिर 9:12 तक मिलान और 9:15 तक बफर।
यह 9:05 वाली रोक हर दिन लगती है, सिर्फ गैप वाले दिन नहीं। आपका स्टॉप लॉस इस पूरे सत्र में सोया रहता है; ट्रिगर की जांच 9:15 से शुरू होने वाले आम कारोबार के भावों से होती है।
सबसे बड़ी गलतफहमी: स्टॉप लॉस लगा दिया, तो नुकसान तय
आम धारणा यह है कि स्टॉप लॉस लगाते ही नुकसान की रकम तय हो गई। यह गलत है। स्टॉप लॉस से सिर्फ इतना तय होता है कि किस भाव पर बिक्री की कोशिश शुरू होगी। नुकसान कितना हुआ, यह उस कोशिश में असल में मिले भाव से तय होता है।
गैप में भाव ट्रिगर को छोड़कर नीचे खुल जाता है, लोअर सर्किट में खरीदार ही नहीं होता, और कम खरीद-बिक्री वाले शेयर में एक ही market order कई अलग भावों पर टुकड़ों में भरता है। इन तीनों में तय कुछ नहीं होता।
उल्टी गलतफहमी भी चलती है, कि यह ऑर्डर बेकार चीज है। इन दोनों में से कोई लकीर हम नहीं खींचेंगे: Tejii यह नहीं बताता कि स्टॉप लॉस लगाएं या नहीं, कहां लगाएं, या कितने प्रतिशत नीचे। किसी एक व्यक्ति के लिए ऐसा नंबर बताना SEBI के यहां registered निवेश सलाहकार का काम है।
Tejii पर इससे जुड़ी चीजें
Nifty 500 के हर शेयर के पन्ने पर पिछला बंद भाव, 52 हफ्ते की ऊंची-नीची रेंज, मूविंग एवरेज (moving average, कुछ दिनों के भाव का औसत) और पिछले एक साल की सबसे बड़ी गिरावट मिलती है।
आखिरी आंकड़ा इस लेख से सीधे जुड़ता है: वह बताता है कि उस शेयर में एक ही खिंचाव में पहले कितना नीचे जाना हो चुका है। सारे शेयरों के लिए यही आंकड़ा गिरावट डेटा वाले पन्ने पर एक जगह है, split और bonus के हिसाब से ठीक किया हुआ।
Practice पन्ने के नुकसान कैलकुलेटर में रकम डालिए, तो दिखता है कि 10%, 20% या 2020 जैसी 38% गिरावट में वह कितनी रह जाएगी। ये आंकड़े पिछले बंद भाव से बनते हैं, लाइव नहीं।