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Advance Decline क्या है — कितने शेयर चढ़े, कितने गिरे, और market breadth कैसे पढ़ें

Nifty हरा और आपका शेयर लाल? advance/decline की गिनती दिखाती है कि असल में कितने शेयर चढ़े। market breadth और ratio आसान हिंदी में।

प्रकाशित 2026-09-05 · अपडेट 2026-09-22 · ⏱ 6 मिनट

advance/decline क्या है — एक लाइन में

किसी दिन बाजार में कितने शेयर अपने पिछले बंद भाव से ऊपर बंद हुए और कितने नीचे — इसी गिनती को advance/decline कहते हैं। ऊपर बंद होने वाले शेयर advance (चढ़े) कहलाते हैं, नीचे बंद होने वाले decline (गिरे), और जिनका भाव वहीं का वहीं रहा वे unchanged (बिना बदलाव)।

यह गिनती है, भाव नहीं। कोई शेयर 15% चढ़े या 0.1%, गिनती में दोनों एक-एक ही हैं। यही एक वजह है कि यह आंकड़ा कई बार इंडेक्स से अलग कहानी सुनाता है।

NSE अपनी वेबसाइट पर यह आंकड़ा रोज दिखाता है: advances, declines और unchanged की संख्या। साथ में यह भी कि कितने शेयर 52 हफ्ते के नए high या low पर पहुंचे, और कितने upper या lower circuit पर। circuit यानी एक दिन में भाव के चढ़ने या गिरने की तय सीमा।

Market breadth यानी बाजार की चौड़ाई, और advance-decline ratio

इस तरह के आंकड़ों को market breadth यानी बाजार की चौड़ाई कहते हैं: उस दिन की हलचल कितने शेयरों में फैली थी।

इंडेक्स एक नंबर देता है: Nifty इतने अंक ऊपर या नीचे। breadth दूसरा सवाल पूछती है — यह बढ़त या गिरावट ज्यादातर शेयरों ने मिलकर बनाई, या गिने-चुने शेयरों ने? इंडेक्स चेहरा है, breadth नब्ज।

गिनती को एक नंबर में बदलने के लिए advance-decline ratio (अनुपात) निकाला जाता है: चढ़े शेयरों की संख्या को गिरे शेयरों की संख्या से भाग दीजिए; unchanged शेयर इसमें नहीं आते। मान लीजिए किसी दिन 1,650 शेयर चढ़े और 1,100 गिरे, तो ratio हुआ 1.5। 1 से ऊपर मतलब चढ़ने वाले ज्यादा थे, 1 से नीचे मतलब गिरने वाले ज्यादा, और ठीक 1 मतलब दोनों बराबर।

दूसरा तरीका घटाने का है: हर दिन चढ़े शेयरों में से गिरे शेयर घटाइए, और यह अंतर पिछले दिनों के जोड़ में जोड़ते जाइए। इस लगातार जुड़ती लाइन को advance-decline line कहते हैं। यह कई हफ्तों की breadth एक साथ दिखाती है।

Nifty हरा और आपका शेयर लाल — असली वजह

Nifty 50 में 50 बड़ी कंपनियां हैं, और सबका वजन बराबर नहीं है। NSE की इंडेक्स कंपनी NSE Indices इसे free-float market capitalisation से बनाती है। free float यानी वे शेयर जो खुले बाजार में खरीदे-बेचे जा सकते हैं; प्रमोटर जैसे बड़े मालिकों के शेयर इसमें नहीं गिने जाते। इन शेयरों की कुल कीमत जितनी बड़ी, इंडेक्स में कंपनी का वजन उतना ज्यादा।

यह वजन कितना असमान है, यह NSE Indices के factsheet (हर महीने छपने वाला जानकारी पत्र) में दिखता है। 31 अगस्त 2026 के factsheet के मुताबिक Nifty 50 के सबसे भारी 10 शेयरों का वजन मिलाकर करीब 53% था — यानी पचास में से दस शेयर इंडेक्स का आधे से ज्यादा हिस्सा। उसी तारीख को अकेले financial services (बैंक, बीमा जैसी वित्तीय कंपनियां) का वजन 36.47% था। भाव बदलने के साथ ये वजन रोज थोड़े बदलते हैं।

मान लीजिए किसी दिन बाकी 40 शेयर वहीं के वहीं रहें और सिर्फ ये दस भारी शेयर 1-1% चढ़ें। तो Nifty करीब 0.5% ऊपर दिखेगा, क्योंकि करीब 53% वजन पर 1% की बढ़त लगभग 0.53% बनती है। और उसी दिन बाजार के हजारों छोटे-मझोले शेयर गिर सकते हैं।

उस दिन खबर कहेगी "बाजार चढ़ा", और आपका पोर्टफोलियो लाल हो सकता है। गलती आपकी हो, यह जरूरी नहीं — हो सकता है उस दिन ज्यादातर शेयर ही गिरे हों। advance/decline की गिनती यही दिखाती है।

गिनती किसकी होती है — पूरे बाजार की या एक इंडेक्स की

खबरों में रोज जो advance/decline आता है, वह आम तौर पर पूरे एक्सचेंज के उन शेयरों की गिनती होती है जिनमें उस दिन कारोबार हुआ — सिर्फ Nifty के 50 शेयरों की नहीं।

NSE पर दो हजार से ज्यादा कंपनियां लिस्टेड हैं। इसलिए "चढ़े 1,100, गिरे 1,700" जैसे आंकड़े में वे छोटी और मझोली कंपनियां भी शामिल होती हैं जो किसी बड़े इंडेक्स में आती ही नहीं। इस उदाहरण में ratio हुआ करीब 0.65, यानी हर 100 गिरे शेयरों पर करीब 65 चढ़े।

advance/decline किसी एक इंडेक्स के अंदर भी निकाला जाता है, जैसे "आज Nifty 50 के 50 शेयरों में से कितने चढ़े"। इसलिए breadth का कोई भी नंबर पढ़ते वक्त देखिए कि वह किस एक्सचेंज और किस समूह का है। हर वेबसाइट अपने हिसाब से शेयर चुनती है, इसलिए एक ही दिन के नंबर दो जगह थोड़े अलग दिख सकते हैं।

चौतरफा तेजी और सीमित तेजी

चढ़े शेयर गिरे शेयरों से काफी ज्यादा, और इंडेक्स भी ऊपर — इसे broad rally यानी चौतरफा तेजी कहते हैं।

इंडेक्स ऊपर, लेकिन गिरे शेयर चढ़े शेयरों से ज्यादा — इसे narrow rally यानी कुछ शेयरों तक सीमित तेजी कहते हैं। बढ़त चंद भारी शेयरों की है। नए निवेशक के लिए यही सबसे उलझाने वाला दिन होता है, क्योंकि हेडलाइन और आपकी स्क्रीन उलटी बातें कहती हैं।

गिरावट पर भी यही बात लागू होती है: इंडेक्स और ज्यादातर शेयर दोनों नीचे हों तो चौतरफा गिरावट, और इंडेक्स नीचे पर ज्यादातर शेयर ऊपर हों तो गिरावट कुछ भारी शेयरों तक सीमित। दोनों तरफ की संख्या लगभग बराबर हो, तो उस दिन बाजार बंटा हुआ था।

ये सब नाम सिर्फ यह बताते हैं कि आज क्या हुआ। इनमें कहीं नहीं लिखा कि अब क्या करना है।

breadth नापने के दूसरे तरीके

चढ़े-गिरे की गिनती अकेला पैमाना नहीं है। दूसरा आम पैमाना है 52 हफ्ते के नए high और नए low की गिनती — उस दिन कितने शेयर पिछले एक साल के अपने सबसे ऊंचे भाव पर पहुंचे और कितने सबसे निचले पर।

यह गिनती एक अलग बात पकड़ती है। चढ़े-गिरे की गिनती में 0.1% की चाल भी गिनी जाती है, जबकि नए high-low की गिनती में सिर्फ वे शेयर आते हैं जो अपने साल भर के दायरे के किनारे तक पहुंचे। NSE 52 हफ्ते के high-low को bonus, split और rights जैसे corporate action (कंपनी के ऐसे फैसले जिनसे शेयरों की संख्या बदलती है) के हिसाब से adjust करता है, ताकि पुराने और आज के भाव की तुलना सही रहे।

तीसरा तरीका है यह देखना कि कितने प्रतिशत शेयर अपने 200-दिन के औसत से ऊपर हैं। 200-दिन का औसत (200-day moving average) पिछले 200 कारोबारी दिनों के बंद भावों का औसत है। यह नंबर धीरे बदलता है और लंबी तस्वीर दिखाता है।

सबसे बड़ी गलतफहमी

सबसे आम गलतफहमी यह है कि breadth कल का हाल बता देती है। "आज गिरने वाले ज्यादा थे, तो कल बाजार गिरेगा" — यह सोच गलत है।

advance/decline पीछे देखने वाला आंकड़ा है। यह बताता है कि उस दिन क्या हुआ; आगे क्या होगा, यह नहीं। कमजोर breadth वाले दिन के बाद बाजार कभी चढ़ता है, कभी गिरता है — इसका कोई तय नियम नहीं है।

कई दिन लगातार कमजोर breadth का मतलब यह भी नहीं कि बाजार "टूटने वाला" है। बाजार लंबे समय तक कमजोर breadth के साथ ऊपर जा सकता है, और मजबूत breadth वाले दिन के अगले ही दिन गिर भी सकता है।

इस आंकड़े का असली काम इतना ही है कि आप हेडलाइन को पूरी तस्वीर न मान लें, और "बाजार चढ़ा तो मेरा शेयर क्यों गिरा" का जवाब खुद देख सकें। यह खरीदने या बेचने का इशारा नहीं है।

Tejii पर यह कहां दिखता है

Tejii के होम पेज पर advance/decline की गिनती दिखती है, और यह भी कि कितने शेयर अपने 52 हफ्ते के high या low पर (या उसके बिल्कुल पास) बंद हुए। यह गिनती NSE की bhavcopy (दिन के आखिर में जारी भाव फाइल) से बनती है और मुख्य बोर्ड की होती है; SME प्लेटफॉर्म की कंपनियां इसमें नहीं गिनी जातीं। 52 हफ्ते के high-low के लिए Tejii पिछले 260 कारोबारी दिन देखता है। इसलिए ये नंबर NSE या दूसरी वेबसाइटों से थोड़े अलग हो सकते हैं।

"आज बाजार का मूड" वाले पन्ने पर भी चढ़े-गिरे शेयरों की संख्या है। वहां का मूड स्कोर Tejii का अपना बनाया नंबर है, और उसका आधा हिस्सा इसी गिनती से आता है। यह स्कोर भविष्यवाणी नहीं, उस दिन का हिसाब है।

हर उद्योग वाले पन्ने पर दिखता है कि उस उद्योग के Nifty 500 शेयरों में से कितने प्रतिशत अपने 200-दिन के औसत से ऊपर हैं — यानी उस एक उद्योग की अपनी breadth।

52 हफ्ते के high या low के 5% के अंदर बंद हुए Nifty 500 शेयरों के लिए अलग scanner पन्ने हैं। इनमें आज का आंकड़ा सिर्फ गिनती के रूप में दिखता है, और जिन शेयरों के नाम दिखते हैं वे कम से कम 30 दिन पुरानी सूची से आते हैं। सूची में नाम होना खरीदने या बेचने का इशारा नहीं है।

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