निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में कौन-कौन सी कंपनी है

निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में कौन-कौन सी कंपनी है — NSE की अपनी फाइल से बनी पूरी लिस्ट, सिंबल और उद्योग के साथ; और चुनने के नियम तथा वजन की सीमा।

निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में कौन-कौन सी कंपनी है

निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की कंपनियों के नाम ठीक नीचे की टेबल में हैं। टेबल में तीन कॉलम हैं: कंपनी का नाम, सिंबल यानी एक्सचेंज पर उसका छोटा नाम, और NSE के वर्गीकरण वाला उद्योग। जिस कंपनी का Tejii पर पन्ना है, उसका नाम उसी पन्ने से जुड़ा है; जिसका पन्ना नहीं है, उसका नाम सादा लिखा दिखता है।

यह लिस्ट हाथ से नहीं लिखी गई। यह NSE की उस फाइल से बनती है जिसमें इस इंडेक्स की कंपनियां दर्ज हैं; फाइल बदलती है तो टेबल और उसके नीचे लिखी गिनती भी बदल जाती है। इसीलिए नीचे के लेख में किसी कंपनी का नाम नहीं है।

इस टेबल की सभी 14 कंपनियां NSE के वर्गीकरण में Consumer Durables समूह की हैं।

निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स है क्या, और इसे गिनता कौन है

Consumer durables यानी टिकाऊ उपभोक्ता सामान, जो लंबे समय तक चलता है। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कोई कंपनी या फंड नहीं, एक sectoral index यानी एक ही उद्योग का इंडेक्स है। इसे NSE Indices Limited बनाती है और real-time यानी साथ-के-साथ गिनती है।

NSE Indices की 30 सितंबर 2026 वाली factsheet यानी इंडेक्स के ब्योरे वाले पर्चे के मुताबिक इसकी शुरुआत 15 जनवरी 2020 को हुई, आधार दिन 1 अप्रैल 2005 है, और उस दिन इंडेक्स की कीमत 1,000 मानी गई थी। सितंबर 2026 के methodology यानी नियमों के दस्तावेज के मुताबिक इसमें ज्यादा से ज्यादा 15 कंपनियां होती हैं।

कोई कंपनी निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में आती और बाहर कैसे जाती है

चुनाव लिखे नियमों से होता है। methodology के मुताबिक कंपनी समीक्षा के समय निफ्टी 500 में हो, और उसका उद्योग इस इंडेक्स के लिए दर्ज उद्योगों में से हो। ऐसी कंपनियों में आखिरी चुनाव free-float market capitalisation से होता है, यानी उन शेयरों की कुल कीमत से जो खुले बाजार में खरीदे-बेचे जा सकते हैं।

NSE के F&O यानी futures और options (वायदा-विकल्प) खंड वाले शेयरों को प्राथमिकता मिलती है। बाहर की कंपनी तब अंदर आती है जब उसका free-float market cap इंडेक्स की सबसे छोटी कंपनी से कम से कम डेढ़ गुना हो।

समीक्षा साल में दो बार होती है। कट-ऑफ तारीखें 31 जनवरी और 31 जुलाई हैं, पिछले छह महीने के औसत आंकड़े देखे जाते हैं, और बदलाव मार्च तथा सितंबर के आखिरी कारोबारी दिन से लागू होते हैं।

वजन भी free-float market cap से तय होता है, पर सीमा के साथ: rebalancing यानी वजन दोबारा बिठाने के समय एक कंपनी का वजन 33 प्रतिशत से, और सबसे भारी तीन का कुल वजन 62 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता। यह सीमा हर तिमाही दोबारा लागू होती है।

निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी FMCG और पूरा उद्योग — फर्क क्या है

निफ्टी FMCG भी उपभोक्ता के सामान का इंडेक्स है, इसलिए दोनों में उलझन होती है। methodology में FMCG यानी Fast Moving Consumer Goods को ऐसा सामान कहा गया है जो टिकाऊ नहीं होता और बड़े पैमाने पर खपता है, और कोई उद्योग दोनों इंडेक्स की सूचियों में साझा नहीं है।

यह पूरे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स समूह की लिस्ट भी नहीं है। 9 अक्टूबर 2026 को NSE की निफ्टी 500 वाली फाइल में paint यानी रंग-रोगन बनाने वाली कंपनियों का उद्योग भी Consumer Durables लिखा था, पर इस इंडेक्स के लिए methodology में दर्ज उद्योगों में Paints नहीं है। इसलिए Tejii का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स उद्योग वाला पन्ना इस टेबल से लंबा हो सकता है।

Nifty India Consumption अलग इंडेक्स है: methodology के मुताबिक वह घरेलू खपत की थीम पर बना है, और उसकी उद्योग-सूची में FMCG, auto, healthcare और telecom के उद्योग भी हैं।

सबसे बड़ी गलतफहमी: कंज्यूमर ड्यूरेबल्स यानी सिर्फ फ्रिज, AC और टीवी

नाम से लगता है कि इसमें सिर्फ फ्रिज, AC, टीवी और पंखे जैसी चीजें बनाने वाली कंपनियां होंगी। नियम इससे चौड़े हैं: सितंबर 2026 के methodology दस्तावेज में इस इंडेक्स के लिए घरेलू उपकरण और consumer electronics यानी इलेक्ट्रॉनिक सामान के साथ गहने और घड़ियां, जूते-चप्पल, साइकिल, फर्नीचर, ceramics यानी चीनी मिट्टी से बना सामान, प्लाईवुड और sanitary ware यानी बाथरूम में लगने वाला सामान भी दर्ज हैं।

टेबल का उद्योग वाला कॉलम NSE का बड़ा समूह दिखाता है, उसके अंदर का बारीक उद्योग नहीं; इसलिए यह फर्क वहां से नहीं दिखता। और इंडेक्स में नाम होना शर्तें पूरी करने का नतीजा है, कंपनी के अच्छे या बुरे होने का फैसला नहीं।

Tejii पर यह सब कहां देखें

टेबल में जिस नाम पर लिंक है, वह उसी कंपनी के पन्ने पर ले जाता है। वहां लिखा है कि कंपनी क्या काम करती है, और साथ में पिछला बंद भाव, 52 हफ्ते का लो और हाई, एक हफ्ते से एक साल तक की चाल, एक साल की सबसे बड़ी गिरावट, RSI, और 20, 50 तथा 200 दिन के औसत हैं।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स उद्योग वाले पन्ने पर यह भी लिखा है कि इस उद्योग पर किन बातों का असर पड़ता है।

Tejii SEBI-पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट या निवेश सलाहकार नहीं है। यहां सिर्फ सार्वजनिक आंकड़े और उन्हें पढ़ने का तरीका है, कोई सलाह नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में कितनी कंपनियां हैं?

NSE Indices के methodology दस्तावेज के मुताबिक इसमें ज्यादा से ज्यादा 15 कंपनियां होती हैं। यह ऊपरी सीमा है, इसलिए गिनती इससे कम भी हो सकती है। इस समय की गिनती ऊपर टेबल के नीचे लिखी है; वह NSE की फाइल से अपने आप बनती है।

निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की लिस्ट कब बदलती है?

समीक्षा साल में दो बार होती है। कट-ऑफ तारीखें 31 जनवरी और 31 जुलाई हैं, और बदलाव मार्च तथा सितंबर के आखिरी कारोबारी दिन से लागू होते हैं। merger यानी विलय, demerger यानी कंपनी के बंटवारे या delisting यानी एक्सचेंज से हटने जैसी घटना पर बीच में भी बदलाव हो सकता है।

निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी FMCG में क्या फर्क है?

निफ्टी FMCG जल्दी खपने वाले सामान का इंडेक्स है, जैसे पैकेट-बंद खाना और निजी देखभाल का सामान। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स टिकाऊ सामान का है, जैसे घरेलू उपकरण, गहने-घड़ियां और जूते-चप्पल। NSE Indices की methodology में दोनों की उद्योग-सूचियां अलग हैं, और कोई उद्योग दोनों में साझा नहीं है।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में कौन-कौन से उद्योग आते हैं?

सितंबर 2026 के methodology दस्तावेज में इस इंडेक्स के लिए घरेलू उपकरण, consumer electronics, गहने और घड़ियां, जूते-चप्पल, चमड़े का सामान, साइकिल, फर्नीचर, ceramics, ग्रेनाइट-संगमरमर, प्लाईवुड और sanitary ware जैसे उद्योग दर्ज हैं। Paints इस सूची में नहीं है।

निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में किसी एक कंपनी का वजन कितना हो सकता है?

NSE Indices के नियमों के मुताबिक rebalancing के समय किसी एक कंपनी का वजन 33 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता, और सबसे भारी तीन का मिलाकर 62 प्रतिशत से ज्यादा नहीं। दो rebalancing के बीच भाव बदलने से वजन इधर-उधर हो सकता है।

क्या निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर F&O या ETF है?

9 अक्टूबर 2026 को NSE की F&O lot size वाली फाइल में इस इंडेक्स का कोई futures या options contract दर्ज नहीं था। NSE की ETF सूची में, यानी एक्सचेंज पर शेयर की तरह खरीदे-बेचे जाने वाले फंडों में, इस पर बना कोई ETF भी दर्ज नहीं था। कंपनियों के अपने शेयरों पर F&O होना अलग बात है।

इस पन्ने का हवाला कैसे दें

स्रोत: Tejii (tejii.in) — “निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में कौन-कौन सी कंपनी है — पूरी लिस्ट और नियम”, NSE की constituent सूची, 11 अक्टूबर 2026 को ली गई। https://tejii.in/nifty-consumer-durables-companies

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हवाला देते समय तारीख जरूर लिखें — यह सूची NSE की समीक्षा के साथ बदलती है।

यह सलाह नहीं है। Tejii SEBI-पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट नहीं है। यहां सिर्फ NSE के सार्वजनिक आंकड़े और उनका सीधा मतलब है — यह किसी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं है।

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