निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में कौन-कौन सी कंपनी है

निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में कौन-कौन सी कंपनी है: NSE की फाइल से बनी फिन निफ्टी (FINNIFTY) की पूरी लिस्ट, सिंबल के साथ; और कंपनी के आने-जाने तथा वजन की सीमा के नियम।

निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में कौन-कौन सी कंपनी है

निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज की सभी कंपनियों के नाम ठीक नीचे की टेबल में हैं। उसमें तीन कॉलम हैं: कंपनी का नाम, सिंबल यानी एक्सचेंज पर उसका छोटा नाम, और NSE के वर्गीकरण वाला उद्योग। जिस कंपनी का Tejii पर पन्ना है उसका नाम लिंक है; निफ्टी 500 से बाहर की कंपनी बिना लिंक के लिखी मिलेगी। NSE के F&O यानी futures और options खंड में इंडेक्स का सिंबल FINNIFTY है, इसलिए इसे फिन निफ्टी भी कहते हैं।

यह लिस्ट हाथ से नहीं लिखी गई: NSE की उसी फाइल से बनती है जिसमें इंडेक्स की कंपनियां दर्ज हैं, और समीक्षा के बाद फाइल बदलने पर टेबल भी बदल जाती है।

इस टेबल की सभी 20 कंपनियां NSE के वर्गीकरण में Financial Services समूह की हैं।

निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज है क्या, और इसे गिनता कौन है

यह न कंपनी है, न फंड; यह sectoral index यानी एक ही क्षेत्र का इंडेक्स है, जिसे NSE Indices Limited बनाती और real-time यानी साथ के साथ गिनती है।

सितंबर 2026 के methodology यानी नियमों के दस्तावेज के मुताबिक इसमें ज्यादा से ज्यादा 20 कंपनियां होती हैं, और दायरे में छह sub-sector यानी उप-क्षेत्र हैं: बैंक, वित्तीय संस्थान, housing finance यानी घर के कर्ज वाली कंपनियां, NBFC यानी कर्ज देने वाली गैर-बैंक कंपनियां, बीमा, और बाकी वित्तीय सेवाएं।

30 सितंबर 2026 की factsheet यानी इंडेक्स के ब्योरे वाले पर्चे के मुताबिक इसकी शुरुआत 7 सितंबर 2011 को हुई, आधार दिन 1 जनवरी 2004 है, और आधार कीमत 1,000।

कोई कंपनी फिन निफ्टी में आती और बाहर कैसे जाती है

methodology के मुताबिक दायरा निफ्टी 500 की वित्तीय सेवा कंपनियों का है। पहले हर उप-क्षेत्र का हिस्सा निकाला जाता है; पैमाना औसत free-float market capitalisation है, यानी खुले बाजार में बिकने लायक शेयरों की कीमत। फिर हर उप-क्षेत्र से कंपनियां इस तरह ली जाती हैं कि इंडेक्स में उसका हिस्सा उसी के आसपास रहे। F&O खंड वाले शेयरों को प्राथमिकता मिलती है।

नई कंपनी किसी पुरानी की जगह तब लेती है जब उसका औसत free-float market cap इंडेक्स की सबसे छोटी कंपनी से कम से कम डेढ़ गुना हो। समीक्षा साल में दो बार होती है: कट-ऑफ तारीखें 31 जनवरी और 31 जुलाई हैं, और बदलाव मार्च और सितंबर के आखिरी कारोबारी दिन से लागू होते हैं।

वजन पर सीमा है: rebalancing यानी वजन दोबारा बिठाने के समय सबसे भारी तीन कंपनियां 19, 14 और 10 प्रतिशत पर रोकी जाती हैं, और बाकी हर कंपनी का वजन ऊपर वाली से कम रखा जाता है। जिनके शेयर F&O खंड में नहीं हैं, उनमें हर एक 4.5 और सब मिलाकर 10 प्रतिशत पर रोकी जाती हैं।

NSE Indices की 1 दिसंबर 2025 की press release यानी विज्ञप्ति के मुताबिक ये सीमाएं दिसंबर 2025 के आखिरी कारोबारी दिन से लागू हुईं; पहले एक कंपनी की सीमा 33 और सबसे भारी तीन की 62 प्रतिशत थी। बदलाव SEBI के 29 मई 2025 के circular यानी सूचना-पत्र की उन शर्तों के लिए हुआ जो F&O वाले non-benchmark यानी मुख्य पैमाने से अलग इंडेक्स पर लगती हैं।

फिन निफ्टी, बैंक निफ्टी और वित्तीय सेवा उद्योग में फर्क

इसे अक्सर निफ्टी बैंक यानी Bank Nifty समझ लिया जाता है। methodology के मुताबिक उसमें सिर्फ बैंक आते हैं, ज्यादा से ज्यादा 14; फिन निफ्टी में बैंकों के साथ NBFC, बीमा और बाकी वित्तीय कंपनियां भी आ सकती हैं। कोई बैंक दोनों में हो सकता है, पर लिस्ट एक नहीं है।

इसी नाम से और इंडेक्स भी हैं, जैसे Nifty Financial Services 25/50, जिसमें कंपनियां वही हैं पर वजन की सीमाएं अलग, और Nifty Financial Services Ex-Bank, जिसमें बैंक नहीं आते।

यह पूरे उद्योग की लिस्ट भी नहीं है: Tejii के वित्तीय सेवा उद्योग वाले पन्ने पर निफ्टी 500 की वे सारी कंपनियां हैं जिन्हें NSE ने Financial Services समूह में रखा है, और वह लिस्ट इस टेबल से कहीं लंबी है।

सबसे बड़ी गलतफहमी: ये वित्तीय क्षेत्र की 20 सबसे बड़ी कंपनियां हैं

गिनती देखकर लगता है कि यह वित्तीय क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों की लिस्ट है। नियम ऐसा नहीं कहते: चुनाव उप-क्षेत्र के हिसाब से होता है। इसलिए छोटे उप-क्षेत्र की कंपनी अंदर हो सकती है और उससे बड़ी, दूसरे उप-क्षेत्र की कंपनी बाहर।

हिस्से बराबर भी नहीं होते: नियम खुद rebalancing के समय सबसे भारी तीन को मिलाकर 43 प्रतिशत (19+14+10) तक जाने देता है।

लिस्ट में नाम होना इन नियमों का नतीजा है, कंपनी के अच्छे या बुरे होने का फैसला नहीं।

Tejii पर यह सब कहां देखें

जिस नाम पर लिंक है, उस कंपनी के पन्ने पर कंपनी का काम, पिछला बंद भाव, 52 हफ्ते का लो और हाई, एक हफ्ते से एक साल तक की चाल, एक साल की सबसे बड़ी गिरावट, RSI, और 20, 50 तथा 200 दिन के औसत मिलते हैं।

उद्योग वाले पन्ने पर निफ्टी 500 की सारी वित्तीय कंपनियां एक टेबल में हैं। दूसरे इंडेक्स की लिस्ट के लिंक नीचे हैं।

Tejii SEBI-पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट या निवेश सलाहकार नहीं है। यहां सिर्फ सार्वजनिक आंकड़े हैं, कोई सलाह नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में कितनी कंपनियां हैं?

NSE Indices की methodology के मुताबिक इसमें ज्यादा से ज्यादा 20 कंपनियां होती हैं, जो निफ्टी 500 की वित्तीय सेवा कंपनियों में से चुनी जाती हैं। मौजूदा नाम इसी पन्ने की टेबल में हैं और गिनती उसके ठीक नीचे; दोनों NSE की फाइल से बनते हैं।

फिन निफ्टी (FINNIFTY) क्या है?

FINNIFTY, NSE के F&O यानी futures और options खंड में Nifty Financial Services इंडेक्स का सिंबल है। यानी फिन निफ्टी कोई अलग इंडेक्स नहीं, इसी इंडेक्स का चलता नाम है। इसमें बैंक, NBFC, बीमा और बाकी वित्तीय सेवाओं की कंपनियां आ सकती हैं; मौजूदा नाम इस पन्ने की टेबल में हैं।

बैंक निफ्टी और फिन निफ्टी में क्या फर्क है?

methodology के मुताबिक निफ्टी बैंक में सिर्फ बैंक आते हैं, ज्यादा से ज्यादा 14। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में बैंकों के साथ NBFC, housing finance, बीमा और बाकी वित्तीय कंपनियां भी आ सकती हैं, ज्यादा से ज्यादा 20। कोई बैंक दोनों में हो सकता है, पर दोनों की लिस्ट अलग है। वजन की सीमा दोनों में एक जैसी है।

निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज की लिस्ट कब बदलती है?

समीक्षा साल में दो बार होती है। factsheet के मुताबिक कट-ऑफ तारीखें 31 जनवरी और 31 जुलाई हैं, और methodology के मुताबिक बदलाव मार्च तथा सितंबर के आखिरी कारोबारी दिन से लागू होते हैं। merger यानी विलय या delisting यानी शेयर के एक्सचेंज से हटने जैसी घटना पर बीच में भी बदलाव हो सकता है।

क्या फिन निफ्टी पर F&O है, और weekly expiry होती है?

F&O है: NSE के 6 जनवरी 2021 के circular के मुताबिक सौदे 11 जनवरी 2021 से FINNIFTY सिंबल से शुरू हुए। weekly यानी हर हफ्ते खत्म होने वाले options बंद हो चुके हैं; आखिरी expiry 19 नवंबर 2024 थी। 11 अक्टूबर 2026 को NSE की lot size वाली सूची में इसके तीन महीनों के contracts दर्ज थे। यह सलाह नहीं।

फिन निफ्टी में किसी कंपनी का वजन कैसे तय होता है?

वजन free-float market capitalisation से तय होता है। methodology के मुताबिक rebalancing के समय सबसे भारी तीन कंपनियां 19, 14 और 10 प्रतिशत पर रोकी जाती हैं, और बाकी हर एक का वजन अपने से ऊपर वाली से कम रखा जाता है। सबसे भारी कंपनियों का ताजा वजन NSE Indices की मासिक factsheet में छपता है।

इस पन्ने का हवाला कैसे दें

स्रोत: Tejii (tejii.in) — “निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में कौन-कौन सी कंपनी है - पूरी लिस्ट और नियम”, NSE की constituent सूची, 11 अक्टूबर 2026 को ली गई। https://tejii.in/nifty-financial-services-companies

अपने ब्लॉग या वेबसाइट पर लिंक के साथ देना हो, तो यह कॉपी करें:

हवाला देते समय तारीख जरूर लिखें — यह सूची NSE की समीक्षा के साथ बदलती है।

यह सलाह नहीं है। Tejii SEBI-पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट नहीं है। यहां सिर्फ NSE के सार्वजनिक आंकड़े और उनका सीधा मतलब है — यह किसी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं है।

दूसरे इंडेक्स की लिस्ट

आगे पढ़ें