IT शेयर: IT उद्योग की कंपनियां और उनका कारोबार
निफ्टी 500 के 25 शेयर · 14 अक्टूबर 2026 के बंद भाव
इस समूह में सबसे ज़्यादा IT सर्विसेज कंपनियां हैं, जो देश-विदेश की दूसरी कंपनियों और संस्थाओं के लिए सॉफ्टवेयर बनाने, चलाने और संभालने का काम करती हैं। कुछ कंपनियां गाड़ियां, विमान और मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों तथा टेलीकॉम और मीडिया कंपनियों को इंजीनियरिंग डिज़ाइन और R&D (रिसर्च और डेवलपमेंट) सेवाएं देती हैं। कुछ कंपनियां बैंक, बीमा कंपनियों और सरकारी संस्थाओं जैसे ग्राहकों को अपना सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट लाइसेंस या सब्सक्रिप्शन पर देती हैं, और उसे लगाने व चलाने की सेवा भी देती हैं। इसके अलावा इस समूह में ऐसी कंपनियां भी हैं जो मुख्य रूप से अमेरिका के अस्पतालों और हेल्थ बीमा कंपनियों के लिए बिलिंग, बीमा क्लेम और मरीज़ों के रिकॉर्ड जैसे बैक-ऑफिस (पर्दे के पीछे वाले) काम करती हैं। डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल विज्ञापन, डिजिटल मैप और सर्वर जैसे IT हार्डवेयर से जुड़ी कंपनियां भी इसमें शामिल हैं।
यह उद्योग किन बातों से प्रभावित होता है
ये वे बातें हैं जिनका असर इस उद्योग पर आमतौर पर पड़ता है — यह भविष्यवाणी नहीं कि आगे क्या होगा।
- कई IT कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा डॉलर, यूरो और पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में आता है। वहीं भारत में काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी जैसा बड़ा खर्च रुपये में होता है। इसलिए डॉलर जैसी मुद्राओं के मुकाबले रुपये का भाव बदलने पर रुपये में गिनी गई कमाई और मुनाफा बदल सकते हैं।
- IT सर्विसेज और इंजीनियरिंग सेवा देने वाली कई कंपनियों के बहुत से ग्राहक अमेरिका और यूरोप में हैं। वहां की अर्थव्यवस्था या ग्राहकों के अपने कारोबार (जैसे बैंकिंग, रिटेल, ऑटो) की हालत बदलने पर ग्राहक नए IT प्रोजेक्ट पर खर्च बढ़ा, टाल या घटा सकते हैं। इसका असर इन कंपनियों को मिलने वाले काम पर पड़ सकता है।
- IT सर्विसेज कंपनियों का सबसे बड़ा खर्च कर्मचारियों पर होता है। इसलिए सालाना सैलरी बढ़ोतरी, नई भर्तियों और कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर (attrition) में बदलाव से कंपनी की लागत और मार्जिन (कमाई में से बचने वाला हिस्सा) बदलते हैं।
- अमेरिका (H-1B वीज़ा) और दूसरे देशों में वर्क वीज़ा के नियम या फीस बदलने पर, IT सर्विसेज कंपनियों के लिए कर्मचारियों को ग्राहक के देश में भेजकर काम कराने की लागत और तरीका बदल सकते हैं।
- क्लाउड (इंटरनेट के ज़रिए किराये पर सर्वर और सॉफ्टवेयर), ऑटोमेशन (मशीन से अपने-आप होने वाला काम) और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जैसी तकनीकों से ग्राहकों की ज़रूरतें बदल सकती हैं। किसी काम में कितने लोग लगते हैं, यह भी बदल सकता है। इसका असर कंपनियों की सेवाओं और फीस तय करने के तरीके पर पड़ सकता है।
इस उद्योग के सारे 25 शेयर
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| शेयर | बंद भाव | आज | हाई से | RSI | 1 साल की सबसे बड़ी गिरावट |
|---|---|---|---|---|---|
| टीसीएस | ₹2,304.90 | +1.57% | -31.2% | 64.19 | 40% |
| इंफोसिस | ₹1,088.00 | +2.44% | -37.04% | 59.45 | 42% |
| टाटा एलेक्सी | ₹3,623.10 | +5.73% | -39.11% | 67.62 | 49% |
| एचसीएल टेक | ₹1,327.00 | +0.08% | -25.45% | 63.01 | 40% |
| नेटवेब टेक्नोलॉजीज | ₹5,067.70 | +0.26% | -12.82% | 60.97 | 31% |
| टेक महिंद्रा | ₹1,575.20 | +2.05% | -15.04% | 56.19 | 25% |
| कोफोर्ज | ₹1,928.00 | -0.05% | -4.61% | 61.95 | 46% |
| पर्सिस्टेंट सिस्टम्स | ₹5,898.00 | -1.5% | -10.62% | 64.42 | 35% |
| केपीआईटी टेक्नोलॉजीज | ₹523.80 | +1.96% | -59.23% | 50.49 | 63% |
| एलटीएम | ₹4,226.10 | +0.26% | -12.86% | 53.61 | 26% |
| विप्रो | ₹170.92 | +1.14% | -37.41% | 58.02 | 42% |
| ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर | ₹10,420.00 | -2.07% | -16.91% | 39.31 | 32% |
| जेनसार टेक्नोलॉजीज | ₹490.15 | +2.35% | -40.37% | 67.11 | 48% |
| एमफैसिस | ₹2,435.30 | -1.26% | -18.14% | 61.86 | 31% |
| सैजिलिटी | ₹45.55 | +2.68% | -21.32% | 57.48 | 33% |
| ब्लैक बॉक्स | ₹935.80 | +1.51% | -15.16% | 69.32 | 34% |
| साइएंट | ₹1,195.40 | +1.71% | -2.18% | 67.27 | 38% |
| टाटा टेक्नोलॉजीज | ₹745.55 | +0.25% | -16.32% | 54.45 | 29% |
| बिड़लासॉफ्ट | ₹298.75 | +0.67% | -36.97% | 59.94 | 42% |
| एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज | ₹3,613.40 | +5.37% | -23.54% | 67.55 | 35% |
| इंटेलेक्ट डिजाइन एरिना | ₹642.95 | +5.93% | -48.34% | 53.43 | 53% |
| हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज | ₹570.35 | +1.54% | -29.39% | 71.22 | 49% |
| फ्रैक्टल एनालिटिक्स | ₹721.05 | +0.42% | -35.51% | 40.32 | 36% |
| एफल इंडिया | ₹1,434.10 | -0.5% | -31.68% | 35.89 | 38% |
| इन्वेंटुरस नॉलेज सॉल्यूशंस | ₹1,729.60 | -0.8% | -12.2% | 44.36 | 27% |
भाव स्प्लिट और बोनस के हिसाब से समायोजित हैं। तरीका: पिछले साल की गिरावट का डेटा।