कंस्ट्रक्शन शेयर: सड़क, रेल, बिजली लाइन बनाने वाली कंपनियां
निफ्टी 500 के 13 शेयर · 14 अक्टूबर 2026 के बंद भाव
इस समूह की कंपनियां सड़क, रेलवे लाइन, मेट्रो, पुल, सुरंग, बंदरगाह, बिजली की ट्रांसमिशन लाइन और सबस्टेशन, तेल-गैस पाइपलाइन, रिफाइनरी और इमारतें बनाने से जुड़े ठेके लेती हैं, जैसे L&T, NCC, Afcons, KEC International और Kalpataru Projects। इनमें से कई कंपनियां EPC ठेके लेती हैं, जिनमें डिज़ाइन (इंजीनियरिंग), सामान की खरीद (प्रोक्योरमेंट) और निर्माण (कंस्ट्रक्शन) तक पूरे काम की ज़िम्मेदारी एक ही कंपनी की होती है। L&T का कारोबार सिर्फ कंस्ट्रक्शन तक सीमित नहीं है; उसकी IT सर्विस और फाइनेंस जैसी कंपनियां भी हैं। RVNL, IRCON, NBCC, Engineers India और RITES सरकारी (PSU) कंपनियां हैं। इनमें Engineers India और RITES इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी का काम भी करती हैं, यानी प्रोजेक्ट का डिज़ाइन बनाना और तकनीकी सलाह देना। NBCC मुख्य रूप से सरकारी इमारतों के प्रोजेक्ट को मैनेज करने (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी) का काम करती है, जिसमें असल निर्माण आम तौर पर दूसरे ठेकेदार करते हैं। IRB Infrastructure हाईवे बनाने के साथ कई सड़कों पर टोल वसूलने का काम भी करती है।
यह उद्योग किन बातों से प्रभावित होता है
ये वे बातें हैं जिनका असर इस उद्योग पर आमतौर पर पड़ता है — यह भविष्यवाणी नहीं कि आगे क्या होगा।
- इस समूह की कई कंपनियों को बड़े ठेके केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, रेलवे, NHAI या सरकारी कंपनियों से मिलते हैं। इसलिए बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर पूंजीगत खर्च (कैपेक्स, यानी सड़क-रेल जैसी संपत्ति बनाने पर होने वाला खर्च) और नए टेंडर निकलने की रफ्तार का संबंध इनके पास आने वाले नए काम से होता है। L&T, KEC और Kalpataru जैसी कंपनियों को विदेशों और निजी कंपनियों से भी ठेके मिलते हैं, इसलिए उन देशों में होने वाला खर्च और रुपये की विनिमय दर (दूसरी मुद्रा के मुकाबले रुपये का भाव) भी उनके काम और कमाई से जुड़े होते हैं।
- ऑर्डर बुक यानी मिल चुके पर अभी बाकी काम की कुल रकम। यह रकम एक साथ कमाई में नहीं बदलती; कमाई आम तौर पर प्रोजेक्ट का काम आगे बढ़ने के साथ दर्ज होती है। इसलिए जमीन अधिग्रहण या मंजूरी में देरी, या बारिश के मौसम में साइट पर काम धीमा होने का असर उस अवधि की कमाई पर पड़ सकता है।
- कुछ ठेकों में कीमत पहले से तय होती है। अगर प्रोजेक्ट के दौरान स्टील, सीमेंट, बिटुमेन (सड़क में लगने वाला डामर) या एल्युमिनियम जैसे कच्चे माल के दाम बढ़ जाएं और ठेके में कीमत बदलने की शर्त (प्राइस वेरिएशन क्लॉज) न हो, तो बढ़ी लागत का बोझ आम तौर पर कंपनी को खुद उठाना पड़ता है, जिससे हर प्रोजेक्ट पर बचने वाला मुनाफा (मार्जिन) कम हो सकता है।
- ठेके पर निर्माण करने वाली कंपनियों को अक्सर पहले मजदूरी, मशीनों और सामान पर खर्च करना पड़ता है, जबकि भुगतान अक्सर बिल पास होने के बाद मिलता है। इसलिए ग्राहक से भुगतान में देरी होने पर वर्किंग कैपिटल (रोज़ के काम के लिए लगने वाला पैसा) की जरूरत बढ़ती है। यह पैसा कई बार कर्ज से जुटाया जाता है, इसलिए ब्याज दरें बदलने पर उस कर्ज की लागत भी बदल सकती है।
- टोल सड़क चलाने के कारोबार में कमाई सड़क पर चलने वाली गाड़ियों की संख्या और टोल दरों से जुड़ी होती है; इस समूह में IRB Infrastructure यह काम करती है। नेशनल हाईवे पर टोल दरें सरकारी नियमों के तहत आम तौर पर हर साल बदली जाती हैं, और इसमें थोक महंगाई सूचकांक (WPI) को ध्यान में रखा जाता है।
इस उद्योग के सारे 13 शेयर
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| शेयर | बंद भाव | आज | हाई से | RSI | 1 साल की सबसे बड़ी गिरावट |
|---|---|---|---|---|---|
| लार्सन एंड टुब्रो | ₹3,642.00 | -0.9% | -17.97% | 37.7 | 24% |
| सीमइंडिया प्रोजेक्ट्स | ₹1,153.50 | +1.29% | -30.06% | 39.71 | 41% |
| इंजीनियर्स इंडिया | ₹289.85 | +0.45% | -9.82% | 50.38 | 20% |
| आरवीएनएल | ₹196.88 | -0.21% | -50.87% | 43.57 | 52% |
| केईसी इंटरनेशनल | ₹360.25 | +0.17% | -59.8% | 35.42 | 60% |
| इरकॉन इंटरनेशनल | ₹106.77 | +0.71% | -42.73% | 44.15 | 44% |
| एनबीसीसी | ₹76.21 | -1.28% | -39.44% | 36.74 | 40% |
| एनसीसी | ₹125.40 | +0.91% | -42.28% | 37.82 | 44% |
| कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंटरनेशनल | ₹1,400.10 | -1.23% | -6.03% | 49.87 | 23% |
| आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर | ₹17.77 | -0.56% | -25.8% | 45.57 | 26% |
| टेक्नो इलेक्ट्रिक एंड इंजीनियरिंग | ₹949.80 | +0.63% | -32.72% | 42.16 | 35% |
| राइट्स | ₹200.76 | +0.41% | -25.64% | 44.29 | 32% |
| एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर | ₹243.43 | -0.49% | -49.22% | 36.98 | 48% |
भाव स्प्लिट और बोनस के हिसाब से समायोजित हैं। तरीका: पिछले साल की गिरावट का डेटा।