रियल्टी शेयर: रियल एस्टेट कंपनियों पर क्या असर डालता है

निफ्टी 500 के 11 शेयर · 14 अक्टूबर 2026 के बंद भाव

इस बकेट में ऐसी कंपनियां हैं जो जमीन खरीदकर या जमीन मालिकों के साथ साझेदारी (जॉइंट डेवलपमेंट) में फ्लैट, घर, प्लॉट और टाउनशिप जैसे रिहायशी प्रोजेक्ट बनाती और बेचती हैं। कुछ कंपनियों का बड़ा कारोबार ऑफिस बिल्डिंग, शॉपिंग मॉल और होटल जैसी संपत्तियों का है, जिनसे उन्हें किराया या होटल की कमाई मिलती है। कुछ कंपनियां वेयरहाउस या इंडस्ट्रियल पार्क, डेटा सेंटर, या दूसरों के लिए निर्माण का ठेका जैसे काम भी करती हैं। यानी किसी कंपनी की कमाई ज्यादातर मकान बेचने से आती है, किसी की ज्यादातर किराये से, और कुछ की दोनों से।

37%आम शेयर की 1 साल में सबसे बड़ी गिरावट
55%200-दिन के औसत से ऊपर
40आम RSI
0 शेयर52 हफ्ते के हाई के 5% के अंदर

यह उद्योग किन बातों से प्रभावित होता है

ये वे बातें हैं जिनका असर इस उद्योग पर आमतौर पर पड़ता है — यह भविष्यवाणी नहीं कि आगे क्या होगा।

  • बहुत से लोग घर होम लोन लेकर खरीदते हैं, और कई होम लोन फ्लोटिंग रेट पर होते हैं, यानी उनकी ब्याज दर समय के साथ बदल सकती है। जब RBI रेपो रेट (वह दर जिस पर RBI बैंकों को थोड़े समय का कर्ज देता है) बदलता है, तो ऐसे कई लोन की ब्याज दर बदल जाती है, जिससे EMI या लोन की अवधि बदल सकती है। इसका असर इस पर पड़ता है कि खरीदार पर कर्ज का बोझ कितना होगा। कई डेवलपर भी कर्ज लेते हैं, इसलिए ब्याज दरों का असर उनकी अपनी उधारी की लागत पर भी पड़ता है।
  • सीमेंट, स्टील और मजदूरी के दाम बदलने से निर्माण की लागत बदलती है। जो फ्लैट पहले से तय कीमत पर बिक चुके हैं, उनकी लागत बदलने का असर कंपनी के मार्जिन पर पड़ता है, क्योंकि उनकी बिक्री की कीमत अब नहीं बदलती। मार्जिन यानी बिक्री की रकम और लागत के बीच का अंतर।
  • रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 को RERA कहते हैं। इस कानून के तहत डेवलपर को ज्यादातर नए प्रोजेक्ट का विज्ञापन, बुकिंग या बिक्री शुरू करने से पहले उन्हें संबंधित राज्य की RERA अथॉरिटी में रजिस्टर कराना होता है। इसलिए रजिस्ट्रेशन और सरकारी मंजूरियों में लगने वाले समय का असर इस पर पड़ता है कि कोई प्रोजेक्ट कब बिक्री के लिए खुल सकता है।
  • जिन कंपनियों के पास ऑफिस, मॉल या होटल हैं, उनकी नियमित कमाई पर कुछ और चीजों का असर पड़ता है। जैसे, किरायेदार कंपनियों को ऑफिस के लिए कितनी जगह चाहिए, मॉल की दुकानों में कितनी बिक्री होती है, और होटल के कितने कमरे भरते हैं और किस दर पर। मॉल की बिक्री इसलिए मायने रखती है क्योंकि कई मॉल में दुकानों के किराये का एक हिस्सा उनकी बिक्री से जुड़ा होता है।
  • फ्लैट की बुकिंग (प्री-सेल्स) होते ही उसे कंपनी के रेवेन्यू यानी आय में नहीं गिना जाता। कई डेवलपर इसे कब्जा देने पर और कुछ निर्माण के साथ-साथ रेवेन्यू में दर्ज करते हैं। इसलिए किसी तिमाही के नतीजों में दिखने वाली कमाई उस तिमाही की बुकिंग से काफी अलग हो सकती है।

इस उद्योग के सारे 11 शेयर

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शेयरबंद भावआजहाई सेRSI1 साल की सबसे बड़ी गिरावट
डीएलएफ₹666.90+0.32%-15.21%52.4535%
फीनिक्स मिल्स₹1,887.30-0.8%-13.02%48.8324%
लोढ़ा डेवलपर्स₹1,059.60-2.92%-21.22%38.1345%
अनंत राज₹558.15-0.8%-24.94%36.4845%
प्रेस्टीज एस्टेट्स₹1,463.00-1.48%-18.96%47.5337%
गोदरेज प्रॉपर्टीज₹1,572.50-1.37%-33.14%33.1137%
ओबेरॉय रियल्टी₹1,706.00-0.81%-14.1%40.0922%
आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट₹1,079.90+1.28%-43.58%34.4146%
सिग्नेचर ग्लोबल₹705.40-0.89%-38.87%31.5938%
सोभा₹1,205.10+1.71%-30.42%46.6932%
ब्रिगेड एंटरप्राइजेज₹584.85+0.39%-29.62%47.2739%

भाव स्प्लिट और बोनस के हिसाब से समायोजित हैं। तरीका: पिछले साल की गिरावट का डेटा।

यह सलाह नहीं है। Tejii SEBI-पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट नहीं है। यह सूची किसी उद्योग या शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं है — ऊपर सिर्फ NSE के सार्वजनिक आंकड़े और उनका मतलब है।

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