मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र के शेयर: सिनेमा, टीवी चैनल, म्यूजिक लेबल और VFX कंपनियां
निफ्टी 500 के 4 शेयर · 14 अक्टूबर 2026 के बंद भाव
NSE की "Media Entertainment & Publication" श्रेणी में वे कंपनियां आती हैं जो मनोरंजन बनाती हैं, उसे दर्शकों तक पहुंचाती हैं, या उसके अधिकार लाइसेंस पर देकर कमाती हैं। नाम में "Publication" इसलिए है कि NSE अख़बार-पत्रिकाएं छापने वाली कंपनियों को भी इसी श्रेणी में रखता है, हालांकि नीचे दी गई लिस्टेड कंपनियों में कोई प्रकाशन कंपनी नहीं है। इनके काम आपस में काफ़ी अलग हैं। PVR INOX मल्टीप्लेक्स (कई पर्दों वाला सिनेमाघर) चलाती है; Sun TV Network मुख्य रूप से दक्षिण भारत की भाषाओं का ब्रॉडकास्टर (टीवी चैनल चलाने वाली कंपनी) है; और Zee Entertainment Enterprises कई भाषाओं में टीवी चैनल तथा ZEE5 ऐप चलाती है। Saregama India म्यूजिक लेबल है, यानी गानों की रिकॉर्डिंग पर कॉपीराइट रखने वाली कंपनी, जो अपने गाने OTT ऐप (ओवर-द-टॉप: सीधे इंटरनेट पर चलने वाले ऐप), सोशल मीडिया और विज्ञापनों को लाइसेंस पर देती है; NSE की 30 सितंबर 2026 की सूची से यह निफ्टी 500 में नहीं है, इसलिए नीचे की लिस्ट में नहीं आती। Prime Focus Limited का कारोबार उसकी सहायक कंपनी (subsidiary) DNEG चलाती है, जो मुख्य रूप से फिल्मों के लिए VFX (कंप्यूटर से बनाए दृश्य) और पोस्ट-प्रोडक्शन (शूटिंग के बाद का काम) करती है; DNEG के नतीजे Prime Focus के खातों में जुड़ते हैं।
यह उद्योग किन बातों से प्रभावित होता है
ये वे बातें हैं जिनका असर इस उद्योग पर आमतौर पर पड़ता है — यह भविष्यवाणी नहीं कि आगे क्या होगा।
- PVR INOX जैसी सिनेमाघर कंपनी की कमाई इससे जुड़ी है कि साल भर में कितनी फिल्में रिलीज़ हुईं और देखने कितने लोग आए। टिकट बिक्री का एक हिस्सा फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर (वितरक) के पास जाता है और बाकी सिनेमाघर के पास; सिनेमाघर का हिस्सा पहले हफ्ते में सबसे कम होता है और आगे बढ़ता है। खाने-पीने का सामान और सिनेमा में दिखने वाले विज्ञापन भी इसी पर टिके हैं कि कितने लोग आए, इसलिए दर्शकों की संख्या का असर इसकी तीनों कमाइयों पर एक साथ पड़ता है। फिल्में बनाने और बांटने का काम Sun TV Network, Zee Entertainment और PVR INOX भी करती हैं, इसलिए फिल्में कैसी चलीं इसका असर उन तक भी पहुंचता है।
- बड़ी फिल्मों की तारीखें त्योहारों और छुट्टियों के आसपास रखी जाती हैं, इसलिए किसी फिल्म का टलना या किसी तिमाही में बड़ी रिलीज़ कम रहना उस तिमाही के कारोबार पर असर डाल सकता है। फिल्म के सिनेमाघर में लगने और OTT पर आने के बीच कितना अंतर हो, यह कोई कानून तय नहीं करता; इस पर इंडस्ट्री में आपसी समझ बनती और बदलती रहती है, और यह अंतर घटने-बढ़ने का असर दोनों तरफ पड़ सकता है। 22 सितंबर 2025 से लागू दरों के अनुसार 100 रुपये तक की सिनेमा टिकट पर 5% और उससे महंगी टिकट पर 18% GST लगता है, जो टिकट की अंतिम कीमत का हिस्सा होता है।
- Sun TV Network और Zee Entertainment की कमाई का एक बड़ा हिस्सा विज्ञापन से आता है, और PVR INOX की कुछ कमाई सिनेमा में दिखने वाले विज्ञापनों से। यह पैसा उन कंपनियों के मार्केटिंग बजट से आता है जो अपना सामान या सेवा बेचती हैं, जैसे रोज़मर्रा का सामान (FMCG), गाड़ियां, मोबाइल ऐप और ई-कॉमर्स; उनका प्रचार खर्च घटने-बढ़ने का असर चैनल और सिनेमा चलाने वालों तक पहुंचता है। दूसरी तरफ कंटेंट इनकी सबसे बड़ी लागतों में से एक है: सीरियल, फिल्में और खेल के प्रसारण अधिकार खरीदने पर पैसा पहले खर्च होता है, और उसे कई सालों में थोड़ा-थोड़ा करके खाते में दर्ज किया जाता है, जिसे amortisation (एमॉर्टाइज़ेशन) कहते हैं।
- टीवी पर विज्ञापन की दरें इससे भी जुड़ी होती हैं कि कौन सा कार्यक्रम कितने लोग देख रहे हैं; यह गिनती BARC India करती रही है, जिसे आम बोलचाल में TRP कहते हैं। नई टेलीविज़न रेटिंग्स पॉलिसी 2026 के बाद रेटिंग एजेंसियों को नए सिरे से रजिस्ट्रेशन लेना है, और यह पूरा होने तक सूचना और प्रसारण मंत्रालय के निर्देश पर जुलाई 2026 से सभी श्रेणियों की टीवी रेटिंग छपनी बंद हैं; यह आम पैमाना उपलब्ध न होने का असर ब्रॉडकास्टर और विज्ञापनदाता, दोनों के मोलभाव पर पड़ सकता है। बड़े क्रिकेट टूर्नामेंट, चुनाव और त्योहारों के मौसम में विज्ञापन की मांग बढ़ती है, और ये हर तिमाही में बराबर नहीं आते।
- चैनल देखने के लिए लोग हर महीने केबल ऑपरेटर या DTH कंपनी (डायरेक्ट-टु-होम: छत की डिश से घर तक चैनल पहुंचाने वाली सेवा) को पैसे देते हैं, जिसका एक हिस्सा चैनल चलाने वाली कंपनी को मिलता है; इसे सब्सक्रिप्शन कमाई कहते हैं। इसका हिसाब TRAI (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के टैरिफ ऑर्डर से चलता है, जिसमें आखिरी संशोधन जुलाई 2024 में हुआ। ये नियम तय करते हैं कि चैनल अलग से (a-la-carte) कितने में बेचा जाए और पैकेज (bouquet) पर कितनी छूट दी जाए, इसलिए इनमें बदलाव का असर ब्रॉडकास्टर की सब्सक्रिप्शन कमाई पर पड़ सकता है। ZEE5 और Sun NXT जैसे OTT ऐप इस ढांचे से बाहर हैं; वहां कमाई सीधे दर्शकों से और कंटेंट लाइसेंस पर देने (syndication) से आती है।
- म्यूजिक लेबल की कमाई गानों के कॉपीराइट से आती है: लेबल अपने गाने म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप, YouTube, शॉर्ट-वीडियो ऐप, रेडियो और विज्ञापनों को लाइसेंस पर देता है। Saregama इसी तरह कमाती है, और Zee Entertainment की Zee Music Company भी गानों के अधिकारों पर काम करती है। ऐसे सौदे कुछ साल के लिए होते हैं और नवीनीकरण (renewal) पर शर्तें दोबारा तय होती हैं, इसलिए किसी बड़े प्लेटफॉर्म के साथ शर्तें बदलने का असर लेबल की कमाई पर पड़ सकता है। दुकानों और आयोजनों में गाना बजाने के लिए अलग लाइसेंस लेना पड़ता है, जो कॉपीराइट सोसाइटी वसूलती हैं: रचना और बोल के लिए IPRS, और रिकॉर्डिंग के लिए PPL India, जिसे जून 2026 में कॉपीराइट एक्ट की धारा 33(3) के तहत दोबारा यह दर्जा मिला।
- Prime Focus का कारोबार बाकी कंपनियों से अलग है: यह समूह मुख्य रूप से दूसरे स्टूडियो और स्ट्रीमिंग कंपनियों के लिए VFX और पोस्ट-प्रोडक्शन करता है, हालांकि Prime Focus Studios के ज़रिए कुछ फिल्में बनाने और उनमें पैसा लगाने का काम भी करता है। इसलिए काम तब आता है जब दुनिया भर के स्टूडियो बड़े बजट की फिल्में बना रहे हों; हॉलीवुड में हड़ताल जैसी रुकावटें या प्रोडक्शन बजट में कटौती इन कामों पर असर डाल सकती हैं। DNEG का बहुत सा बिल डॉलर या पाउंड में बनता है जबकि काम का बड़ा हिस्सा भारत में होता है, इसलिए रुपये की विनिमय दर का असर कमाई और लागत दोनों पर पड़ सकता है। अलग-अलग देशों की टैक्स छूट भी तय करती है कि काम कहां जाए।
इस उद्योग के सारे 4 शेयर
सबसे ज्यादा कारोबार वाले शेयर पहले। नाम पर क्लिक करके पूरा ब्यौरा देखें।
| शेयर | बंद भाव | आज | हाई से | RSI | 1 साल की सबसे बड़ी गिरावट |
|---|---|---|---|---|---|
| प्राइम फोकस | ₹282.50 | +1.25% | -23.02% | 42.83 | 40% |
| पीवीआर आइनॉक्स | ₹1,381.00 | -1.67% | -3.09% | 62.07 | 26% |
| ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज | ₹73.81 | -0.45% | -37.65% | 39.37 | 41% |
| सन टीवी नेटवर्क | ₹653.10 | +2.68% | -1.63% | 77.09 | 31% |
भाव स्प्लिट और बोनस के हिसाब से समायोजित हैं। तरीका: पिछले साल की गिरावट का डेटा।