मेटल और माइनिंग शेयर: स्टील, एल्युमिनियम और खनन कंपनियां

निफ्टी 500 के 20 शेयर · 14 अक्टूबर 2026 के बंद भाव

इस समूह में वे कंपनियां हैं जो स्टील और स्टेनलेस स्टील बनाती हैं, एल्युमिनियम, तांबा (कॉपर) और जस्ता (जिंक) जैसी धातुओं का उत्पादन करती हैं, या खदानों से लौह अयस्क (आयरन ओर), बॉक्साइट (वह खनिज जिससे एल्युमिनियम बनता है) और लिग्नाइट जैसे खनिज निकालती हैं। कुछ कंपनियां स्पंज आयरन, आयरन ओर पेलेट और फेरो अलॉय (स्टील बनाने में मिलाई जाने वाली मिश्र धातु) बनाती हैं, कुछ जस्ते के साथ सीसा (लेड) और चांदी भी निकालती हैं, और कुछ पुरानी बैटरियों और स्क्रैप (कबाड़) से सीसा, तांबा और एल्युमिनियम जैसी धातुएं वापस हासिल करती हैं, जिसे रीसाइक्लिंग कहते हैं। NSE ने इसी समूह में कुछ ऐसी कंपनियां भी रखी हैं जिनका कारोबार धातु और खनन से आगे भी फैला है, जैसे अदाणी एंटरप्राइजेज, जो हवाई अड्डों और सड़कों जैसे क्षेत्रों में भी काम करती है।

28%आम शेयर की 1 साल में सबसे बड़ी गिरावट
17%200-दिन के औसत से ऊपर
39आम RSI
0 शेयर52 हफ्ते के हाई के 5% के अंदर

यह उद्योग किन बातों से प्रभावित होता है

ये वे बातें हैं जिनका असर इस उद्योग पर आमतौर पर पड़ता है — यह भविष्यवाणी नहीं कि आगे क्या होगा।

  • एल्युमिनियम, तांबा और जस्ता जैसी धातुओं के भाव LME (London Metal Exchange, लंदन का एक बड़ा बाजार जिसके भाव को इन धातुओं के सौदों में अक्सर आधार माना जाता है) जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़े रहते हैं। इसलिए वहां भाव बदलने का असर इन धातुओं को बेचने वाली कंपनियों को हर टन पर मिलने वाली रकम पर पड़ सकता है।
  • धातुओं के अंतरराष्ट्रीय भाव ज्यादातर डॉलर में होते हैं, और कोकिंग कोल (स्टील बनाने में लगने वाला खास कोयला) जैसा कच्चा माल अक्सर विदेश से आता है। इसलिए रुपये-डॉलर की दर बदलने पर कई कंपनियों की बिक्री या लागत, या दोनों, का रुपये में हिसाब बदल सकता है।
  • ज्यादातर स्टील बनाने में लौह अयस्क और कोयला लगता है। एल्युमिनियम बनाने में बहुत ज्यादा बिजली लगती है, जो भारत में कई कंपनियां अपने कोयला-आधारित बिजलीघरों से बनाती हैं। इसलिए लौह अयस्क, कोयले और बिजली की कीमत बदलने से इन्हें खरीदने वाली कंपनियों की लागत बदलती है, और इसके साथ बिक्री के दाम और लागत के बीच का अंतर (मार्जिन) भी बदल सकता है। ध्यान रहे कि लौह अयस्क बेचना खदान वाली कंपनी की कमाई का जरिया है, जबकि उसे बाहर से खरीदने वाली स्टील कंपनी के लिए यह लागत है।
  • स्टील की मांग का बड़ा हिस्सा निर्माण (कंस्ट्रक्शन), इंफ्रास्ट्रक्चर, गाड़ियों और मशीनरी से आता है; तांबे और एल्युमिनियम की मांग बिजली के तारों और केबल से भी जुड़ी है, और जस्ते का सबसे बड़ा इस्तेमाल स्टील पर जंग-रोधी परत चढ़ाने में होता है। भारत में इन क्षेत्रों की गतिविधि इन धातुओं की घरेलू मांग पर असर डालती है। चीन दुनिया में स्टील और एल्युमिनियम का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, इसलिए वहां की मांग और वहां से होने वाले निर्यात में बदलाव का असर अंतरराष्ट्रीय भावों पर पड़ता है।
  • सरकारी नीतियां भी असर डालती हैं, जैसे स्टील पर आयात शुल्क, लौह अयस्क जैसे कुछ खनिजों पर निर्यात शुल्क, खदानों की नीलामी के नियम और रॉयल्टी (खनिज निकालने पर राज्य सरकार को दिया जाने वाला शुल्क)। इनके बदलने से घरेलू कंपनियों के विदेशी माल से मुकाबले, खनन कंपनियों की निर्यात से होने वाली कमाई, और कच्चा माल पाने की लागत पर असर पड़ सकता है।

इस उद्योग के सारे 20 शेयर

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शेयरबंद भावआजहाई सेRSI1 साल की सबसे बड़ी गिरावट
अदानी एंटरप्राइजेज₹2,722.60+1.02%-16.1%41.4833%
टाटा स्टील₹174.49-0.29%-22.24%38.7522%
वेदांता₹250.00-2.46%-30.56%41.0830%
जेएसडब्ल्यू स्टील₹1,176.20-0.03%-12.94%33.5213%
हिंडाल्को₹882.50-2.19%-24.96%31.3923%
वेदांता एल्युमिनियम मेटल₹367.55-1.67%-31.55%29.7226%
नेशनल एल्युमिनियम₹323.15+0.67%-27.41%37.2530%
हिंदुस्तान कॉपर₹467.65-0.09%-38.47%38.6541%
सेल₹170.00-1.6%-18.93%41.222%
हिंदुस्तान जिंक₹540.00-1.75%-26.33%38.8733%
वेदांता आयरन एंड स्टील₹30.14+4.98%-32.69%43.6733%
एनएमडीसी₹71.08-0.36%-27.09%29.7627%
जिंदल स्टील एंड पावर₹1,029.20-0.24%-21.21%34.5122%
जिंदल स्टेनलेस₹714.05-0.9%-19.23%44.0824%
लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी₹1,843.80+1.74%-13.23%51.321%
गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन₹474.95-1.08%-38.47%30.9238%
सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स₹482.50+2.25%-22.68%40.6623%
ग्रेविटा इंडिया₹1,494.20-0.48%-21.92%39.4131%
एनएमडीसी स्टील₹39.63-1.1%-26.27%38.2830%
जैन रिसोर्स रीसाइक्लिंग₹287.20-0.47%-51.65%48.7452%

भाव स्प्लिट और बोनस के हिसाब से समायोजित हैं। तरीका: पिछले साल की गिरावट का डेटा।

यह सलाह नहीं है। Tejii SEBI-पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट नहीं है। यह सूची किसी उद्योग या शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं है — ऊपर सिर्फ NSE के सार्वजनिक आंकड़े और उनका मतलब है।

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