टेलीकॉम शेयर: दूरसंचार इंडस्ट्री की कंपनियों को समझें
निफ्टी 500 के 11 शेयर · 14 अक्टूबर 2026 के बंद भाव
Nifty 500 की इस सूची में मोबाइल और इंटरनेट सेवा देने वाली तीन कंपनियां हैं: Bharti Airtel, Bharti Hexacom और Vodafone Idea। Jio की पेरेंट कंपनी Reliance Industries इस समूह में नहीं है, NSE ने उसे 'Oil Gas & Consumable Fuels' समूह में रखा है। इनके अलावा मोबाइल टावरों पर ऑपरेटरों को जगह किराये पर देने वाली कंपनी (Indus Towers), मुख्य रूप से बिज़नेस और सरकारी संस्थानों को डेटा व नेटवर्क सेवा देने वाली कंपनियां (Tata Communications, Tata Teleservices Maharashtra, RailTel), और फाइबर केबल व नेटवर्क उपकरण बनाने या नेटवर्क बिछाने के प्रोजेक्ट करने वाली कंपनियां (HFCL, Tejas Networks, ITI) भी इसमें हैं। यानी इस समूह में सिर्फ फोन सेवा देने वाली कंपनियां नहीं हैं, नेटवर्क बनाने और चलाने से जुड़ी दूसरी कंपनियां भी हैं।
यह उद्योग किन बातों से प्रभावित होता है
ये वे बातें हैं जिनका असर इस उद्योग पर आमतौर पर पड़ता है — यह भविष्यवाणी नहीं कि आगे क्या होगा।
- स्पेक्ट्रम यानी मोबाइल सिग्नल के लिए इस्तेमाल होने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी। सरकार इसे नीलामी के ज़रिये एक तय अवधि के लिए इस्तेमाल करने को देती है, और इसके लिए ऑपरेटरों को बड़ी रकम चुकानी पड़ती है। इसलिए नीलामी का खर्च और भुगतान की शर्तें मोबाइल ऑपरेटरों के कर्ज़ और नकदी पर असर डालती हैं।
- मोबाइल प्लान (टैरिफ) की कीमत बदलने का असर ARPU (हर ग्राहक से होने वाली औसत कमाई) पर पड़ता है। पर ग्राहक सस्ता प्लान चुन सकते हैं, दूसरा SIM बंद कर सकते हैं या दूसरी कंपनी में जा सकते हैं। इसलिए ऑपरेटरों की कमाई प्लान की कीमत और ग्राहकों की संख्या, दोनों से जुड़ी होती है।
- मोबाइल ऑपरेटर जैसी लाइसेंस वाली टेलीकॉम सेवा कंपनियां अपनी कमाई के आधार पर सरकार को लाइसेंस फीस देती हैं, और कुछ पुराने स्पेक्ट्रम पर इस्तेमाल शुल्क भी लगता है। AGR (Adjusted Gross Revenue) वह कमाई है जिसके आधार पर ये शुल्क गिने जाते हैं। AGR की परिभाषा, पुराने बकाये या भुगतान की शर्तों पर सरकार या अदालत का फैसला इन कंपनियों की देनदारी (यानी सरकार को चुकाई जाने वाली रकम) बदल सकता है।
- नेटवर्क उपकरण और फाइबर केबल बनाने या नेटवर्क बिछाने के प्रोजेक्ट करने वाली कंपनियों का काम काफी हद तक इससे जुड़ा होता है कि मोबाइल ऑपरेटर और सरकार (जैसे ग्राम पंचायतों तक फाइबर पहुंचाने वाली BharatNet योजना में) नेटवर्क बनाने पर कितना खर्च करते हैं। 4G या 5G नेटवर्क लगाने और फाइबर बिछाने पर होने वाला खर्च घटने-बढ़ने से इन कंपनियों को मिलने वाले ऑर्डर पर असर पड़ता है।
- टावर कंपनियां अपने टावरों पर जगह मोबाइल ऑपरेटरों को किराये पर देती हैं। इसलिए अगर कोई बड़ा ग्राहक (मोबाइल ऑपरेटर) पैसों की तंगी में हो या नेटवर्क बढ़ाने की अपनी योजना बदले, तो टावर कंपनी की किराये की आमदनी और बकाया पैसा वसूलने पर असर पड़ता है।
- बिज़नेस और सरकारी संस्थानों को डेटा व नेटवर्क सेवा देने वाली कंपनियों की कमाई काफी हद तक इससे जुड़ी होती है कि कंपनियां और सरकारी विभाग इंटरनेट कनेक्टिविटी और नेटवर्क से जुड़ी सेवाओं पर कितना खर्च करते हैं। RailTel रेल मंत्रालय के तहत आने वाली सरकारी कंपनी है, इसलिए सरकारी विभागों से मिलने वाले प्रोजेक्ट भी उसके काम का हिस्सा हैं।
इस उद्योग के सारे 11 शेयर
सबसे ज्यादा कारोबार वाले शेयर पहले। नाम पर क्लिक करके पूरा ब्यौरा देखें।
| शेयर | बंद भाव | आज | हाई से | RSI | 1 साल की सबसे बड़ी गिरावट |
|---|---|---|---|---|---|
| भारती एयरटेल | ₹1,794.60 | -0.66% | -17.47% | 45.82 | 19% |
| वोडाफोन आइडिया | ₹12.67 | -1.02% | -19.76% | 38.07 | 29% |
| इंडस टावर्स | ₹376.80 | -0.51% | -21.74% | 49.05 | 25% |
| स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज | ₹924.65 | -4.03% | -12.03% | 55.89 | 30% |
| एचएफसीएल | ₹256.65 | -2.04% | -6.98% | 59.1 | 22% |
| तेजस नेटवर्क्स | ₹464.30 | +0.26% | -27.99% | 37.69 | 51% |
| टाटा कम्युनिकेशंस | ₹1,658.90 | -0.81% | -21.38% | 41.89 | 32% |
| रेलटेल | ₹254.40 | +1.11% | -36.53% | 44.13 | 38% |
| भारती हेक्साकॉम | ₹1,570.30 | +1.39% | -19.7% | 60.73 | 28% |
| टाटा टेलीसर्विसेज (महाराष्ट्र) | ₹33.92 | +0.47% | -43.54% | 41.46 | 47% |
| आईटीआई | ₹244.04 | -0.45% | -34.55% | 40.24 | 34% |
भाव स्प्लिट और बोनस के हिसाब से समायोजित हैं। तरीका: पिछले साल की गिरावट का डेटा।